आगरा में धक्कामुक्की में जमीन पर गिरे सिटी मजिस्ट्रेट, एसआईआर के विरोध में किसानों का हंगामा

आगरा में एसआईआर के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) और संयुक्त किसान मोर्चा के प्रदर्शन के दौरान किसानों और पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के बीच धक्कामुक्की हो गई। घटना में सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार जमीन पर गिर गए, जबकि भाकियू जिलाध्यक्ष राजवीर लवानिया के हाथ में चोट आई। किसानों ने एसआईआर रद्द करने, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जांच, पात्र मतदाताओं के अधिकार बहाल करने, 405 किसानों के बिजली बिलों की गड़बड़ी दूर करने और एत्मादपुर मदरा में भूमि अधिग्रहण संबंधी शिकायतों के समाधान की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।

Oct 23, 2026 - 18:27
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आगरा में धक्कामुक्की में जमीन पर गिरे सिटी मजिस्ट्रेट, एसआईआर के विरोध में किसानों का हंगामा
जगह-जगह प्रदर्शन करते किसान।

 

आगरा। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में शुक्रवार को आगरा में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) और संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारियों का प्रदर्शन उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब किसानों और पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के बीच धक्कामुक्की हो गई। इस दौरान सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार जमीन पर गिर पड़े, जबकि भाकियू के जिलाध्यक्ष राजवीर लवानिया के हाथ में चोट लग गई। घटना के बाद किसानों ने सुभाष पार्क के सामने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखीं।

किसानों का प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया रद्द करने और मतदाता सूची से हटाए गए पात्र नागरिकों के मतदान का अधिकार बहाल करने की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। किसान जिलाधिकारी को ज्ञापन देने के लिए कलेक्ट्रेट की ओर जाना चाहते थे, लेकिन एमएलसी चुनाव के मतदान के मद्देनजर पुलिस ने उन्हें थाना नाई की मंडी में रोक लिया। इसके बाद किसानों ने मार्च निकालने का प्रयास किया, जिसको लेकर मौके पर मौजूद अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच तनातनी बढ़ गई।

तय समय पर अधिकारी नहीं पहुंचे तो किसानों ने किया कलेक्ट्रेट कूच

भाकियू नेताओं के मुताबिक, प्रशासन की ओर से किसानों को सुबह 11:30 बजे जिलाधिकारी के आने और ज्ञापन लेने का समय दिया गया था। लेकिन दोपहर 12 बजे तक कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। इससे नाराज किसान नेताओं ने कलेक्ट्रेट की ओर मार्च करने का निर्णय लिया। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया।

इसी दौरान सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार ने किसानों से मौके पर ही ज्ञापन सौंपने को कहा। हालांकि, किसान जिलाधिकारी को ज्ञापन देने के लिए कलेक्ट्रेट जाने की मांग पर अड़े रहे। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी बढ़ गई और देखते ही देखते धक्कामुक्की शुरू हो गई। इस घटनाक्रम में सिटी मजिस्ट्रेट जमीन पर गिर गए, जबकि भाकियू जिलाध्यक्ष राजवीर लवानिया के हाथ में चोट लग गई। घटना के बाद प्रदर्शनकारियों ने सुभाष पार्क के सामने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान एमएलसी चुनाव की मतदान व्यवस्था को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से किसानों को आगे बढ़ने से रोका जा रहा था।

एसआईआर रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग

किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने और मतदाता सूची से हटाए गए पात्र नागरिकों का मतदान अधिकार बहाल करने की मांग उठाई। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई करने और चुनाव प्रक्रिया में सुधार किए जाने की मांग भी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में किसी भी पात्र नागरिक का नाम नहीं कटना चाहिए और प्रत्येक योग्य मतदाता को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर मिलना चाहिए। इसके साथ ही किसानों ने शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने वाले लोगों के कथित उत्पीड़न की जांच कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की।

405 किसानों के बिजली बिलों में गड़बड़ी दूर करने की मांग

राजनीतिक और चुनावी मुद्दों के साथ किसानों ने स्थानीय समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। ज्ञापन में टोरेंट पावर क्षेत्र के 405 किसानों के बिजली बिलों में कथित गड़बड़ियों को दूर कराने की मांग की गई। किसानों ने कहा कि बिजली बिलों की विसंगतियों का समाधान किया जाए, ताकि किसानों को अनावश्यक आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके अलावा खेती के महत्वपूर्ण समय में किसानों के बिजली कनेक्शन नहीं काटने की मांग भी रखी गई। किसान नेताओं का कहना था कि कृषि कार्यों के लिए बिजली बेहद जरूरी है और कनेक्शन काटे जाने से सिंचाई सहित खेती से जुड़े दूसरे काम प्रभावित होते हैं।

एत्मादपुर मदरा में भूमि अधिग्रहण का मुद्दा भी उठाया

किसानों ने एत्मादपुर मदरा में भूमि अधिग्रहण से जुड़ी शिकायतों का समाधान कराने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि भूमि अधिग्रहण के मामलों में किसानों के हितों की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि लंबे समय से सर्किल रेट में वृद्धि नहीं होने के बावजूद किसानों की जमीन पुरानी दरों पर अधिग्रहित की जा रही है। किसानों ने मांग की कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। उनका कहना था कि जमीन किसानों की आजीविका का प्रमुख साधन है, इसलिए अधिग्रहण की प्रक्रिया में उनके हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए।

नजरबंदी की आशंका में रात में ही कलेक्ट्रेट पहुंच गए थे जिलाध्यक्ष

भाकियू जिलाध्यक्ष राजवीर लवानिया ने बताया कि उन्हें नजरबंदी किए जाने की आशंका थी। इसी वजह से वह रात में ही कलेक्ट्रेट पहुंच गए थे। बाद में उन्हें अन्य पदाधिकारियों के साथ थाना नाई की मंडी ले जाया गया। प्रदर्शन में मंडल अध्यक्ष रणवीर सिंह चाहर, प्रदेश सचिव ओम प्रकाश सिंह, द्वारिका प्रसाद यादव, अजय राज शास्त्री, वेद प्रकाश पचौरी, श्यामवीर सिंह चाहर और नत्थू सिंह धाकरे समेत बड़ी संख्या में किसान नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। एसआईआर के विरोध से शुरू हुआ यह प्रदर्शन बिजली बिलों और भूमि अधिग्रहण जैसे स्थानीय मुद्दों तक पहुंचा। वहीं, ज्ञापन देने को लेकर किसानों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हुई धक्कामुक्की ने शुक्रवार को आगरा में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बढ़ा दी।