कंगना रनौत को कोर्ट में तलब करने की मांग वाली रिवीजन खारिज, जिला जज बोले- निचली अदालत का आदेश अंतिम नहीं
आगरा। भाजपा सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत को किसानों के अपमान और राजद्रोह के मामले में अदालत में तलब कर बयान दर्ज कराने की मांग को लेकर दाखिल रिवीजन जिला जज की अदालत ने निरस्त कर दी। जिला जज ने स्पष्ट किया कि विशेष अदालत ने अभी मामले में संज्ञान पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है और वादी की अर्जी खारिज करने का आदेश अंतरवर्ती प्रकृति का है, अंतिम नहीं। ऐसे में इस स्तर पर रिवीजन पोषणीय नहीं है। उधर, विशेष अदालत ने मूल वाद में सुनवाई के लिए 17 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है।
अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने दायर किया था मुकदमा
राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने सितंबर 2024 में कंगना रनौत के विरुद्ध किसानों के अपमान और राजद्रोह के आरोपों को लेकर अदालत में परिवाद दायर किया था। वादी और गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद विशेष अदालत एमपी-एमएलए के न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह ने 29 नवंबर 2025 को थाना न्यू आगरा पुलिस को लिखित आदेश जारी कर दोनों पक्षों के बयानों की जांच करके आख्या प्रस्तुत करने को कहा था।
पुलिस की जांच आख्या पर उठाए सवाल
वादी के अनुसार, थाना न्यू आगरा पुलिस ने उनकी और गवाहों की बयान प्रक्रिया पूरी कर हस्ताक्षर कराए, लेकिन कंगना रनौत की ओर से उनकी अधिवक्ता अनुसूया चौधरी का बयान फोन पर लेकर दर्ज कर लिया और अधूरी आख्या अदालत में प्रस्तुत कर दी। इस पर वादी ने आपत्ति जताते हुए दोबारा जांच कराने की मांग की।
इसके बाद अदालत ने न्यू आगरा पुलिस को पुनः जांच कर दोनों पक्षों के बयान लेकर सही आख्या प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। वादी का आरोप है कि पुलिस ने दोबारा भी अधूरी आख्या दाखिल की। इस पर उन्होंने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
कंगना को तलब कर बयान दर्ज कराने की थी मांग
वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने छह जून 2026 को विशेष अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। इसमें कहा गया कि पुलिस की अधूरी आख्या के आधार पर मामले की सुनवाई नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कंगना रनौत की ओर से उनके अधिवक्ता द्वारा दिया गया बयान स्वयं कंगना का बयान कैसे माना जा सकता है।
प्रार्थना पत्र में दलील दी गई कि अधिवक्ता अपने पक्षकार की ओर से पैरवी कर सकता है, लेकिन पक्षकार की जगह उसका बयान नहीं दे सकता। वादी ने मांग की थी कि कंगना रनौत को अदालत में तलब कर उनका बयान दर्ज कराया जाए अथवा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बयान लेने की व्यवस्था की जाए, ताकि मामले के तथ्यों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
विशेष अदालत के आदेश के खिलाफ दाखिल की थी रिवीजन
विशेष अदालत एमपी-एमएलए के न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह ने चार अगस्त 2026 को वादी का प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ रमाशंकर शर्मा ने जिला जज की अदालत में रिवीजन दाखिल की। कई दिन तक सुनवाई के बाद जिला जज ने शुक्रवार को इसे निरस्त कर दिया।
जिला जज ने आदेश में कहा कि मूल मामले में अभी संज्ञान के बिंदु पर बहस होनी बाकी है। निचली अदालत ने मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है। कंगना रनौत को तलब कर बयान दर्ज कराने संबंधी प्रार्थना पत्र खारिज करने का आदेश भी अंतरवर्ती है, अंतिम नहीं। इसलिए इस स्तर पर दाखिल रिवीजन पोषणीय नहीं है। अदालत ने प्रकरण को प्रकीर्ण वाद के रूप में दर्ज करते हुए रिवीजन निरस्त कर दी।
17 नवंबर को होगी मूल मामले में बहस
इस बीच, विशेष अदालत एमपी-एमएलए के न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह ने मूल परिवाद में बहस के लिए 17 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है। शुक्रवार को अदालत में वादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान, राजवीर सिंह, प्रीति गुप्ता, रामदत्त दिवाकर, सुमंत चतुर्वेदी, बीएस फौजदार और पंकज कुमार बघेल सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पैरवी की। कंगना रनौत की ओर से अधिवक्ता सुधा प्रधान भी अदालत में मौजूद थीं।