रंगोदय में नाटकों ने झकझोरा मन, ‘अंतर्द्वंद’ ने उठाए रिश्तों और मातृत्व के सवाल

आगरा। संस्कार भारती नाट्य केंद्र के राष्ट्रीय नाट्य एवं नृत्य महोत्सव ‘रंगोदय’ में मंचित नाटकों ने मानवीय संवेदनाओं, पारिवारिक रिश्तों, जीवन-संघर्षों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जुड़े सवालों को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा। जयपुर की तामहणकर थिएटर अकैडमी के नाटक ‘अंतर्द्वंद’ ने मातृत्व, सरोगेसी, अनाथ बच्चों के भविष्य और परिवार में प्रेम व अपनत्व के महत्व को रेखांकित कर दर्शकों को भावुक किया। मिल्टन पब्लिक स्कूल, अवधपुरी कॉलोनी में आयोजित महोत्सव में देश के विभिन्न प्रांतों से आए रंगकर्मी और नृत्य कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से भारतीय सांस्कृतिक विविधता के रंग बिखेर रहे हैं। महोत्सव 26 अक्टूबर तक चलेगा।

Oct 23, 2026 - 07:01
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रंगोदय में नाटकों ने झकझोरा मन, ‘अंतर्द्वंद’ ने उठाए रिश्तों और मातृत्व के सवाल
संस्कार भारती द्वारा आयोजित रंगोदय में मंचित एक नाटक का एक दृश्य। दूसरे चित्र में रंगोदय के उद्घाटन समारोह में मंचस्थ अतिथिगण।

संस्कार भारती नाट्य केंद्र की ओर से आयोजित महोत्सव का शुभारंभ मिल्टन पब्लिक स्कूल परिसर में हुआ। यहां तैयार ‘रंगग्राम’ में देश के विभिन्न राज्यों से आए वरिष्ठ और युवा रंगकर्मियों तथा लोक एवं शास्त्रीय नृत्य कलाकारों की भागीदारी से लघु भारत की सांस्कृतिक झलक दिखाई दी। अलग-अलग क्षेत्रों की कला और परंपराओं ने महोत्सव को विविधतापूर्ण स्वरूप दिया।

उद्घाटन मिल्टन पब्लिक स्कूल के प्रबंध निदेशक एवं रंगोदय महोत्सव के प्रधान संरक्षक डॉ. राहुल राज, वरिष्ठ रंगकर्मी डीएन सिंह, संस्कार भारती नाट्य केंद्र के संस्थापक निदेशक केशव प्रसाद सिंह, संरक्षक डॉ. महेश धाकड़, अध्यक्ष पंकज सक्सेना, कार्यकारी निदेशक अजय दुबे और सचिव नीता तिवारी ने किया। इस अवसर पर प्रधानाचार्य प्राची राज, सम्मान समारोह संयोजक उमाशंकर मिश्रा, नाट्य निर्देशक चंद्रशेखर, नृत्य निर्देशक डॉ. मनु शर्मा, संगीत निर्देशक डॉ. विभा शर्मा, कार्यकारिणी सदस्य भारती शर्मा, वाणी सक्सेना और अनीता परिहार सहित व्यवस्थापक विवेकानंद मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन दीपक जैन ने किया।

डॉ. राहुल राज ने कहा कि कला और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों को मिल्टन पब्लिक स्कूल पहुंचकर महोत्सव के विभिन्न कार्यक्रमों का आनंद लेना चाहिए, ताकि उन्हें भारत की इंद्रधनुषी संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिले। केशव प्रसाद सिंह ने कहा कि रंगोदय देशभर के कलाकारों को आपसी परिचय और एक-दूसरे की कला को समझने का अवसर प्रदान करता है। डॉ. महेश धाकड़ ने महोत्सव के माध्यम से सोशल कनेक्ट बढ़ाने की योजना पर प्रकाश डाला और रंगोदय पर एक पत्रिका प्रकाशित करने की जानकारी दी। कार्यकारी निदेशक अजय दुबे ने बताया कि महोत्सव में विभिन्न प्रांतों के कलाकार अलग-अलग विषयों पर आधारित नाटकों का मंचन कर रहे हैं। दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क रखा गया है।

‘अंतर्द्वंद’ में मातृत्व, सरोगेसी और अनाथ बच्चों के भविष्य पर विमर्श

महोत्सव में तामहणकर थिएटर अकैडमी, जयपुर की ओर से प्रस्तुत लगभग 60 मिनट के नाटक ‘अंतर्द्वंद’ ने मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों की जटिलताओं को सामने रखा। हेमचंद्र (राजू) तामहणकर लिखित और अर्शिया परवीन निर्देशित इस नाटक की कहानी नीरजा और अविनाश के जीवन के जरिए मानसिक संघर्ष, आत्मसम्मान, मातृत्व की आकांक्षा और परिवार में अपनत्व की जरूरत को उजागर करती है।

जीवन की विषम परिस्थितियों से जूझती नीरजा अपने आत्मसम्मान, सपनों और मातृत्व की इच्छा के बीच संघर्ष करती है। दूसरी ओर, बचपन अनाथालय में बिताने वाला अविनाश परिवार के स्नेह और अपनत्व की कमी को गहराई से महसूस करता है। उसके अनुभव इस विचार को मजबूत करते हैं कि किसी बच्चे का भविष्य केवल उसके जन्म से तय नहीं होता, बल्कि प्रेम, संस्कार, अवसर और पारिवारिक स्नेह भी उसके व्यक्तित्व के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

