अखिलेश के रामपुर दौरे में आजम खान से प्रस्तावित मुलाकात पर मौलाना शहाबुद्दीन का तंज, बोले- बहुत देर कर दी मेहरबां आते-आते

रामपुर में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की आजम खान से प्रस्तावित मुलाकात को लेकर सियासत गरमा गई है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने इस दौरे को चुनावी स्टंट करार देते हुए सवाल उठाया है कि आजम खान के चार साल से अधिक समय तक सीतापुर जेल में रहने और रामपुर जेल में 370 दिन बिताने के दौरान अखिलेश उनसे मिलने क्यों नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा कि अब विधानसभा चुनाव नजदीक आते देख सपा अध्यक्ष को आजम खान और मुस्लिम समाज की याद आ रही है। मौलाना ने चेतावनी दी कि मुस्लिम समाज को बंधुआ मजदूर समझने की राजनीति अब नहीं चलेगी और सपा को 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

Oct 21, 2026 - 19:57
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अखिलेश के रामपुर दौरे में आजम खान से प्रस्तावित मुलाकात पर मौलाना शहाबुद्दीन का तंज, बोले- बहुत देर कर दी मेहरबां आते-आते
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी।

-आरके सिंह- 

बरेली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के गुरुवार को प्रस्तावित रामपुर दौरे और जेल में पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री आजम खान से मुलाकात के कार्यक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने इस दौरे के समय पर सवाल उठाते हुए इसे चुनावी स्टंट बताया है। उनका कहना है कि आजम खान लंबे समय तक जेल में रहे, लेकिन उस दौरान अखिलेश यादव ने उनसे मुलाकात नहीं की। अब चुनाव नजदीक आने पर इस मुलाकात का कार्यक्रम बनाया जा रहा है।

'मुस्लिम समाज अब किसी के इशारे पर वोट नहीं करेगा'

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि आजम खान सीतापुर जेल में चार साल से अधिक समय तक रहे और अब रामपुर जेल में 370 दिन बिता चुके हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अखिलेश यादव अब तक उनसे मिलने क्यों नहीं गए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ''बहुत देर कर दी मेहरबां आते-आते।'' मौलाना के मुताबिक, रामपुर की जनता और मुस्लिम समाज के बीच भी इस देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव को यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि आजम खान से मुलाकात के बाद पूरा मुस्लिम समाज एकतरफा समाजवादी पार्टी के पक्ष में मतदान करेगा। मौलाना ने कहा कि मुस्लिम समाज अब किसी राजनीतिक दल या नेता के इशारे पर वोट नहीं करता, बल्कि अपने हितों और राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर फैसला लेता है।

चुनावी नतीजों का हवाला देकर सपा की रणनीति पर सवाल

मौलाना शहाबुद्दीन ने अपने दावों के समर्थन में हालिया चुनावी नतीजों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि आजम खान परिवार के विरोध के बावजूद मौलाना मुहीबुल्लाह नदवी चुनाव जीते। वहीं, आजम खान की परंपरागत सीट पर भाजपा के आकाश सक्सेना ने जीत दर्ज की। इसके अलावा अब्दुल्ला आजम के प्रभाव वाली सीट पर भी शफीक अहमद अंसारी ने कब्जा जमाया।

मौलाना ने इन उदाहरणों के जरिए कहा कि मुस्लिम मतदाताओं के राजनीतिक व्यवहार को किसी एक नेता के प्रभाव तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार, अब मुस्लिम समाज अपने राजनीतिक विकल्पों और हितों को लेकर स्वतंत्र रूप से निर्णय ले रहा है।

भाजपा से आए नेताओं को टिकट देने पर भी घेरा

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने समाजवादी पार्टी की टिकट वितरण नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव उन नेताओं को पार्टी में शामिल कर रहे हैं, जो पिछले 10 से 15 वर्षों तक भाजपा में रहे हैं। ऐसे नेताओं को टिकट देकर सपा मुस्लिम समाज से समर्थन की उम्मीद कर रही है।

उन्होंने बरेली जिले के आंवला और बिथरी चैनपुर विधानसभा क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि पहले मुसलमानों के खिलाफ काम करने वाले नेताओं को सपा में जगह दी जा रही है। मौलाना के मुताबिक, इस तरह की राजनीति से मुस्लिम समाज के बीच असंतोष पैदा हो सकता है।

'मुस्लिम समाज को बंधुआ मजदूर समझना बंद करे सपा'

मौलाना शहाबुद्दीन ने सपा को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि पार्टी को मुस्लिम समाज को बंधुआ मजदूर या गुलाम समझने की मानसिकता छोड़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज अब राजनीति में बराबरी की हिस्सेदारी चाहता है और केवल चुनाव के समय उसकी याद करने से काम नहीं चलेगा।

उन्होंने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी मुस्लिम समाज की राजनीतिक भागीदारी, प्रतिनिधित्व और हितों से जुड़े सवालों को नजरअंदाज करती रही, तो उसे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

SP_Singh AURGURU Editor