आगरा में यमुना की दुर्दशा पर कब जागेगी सरकार? रिवर कनेक्ट कैंपेन ने मांगा साबरमती मॉडल, प्रदूषण मुक्ति से बैराज निर्माण तक छह सूत्रीय कार्ययोजना

आगरा। ताजमहल के किनारे बहती यमुना को प्रदूषण, गंदे नालों और सरकारी उदासीनता से मुक्ति दिलाने के लिए रिवर कनेक्ट कैंपेन ने उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से साबरमती रिवरफ्रंट की तर्ज पर समग्र, व्यावहारिक और समयबद्ध कार्ययोजना बनाने की मांग की है। अभियान के संयोजक बृज खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि केवल घाटों, पार्कों और साइकिल ट्रैक से नदी की बदहाली दूर नहीं होगी। इसके लिए सीवेज का शोधन, नदी का प्राकृतिक जलप्रवाह बहाल करने, गाद निकासी, बैराज की व्यवहार्यता पर निर्णय और बाढ़ सुरक्षा सहित छह प्रमुख बिंदुओं पर ठोस कार्रवाई जरूरी है।

Oct 25, 2026 - 05:27
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आगरा में यमुना की दुर्दशा पर कब जागेगी सरकार? रिवर कनेक्ट कैंपेन ने मांगा साबरमती मॉडल, प्रदूषण मुक्ति से बैराज निर्माण तक छह सूत्रीय कार्ययोजना
आगरा में यह यमुना की दुर्दशा, जो नदी के बजाय एक नाला सी नजर आती है।

रिवर कनेक्ट कैंपेन की ओर से 24 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस वक्तव्य में कहा गया कि ताजमहल के साये में बहती यमुना आज भी गंदे नालों, सीवेज और सरकारी उदासीनता का बोझ ढो रही है। नदी के पुनर्जीवन के नाम पर योजनाओं, घोषणाओं और बैठकों का सिलसिला जारी है, लेकिन धरातल पर एकीकृत और समयबद्ध कार्रवाई की जरूरत बनी हुई है। अभियान ने सवाल उठाया कि आखिर उत्तर प्रदेश सरकार आगरा की यमुना को स्वच्छ, सुरक्षित और जीवंत बनाने के लिए ठोस कदम कब उठाएगी?

साबरमती की तर्ज पर हो यमुना का विकास

अभियान के अनुसार, अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे विकसित रिवरफ्रंट मॉडल से प्रेरणा लेकर आगरा में भी नदी तट के समन्वित विकास की योजना बनाई जानी चाहिए। दिल्ली में भी यमुना किनारे रिवरफ्रंट विकसित करने की योजनाओं पर चर्चा हो रही है, लेकिन आगरा में नदी की दुर्दशा दूर करने के लिए अब तक ठोस, एकीकृत और समयबद्ध कार्रवाई का अभाव दिखाई देता है।

कैंपेन ने कहा कि यमुना केवल पर्यटन का साधन नहीं, बल्कि ब्रज की जीवनरेखा और आगरा की प्राकृतिक धरोहर है। इसलिए नदी तट के विकास की योजना बनाते समय पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक जलप्रवाह और बाढ़ क्षेत्र की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। केवल घाटों, पार्कों, हरित क्षेत्रों और पैदल मार्गों का निर्माण नदी को पुनर्जीवित करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।

छह प्रमुख मांगों पर तत्काल कार्रवाई की जरूरत

रिवर कनेक्ट कैंपेन ने यमुना के पुनर्जीवन के लिए छह प्रमुख मांगें रखी हैं।

साबरमती मॉडल पर समग्र रिवरफ्रंट योजना: यमुना के दोनों किनारों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाए। इसके आधार पर सुरक्षित तटबंध, सुव्यवस्थित घाट, हरित क्षेत्र और पैदल मार्ग विकसित किए जाएं। निर्माण कार्यों में नदी के प्राकृतिक प्रवाह, पर्यावरणीय जरूरतों और बाढ़ क्षेत्र की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए।

नदी तल की सफाई और गाद निकासी: यमुना में जमा गाद, ठोस कचरे और अन्य अवरोधों का वैज्ञानिक आकलन कराया जाए। जरूरत के अनुसार नदी तल की सफाई और गाद निकासी की जाए, ताकि जलधारण क्षमता और प्रवाह में सुधार हो सके। यह काम पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप किया जाना चाहिए।

