क्या आगरा में भी सीटों के बंटवारे पर सपा-कांग्रेस में फंसेगा पेच? आगरा उत्तर के बजाय दक्षिण पर दांव लगाने की तैयारी में है कांग्रेस, खेरागढ़ मिलना लगभग तय
आगरा। यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीटों के बंटवारे की चर्चा के बीच कांग्रेस आगरा में अपनी पसंद की सीटों को लेकर रणनीति बनाने में जुटी है। पार्टी की नजर आगरा उत्तर के बजाय आगरा दक्षिण सीट पर हो सकती है, जबकि खेरागढ़ भी उसकी प्राथमिकता में है।
आगरा। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में गठबंधन के बीच आगरा में सीटों के चयन को लेकर अंदरूनी स्तर पर मंथन शुरू हो गया है। कांग्रेस खेरागढ़ के साथ आगरा उत्तर के बजाय आगरा दक्षिण विधानसभा सीट को अपनी प्राथमिकता बनाने की तैयारी में है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के स्थानीय सूत्रों का कहना है कि सपा खेरागढ़ के साथ आगरा उत्तर सीट ही कांग्रेस के लिए छोड़ने के मूड में है। हालांकि, अभी दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर कोई औपचारिक दावा या अंतिम बातचीत सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले समय में सीटों का चयन गठबंधन के भीतर चर्चा का अहम विषय बन सकता है।
आगरा दक्षिण पर कांग्रेस की नजर क्यों?
कांग्रेस में अंदरूनी स्तर पर आगरा दक्षिण सीट को लेकर संभावनाएं तलाशने की तैयारी है। पार्टी का मानना है कि इस विधानसभा क्षेत्र के सामाजिक समीकरण उसके लिए अवसर पैदा कर सकते हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के योगेंद्र उपाध्याय को 1,09,262 वोट मिले थे, जबकि समाजवादी पार्टी के विनय अग्रवाल 52,622 वोट पाकर दूसरे और बसपा के रवि भारद्वाज 38,219 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे। कांग्रेस के अनूज शर्मा को 4,867 वोट मिले थे।
इन नतीजों से पता चलता है कि पिछले चुनाव में सपा ने इस सीट पर बसपा को पीछे छोड़कर दूसरा स्थान हासिल किया था। कांग्रेस अब इसी क्षेत्र में अपनी संभावनाओं का आकलन कर रही है। पार्टी की रणनीति पर काम करने वाले लोगों के बीच यह विचार है कि गठबंधन की स्थिति में आगरा दक्षिण से चुनाव लड़ने का अवसर मिले तो वह अपने लिए नया राजनीतिक आधार तैयार कर सकती है।
आगरा उत्तर को लेकर सपा का अलग आकलन
समाजवादी पार्टी के स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, आगरा उत्तर सीट कांग्रेस के लिए छोड़े जाने का विकल्प पार्टी के विचार में है। इसके पीछे पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत को एक वजह माना जा रहा है। वर्ष 2022 में भाजपा के पुरुषोत्तम खंडेलवाल को 1,53,817 वोट मिले थे। बसपा के शब्बीर अब्बास को 41,447 और सपा के ज्ञानेंद्र गौतम को 34,403 वोट मिले थे। कांग्रेस के विनोद कुमार बंसल को 5,933 वोट प्राप्त हुए थे। पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने 1,12,370 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी।
इतने बड़े अंतर के कारण आगरा उत्तर विपक्ष के लिए कठिन चुनौती वाली सीट मानी जाती है। सपा के स्थानीय स्तर पर यह आकलन है कि गठबंधन में इस सीट को कांग्रेस के लिए छोड़ने पर विचार किया जा सकता है। लेकिन कांग्रेस की प्राथमिकता यदि आगरा दक्षिण बनती है तो दोनों दलों के बीच सीटों के चयन को लेकर अलग-अलग सोच सामने आ सकती है।
खेरागढ़ पर भी कांग्रेस की नजर
आगरा जिले की नौ विधानसभा सीटों में खेरागढ़ कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण सीट है। पार्टी इस सीट पर दावेदारी है और यह कांग्रेस के खाते में आना तय भी है। इसकी एक प्रमुख वजह 2022 के विधानसभा चुनाव के नतीजे हैं, जब कांग्रेस प्रत्याशी रामनाथ सिंह सिकरवार ने 60,077 वोट हासिल कर दूसरा स्थान प्राप्त किया था। भाजपा के भगवान सिंह कुशवाह ने 96,574 वोट पाकर जीत दर्ज की थी, जबकि बसपा के गंगाधर कुशवाह 28,988 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे। पिछले चुनाव में दूसरे स्थान पर रहने के आधार पर कांग्रेस को खेरागढ़ की सीट गठबंधन में मिलना तय है।
सीटों का तालमेल बनेगा अहम चुनौती
सपा और कांग्रेस के सामने भाजपा के खिलाफ विपक्षी मतों को एकजुट करने के साथ अपने-अपने संगठन की दावेदारी को संतुलित करने की चुनौती भी है। आगरा में कांग्रेस की संभावित प्राथमिकता और सपा के स्थानीय आकलन में अंतर रहा तो सीटों के चयन पर चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल यह तैयारी और संभावनाओं का दौर है, औपचारिक दावे या समझौते का नहीं।