महाराणा प्रताप का राष्ट्रप्रेम और महाराजा अग्रसेन का समाजवाद आज भी प्रासंगिक: संजीव अग्रवाल
बरेली। बरेली कैंट के भाजपा विधायक एवं प्रदेश सह-कोषाध्यक्ष संजीव अग्रवाल ने कहा कि महाराणा प्रताप का राष्ट्रप्रेम और महाराजा अग्रसेन के सामाजिक सहयोग एवं समानता के आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं। महाराणा प्रताप ने स्वाभिमान, स्वतंत्रता और मातृभूमि की रक्षा के लिए संघर्ष की प्रेरणा दी, जबकि महाराजा अग्रसेन ने सामाजिक सहयोग, समानता और सामूहिक उन्नति का संदेश दिया। क्षत्रिय (राजपूत) महासभा के तत्वावधान में आयोजित शस्त्र पूजन एवं अलंकरण समारोह में उन्होंने कहा कि क्षत्रिय समाज की पहचान देने वालों में है, लेने वालों में नहीं। इस अवसर पर उन्होंने पत्रकारिता, शिक्षा और समाजसेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों की 21 प्रतिभाओं को स्व. राजवीर सिंह स्मृति सम्मान से सम्मानित किया।
मुख्य अतिथि संजीव अग्रवाल ने शस्त्र पूजन के बाद अपने संबोधन में कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन कठिन परिस्थितियों में भी सिद्धांतों पर अडिग रहने और मातृभूमि के सम्मान की रक्षा करने की प्रेरणा देता है। राष्ट्रप्रेम केवल भावना तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि देश की एकता, अखंडता और सम्मान की रक्षा के लिए अपने दायित्वों का निर्वहन करना भी जरूरी है। महाराणा प्रताप का संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को स्वाभिमान, साहस, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश देता है।
क्षत्रिय समाज का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समाज को अपनी परंपराओं और मूल्यों पर गर्व होना चाहिए। क्षत्रिय देने वालों में हैं, लेने वालों में नहीं। क्षत्रिय किसी के सामने हाथ नहीं फैलाता। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप और महाराजा अग्रसेन के आदर्शों को समाज के सामने रखने का उद्देश्य राष्ट्रप्रेम, कर्तव्य और सामाजिक एकजुटता की भावना को मजबूत करना है।
संजीव अग्रवाल ने भारतीय इतिहास और परंपराओं में सूर्यवंशी परंपरा के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश की सूर्यवंशी परंपरा से जुड़े थे। वहीं, महाराजा अग्रसेन को अग्रवाल समाज की परंपराओं में सूर्यवंशी क्षत्रिय कुल से संबंधित माना जाता है। दोनों महापुरुषों की परंपराएं राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान, कर्तव्यपालन और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की प्रेरणा देती हैं।
उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन मातृभूमि की स्वतंत्रता, सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष का प्रतीक है। विपरीत परिस्थितियों में भी सिद्धांतों से समझौता न करने का उनका संकल्प आज भी प्रासंगिक है। दूसरी ओर, महाराजा अग्रसेन को सामाजिक सहयोग, समानता, उद्यमशीलता और लोककल्याण की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। उनके आदर्श समाज के प्रत्येक वर्ग की उन्नति, जरूरतमंदों की सहायता और सामूहिक विकास की प्रेरणा देते हैं। समाज की संपन्नता तभी सार्थक है, जब उसका लाभ व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचे।
संजीव अग्रवाल ने अंत में सूर्यवंशी परंपरा का हर क्षण निर्वहन करने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने पत्रकारिता, मेधावी विद्यार्थियों और समाजसेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 21 प्रतिभाओं को पटका पहनाकर स्व. राजवीर सिंह स्मृति सम्मान प्रदान किया और समाजसेवियों के कार्यों की सराहना की।
सम्मानित होने वालों में वरिष्ठ पत्रकार आरके सिंह, बार एसोसिएशन के महासचिव गौरव राठौड़, बाल कल्याण समिति की मजिस्ट्रेट डॉ. राखी चौहान, कवि भारतेंदु सिंह, सभासद श्याम सिंह चौहान, समाजसेवी बंटी ठाकुर, आरती सिंह, रिदम भदौरिया, प्राची सिंह, पलक सिंह, साक्षी सिंह, सिद्धि तोमर, दिव्यांशी सिंह, आयुषी सिंह, अहम चौहान, आराध्या चौहान, आकृति, अंशिका और प्रतीक शामिल रहे।
समारोह में ठाकुर ऋषि पाल सिंह, डॉ. एके चौहान, बंटी ठाकुर, सीपी सिंह चौहान, धीरेन्द्र वीर सिंह, प्रमुख पति अरविन्द चौहान, जगत पाल सिंह, अजय प्रताप सिंह और देवेंद्र सिंह ने भी विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर केपी सिंह भदौरिया, सत्येंद्र सिंह चौहान, प्रेमपाल सिंह तोमर, राकेश चौहान, अनिल सिंह, एनएस पंवार, प्रमोद सिंह, जगदीश सिंह, मुनेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह, राम कुमार सिंह चौहान, राकेश भदौरिया, अतुल सिंह, बुद्धपाल सिंह, अशोक सिंह, रामेंद्र सिंह भदौरिया, हरवीर सिंह और ओंकार सिंह रघुवंशी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।