आगरा बैराज के निर्माण पर ठोस निर्णय: यमुना में जलस्तर नियंत्रित करने, पानी की उपलब्धता सुधारने और जरूरत के समय जल भंडारण की संभावनाओं के लिए आगरा बैराज की वर्षों से चल रही चर्चा को निर्णय तक पहुंचाया जाए। परियोजना की तकनीकी, पर्यावरणीय और वित्तीय जांच पूरी कर स्पष्ट समयसीमा घोषित की जाए। बैराज की योजना में नदी के लिए पर्याप्त और पर्यावरणीय दृष्टि से जरूरी जलप्रवाह बनाए रखने की व्यवस्था भी शामिल हो।

गंदे पानी की निकासी के लिए समानांतर नहर और डायवर्जन व्यवस्था: शहर के नालों, घरेलू सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट को बिना शोधन यमुना में गिरने से रोका जाए। इसके लिए पर्याप्त सीवेज शोधन क्षमता विकसित करने, नालों के इंटरसेप्शन और डायवर्जन तथा जरूरत के अनुसार अलग निकासी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। अभियान का कहना है कि केवल कागजों पर बनी योजनाओं या अधूरी सीवेज शोधन परियोजनाओं से यमुना को साफ नहीं किया जा सकता।

यमुना किनारा सड़क और नदी तट विकास की समीक्षा: यमुना किनारा सड़क तथा आसपास चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की जाए। इनके नदी के प्राकृतिक बहाव, जलभराव, बाढ़ क्षेत्र और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया जाए। नदी को संकरा करने या उसके प्राकृतिक क्षेत्र पर अनावश्यक दबाव डालने वाली गतिविधियों से बचने की जरूरत है।

समयबद्ध कार्ययोजना और सार्वजनिक जवाबदेही: प्रदेश सरकार एक उच्चस्तरीय समन्वय समिति गठित करे, जिसमें संबंधित विभागों, विशेषज्ञों और नागरिक संगठनों को प्रतिनिधित्व दिया जाए। प्रत्येक परियोजना की लागत, जिम्मेदार विभाग, काम पूरा करने की समयसीमा और प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। हर तीन महीने में समीक्षा कराई जाए, ताकि जनता को पता चल सके कि यमुना के पुनर्जीवन का काम कहां तक पहुंचा है।

विभागों के बीच समन्वय के अभाव से नहीं सुधरेगी यमुना

रिवर कनेक्ट कैंपेन के संयोजक बृज खंडेलवाल ने कहा कि आगरा में यमुना की समस्या किसी एक विभाग के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। जल संसाधन, नगर विकास, सिंचाई, प्रदूषण नियंत्रण और स्थानीय प्रशासन को मिलकर काम करना होगा। यदि सभी विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहेंगे, तो नदी की स्थिति में सुधार नहीं हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि साबरमती मॉडल का अर्थ केवल चमकते घाट और खूबसूरत नदी किनारे तैयार करना नहीं है। आगरा को ऐसा मॉडल चाहिए, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण, जलप्रवाह की बहाली, बाढ़ सुरक्षा, नदी तल की सफाई और सुव्यवस्थित तट विकास को एक साथ आगे बढ़ाया जाए। पहले नदी को बचाइए, फिर उसे सजाइए।

घोषणाओं से नहीं, जमीन पर काम से बचेगी यमुना

बृज खंडेलवाल ने जोर देकर कहा कि यमुना को पुनर्जीवित करने के लिए घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं। सरकार को स्पष्ट समयसीमा तय करने के साथ पर्याप्त बजट उपलब्ध कराना और संबंधित विभागों की जवाबदेही निर्धारित करनी होगी। आगरा की जनता को यह जानने का अधिकार है कि यमुना के उद्धार के लिए कौन-से काम किए जा रहे हैं, उन पर कितना पैसा खर्च हो रहा है और उनके परिणाम कब तक दिखाई देंगे।

रिवर कनेक्ट कैंपेन ने मांग की कि प्रदेश सरकार यमुना को प्रदूषित नाले जैसी स्थिति से मुक्त कराने के लिए तत्काल कदम उठाए। साबरमती मॉडल की उपयोगी विशेषताओं को अपनाते हुए आगरा की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप योजना तैयार की जाए और उस पर समयबद्ध तरीके से काम शुरू किया जाए।

अभियान का कहना है कि ताजमहल की खूबसूरती तभी पूरी होगी, जब उसके किनारे बहती यमुना भी स्वच्छ, प्रवाहमान और जीवंत होगी। अब जरूरत नदी किनारे की सजावट के दावों से आगे बढ़कर यमुना के वास्तविक पुनर्जीवन की है।

SP_Singh AURGURU Editor