दो बैंकों का निजीकरण संभव,  चार सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी बेचने की तैयारी, सरकार उठा रही है कई कदम

सरकार ने हाल में आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बिक्री की घोषणा की थी। सरकार इसके बाद और चार सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 75% करने की योजना बना रही है। सरकार का लक्ष्य लॉन्ग टर्म में तीन से चार सरकारी बैंक बनाए रखना है।

Oct 23, 2026 - 08:58
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दो बैंकों का निजीकरण संभव,  चार सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी बेचने की तैयारी, सरकार उठा रही है कई कदम

नई दिल्ली। सरकार चार सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी कम कर सकती है। इनमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक शामिल हैं। स्टॉक मार्केट रेगुलेटर सेबी के न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियम के मुताबिक सरकार इन बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 75% करने पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक सरकार साथ ही पब्लिक सेक्टर बैंकों के एकीकरण के अगले दौर की रणनीति पर भी काम कर रही है। इसके तहत निजीकरण के लिए दो और बैंकों की पहचान की जा सकती है।

सरकार ने 2021-22 के बजट में घोषणा की थी कि आईडीबीआई बैंक के अलावा दो पब्लिक सेक्टर बैंकों और एक जनरल इंश्योरेंस कंपनी का निजीकरण किया जाएगा। हाल में सरकार ने घोषणा की कि कनाडा के भारतीय मूल के अरबपति प्रेम वत्स की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स आईडीबीआई बैंक में 52,878 करोड़ रुपये में 60.72% हिस्सेदारी खरीदेगी। केंद्र सरकार लॉन्ग टर्म में तीन से चार बड़े सरकारी बैंक बनाए रखना चाहती है।

कुछ समय पहले खबर आई थी कि नीति आयोग ने निजीकरण के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक को शॉर्टलिस्ट किया था। एक अधिकारी ने कहा, "पहला कदम अगले एक साल में इन चार बैंकों में पब्लिक शेयरहोल्डिंग को बढ़ाना है। बैंक अपनी रणनीति के अनुसार बाजार से फंड जुटा सकते हैं, जबकि सरकार बाजार की स्थितियों को देखते हुए ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेचेगी।"

पब्लिक फ्लोट के बढ़ने से इन बैंकों के वैल्यूएशन में भी सुधार होने की उम्मीद है। वित्त मंत्रालय को ईमेल के जरिए भेजे गए सवालों का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला। एक अन्य अधिकारी ने कहा, "हमारा लक्ष्य तीन या चार बड़े बैंक रखना है। इस संबंध में कुछ सुझाव बैंकों की ओर से ही आने चाहिए, जो टेक्नोलॉजी की अनुकूलता, भौगोलिक विस्तार और बिजनेस मिक्स जैसे कारकों पर आधारित हों।"

अधिकारी ने कहा कि बैंकों के निजीकरण के लिए कानूनों में बदलाव की जरूरत होगी। इसमें बैंकिंग कंपनीज (एक्विजिशन एंड ट्रांसफर ऑफ अंडरटेकिंग्स ) एक्ट भी शामिल है। इस प्रक्रिया को बैंकों के कंसोलिडेशन के काम के साथ-साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। सरकार ने वित्तीय संस्थानों सहित सरकारी कंपनियों को अगस्त 2026 तक 25% न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियम से छूट दी थी और उम्मीद है कि इस छूट को आगे और बढ़ाने की घोषणा की जाएगी।