साइबर ठगों से बचना है तो छोटी-सी चूक भी न करें, मोबाइल की लत बच्चों के लिए ड्रग जैसी : रक्षित टंडन
आगरा। साइबर ठगी से बचने के लिए मोबाइल पर आने वाली एपीके फाइल, गैस कनेक्शन और वाहन चालान के नाम पर भेजे जाने वाले संदिग्ध एसएमएस के लिंक पर क्लिक न करें। बैंकिंग या सरकारी वेबसाइट का इस्तेमाल करते समय स्पेलिंग की जांच जरूर करें, क्योंकि छोटी-सी गलती भी आपको गलत वेबसाइट पर पहुंचाकर आर्थिक नुकसान करा सकती है। साइबर अपराध होने पर तत्काल 1930 पर सूचना दें और संबंधित बैंक से संपर्क कर खाते को फ्रीज कराने की कार्रवाई करें। ये सुझाव साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ एवं उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय के सलाहकार रक्षित टंडन ने होटल पीएल पैलेस में आयोजित जागरूकता बैठक में दिए।
चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक का संचालन आईटी प्रकोष्ठ के चेयरमैन सचिन सारस्वत ने किया। मनोज कुमार बंसल ने कहा कि हैकर्स द्वारा आम लोगों, उद्यमियों और व्यापारियों के साथ धोखाधड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इससे व्यापारिक समुदाय में भी भय का माहौल है। साइबर अपराधों से बचाव और लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से इस बैठक का आयोजन किया गया।
मोबाइल की लत बच्चों के लिए बन रही खतरा
साइबर विशेषज्ञ रक्षित टंडन ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी में मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल ड्रग की लत की तरह काम कर रहा है। बच्चे मोबाइल पर रील देखने में काफी समय बिता रहे हैं, जिसका उनके व्यवहार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने बच्चों को कम उम्र में मोबाइल देने से बचने की सलाह देते हुए कहा कि 13 वर्ष की उम्र से पहले बच्चों को मोबाइल इस्तेमाल करने से रोकने का प्रयास करना चाहिए। अभिभावकों को भी बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए।
टंडन ने बताया कि वह 75 थानों के साथ साइबर सुरक्षा से जुड़े मामलों में काम कर रहे हैं और अब तक 90 लाख बच्चों को मार्गदर्शन देकर जागरूक कर चुके हैं। उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल सतर्कता से करने और अधिक पैसा कमाने के लालच में आने से बचने की सलाह दी।
वेबसाइट की स्पेलिंग में गलती पड़ सकती है भारी
रक्षित टंडन ने कहा कि सरकारी वेबसाइट, बैंकिंग सेवाओं या व्यापारिक भुगतान के दौरान वेबसाइट के पते की स्पेलिंग सावधानी से जांचनी चाहिए। एक छोटी-सी गलती भी उपयोगकर्ता को फर्जी वेबसाइट पर पहुंचा सकती है और भुगतान गलत खाते में जाने या साइबर ठगी का खतरा पैदा कर सकती है। उन्होंने बैंक की वेबसाइट का पता सत्यापित करने पर जोर दिया और कहा कि बैंकिंग सेवाओं के लिए संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें।
उन्होंने साइबर अपराध होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करने और संबंधित बैंक को सूचना देकर खाते को फ्रीज कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की सलाह दी, ताकि संभावित आर्थिक नुकसान को कम किया जा सके।
एपीके फाइल और संदिग्ध लिंक से रहें सावधान
टंडन ने कहा कि मोबाइल पर आने वाली एपीके फाइलों को बिना जांचे डाउनलोड या ओपन नहीं करना चाहिए। गैस कनेक्शन से संबंधित सूचना, वाहन चालान या अन्य सरकारी सेवाओं के नाम पर भेजे जाने वाले संदिग्ध एसएमएस में दिए गए लिंक पर भी क्लिक करने से बचना चाहिए। साइबर अपराधी ऐसे लिंक और फाइलों का इस्तेमाल मोबाइल में दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर पहुंचाने तथा बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल करने के लिए कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि यदि भूलवश किसी संदिग्ध एपीके या बिन फाइल पर क्लिक हो जाए तो तत्काल मोबाइल का सिम निकाल देने की सलाह दी जाती है। हालांकि, ऐसी स्थिति में संबंधित बैंक और साइबर अपराध हेल्पलाइन को सूचना देने के साथ फोन की सुरक्षा जांच कराना भी जरूरी है।
संचार साथी एप डाउनलोड करने की सलाह
साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए टंडन ने लोगों को संचार साथी एप डाउनलोड करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मोबाइल और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करते समय सुरक्षा संबंधी उपाय अपनाना जरूरी है। साथ ही जीमेल का पासवर्ड समय-समय पर बदलने, मजबूत पासवर्ड रखने और सोशल मीडिया खातों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की तस्वीरें मोबाइल में सामान्य इमेज फाइल के रूप में रखने से बचने की सलाह दी। इसके अलावा व्हाट्सएप को सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करने की जानकारी दी और साइबर खतरों से बचाव के लिए मोबाइल में कवच एम-2 डाउनलोड करने का सुझाव दिया।
व्यापारियों और उद्यमियों को सतर्क रहने की जरूरत
बैठक में साइबर अपराधों से बचाव के उपायों पर चर्चा करते हुए व्यापारियों और उद्यमियों को डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बैंकिंग और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई। वक्ताओं ने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों के तरीके भी बदल रहे हैं। ऐसे में जागरूकता, सावधानी और समय पर शिकायत दर्ज कराना आर्थिक नुकसान से बचने के लिए महत्वपूर्ण है।
बैठक के अंत में पूर्व अध्यक्ष केके पालीवाल ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल, आईटी प्रकोष्ठ के चेयरमैन सचिन सारस्वत, उपाध्यक्ष नीतेश अग्रवाल और अम्बा प्रसाद गर्ग, कोषाध्यक्ष विनय मित्तल, पूर्व अध्यक्ष केके पालीवाल, राजकुमार अग्रवाल, श्रीकिशन गोयल, शलभ शर्मा, सदस्य सुरेश चंद बंसल, राजेन्द्र गर्ग, रंजीत सामा, गोमित जैन, चन्द्रवीर सिंह, संचित सिंघल, अखिलेश दूबे, विजय मंगवानी, विजय कुमार गुप्ता, मुकेश शर्मा, मयंक मित्तल, रुचि अग्रवाल, मनस्वी, प्रकृति, सतीश अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, कृतिका और अर्जुन गुप्ता आदि उपस्थित रहे।