नाटक में अनाथालयों में पलने वाले बच्चों को दया के पात्र के रूप में नहीं, बल्कि प्रतिभा, आत्मबल और संभावनाओं से भरपूर व्यक्तियों के रूप में प्रस्तुत किया गया। यह संदेश दिया गया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद बच्चों को स्नेह, शिक्षा और समान अवसर मिलें तो वे समाज के सशक्त, संवेदनशील और सफल नागरिक बन सकते हैं।

कहानी में सुधा खन्ना और मिस्टर खन्ना के विचार नाटकीय घटनाक्रम को नई दिशा देते हैं। वे सरोगेसी को केवल चिकित्सकीय विकल्प नहीं, बल्कि संतान की इच्छा रखने वाले दंपतियों के जीवन में आशा जगाने वाली मानवीय संभावना के रूप में देखते हैं। नाटक समाज से अनाथालयों में पल रहे बच्चों के प्रति अपनी सोच बदलने का आग्रह भी करता है और उनके लिए प्रेम, सम्मान तथा परिवार के अधिकार को महत्वपूर्ण बताता है।

नाटक के विभिन्न पात्रों के विचार और अनुभव व्यक्तिगत संघर्ष से आगे बढ़कर सामाजिक, नैतिक और भावनात्मक प्रश्न खड़े करते हैं। इसकी केंद्रीय स्थापना है कि मातृत्व और पितृत्व केवल रक्त संबंधों से नहीं, बल्कि प्रेम, अपनत्व, उत्तरदायित्व और संस्कारों से भी परिभाषित होते हैं। संवेदना, करुणा और सकारात्मक सोच के जरिए समाज को अधिक मानवीय बनाया जा सकता है तथा प्रत्येक बच्चे को बेहतर भविष्य के लिए विश्वास, अवसर और अपनापन मिलना चाहिए।

नाटक में नीरजा की भूमिका शब्दिका शर्मा, अविनाश की भूमिका शुभम गोगलिया, सुधा खन्ना की भूमिका अर्शिया परवीन और फादर जॉन की भूमिका कृष शर्मा ने निभाई। पार्श्व मंचीय सहयोग मनीष कुमावत, विक्रम पंवार और राहुल नेहरा का रहा।

चार नाटकों ने दिखाई रंगमंच की विविधता

रंगोदय में विभिन्न नाट्य संस्थाओं की प्रस्तुतियों को दर्शकों की सराहना मिली। लहर नाट्य मंच, मेरठ ने सौरभ शुक्ला लिखित और अनुज शर्मा निर्देशित नाटक ‘बर्फ’ प्रस्तुत किया। नाट्य वस्तु सांस्कृतिक संस्था, कानपुर की ओर से पंकज सोनी लिखित और प्रवीण कुमार अरोड़ा निर्देशित नाटक ‘जहर’ का मंचन हुआ। एकलव्य रंगमंच, इटावा ने नवीन कुमार मीणा लिखित और डॉ. इसरार अली निर्देशित नाटक ‘असल लेखक वही है’ प्रस्तुत किया। वहीं, तामहणकर थिएटर अकैडमी, जयपुर ने हेमचंद्र (राजू) तामहणकर लिखित और अर्शिया परवीन निर्देशित ‘अंतर्द्वंद’ का मंचन किया। इन प्रस्तुतियों का दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया।

रंगकर्मियों और विशिष्ट हस्तियों का सम्मान

महोत्सव के दौरान रंगमंच के क्षेत्र में योगदान के लिए डॉ. इसरार अली (इटावा), प्रवीण अरोड़ा (कानपुर), अर्शिया परवीन (जयपुर) और अनुज शर्मा (मेरठ) को सम्मानित किया गया।

25 अक्टूबर तक नृत्य प्रतियोगिताएं, 26 को निकलेगी रंगयात्रा

महोत्सव के अंतर्गत 23 से 25 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक नृत्य प्रतियोगिताएं होंगी। नाट्य प्रतियोगिताएं प्रतिदिन शाम पांच बजे से आयोजित की जाएंगी। 24 अक्टूबर की रात कैंप फायर होगा, जिसमें कलाकार हास-परिहास के माहौल में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। सम्मान समारोह में सांस्कृतिक, साहित्यिक, शैक्षिक और सामाजिक क्षेत्रों की विशिष्ट हस्तियों को सम्मानित किया जाएगा।

महोत्सव के समापन से पहले 26 अक्टूबर को सुबह 10 बजे दिल्ली गेट से भव्य रंगयात्रा निकाली जाएगी। यह बाग फरजाना, सूरसदन और संजय प्लेस होते हुए शहीद स्मारक पहुंचेगी, जहां इसका समापन होगा। इसी दिन शाम छह बजे मिल्टन पब्लिक स्कूल के प्रेक्षागृह में समापन समारोह आयोजित किया जाएगा। इसमें विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता कलाकारों को पुरस्कृत किया जाएगा।

SP_Singh AURGURU Editor