युद्ध, अमेरिकी दबदबे और ऊर्जा संकट से घिरी दुनिया, वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र को मजबूत करना जरूरी

आगरा। युद्धों, महाशक्तियों के दबदबे और भविष्य में ऊर्जा व जल संकट की आशंकाओं के बीच वैश्विक शांति और सहयोग के लिए संयुक्त राष्ट्र को मजबूत बनाने की जरूरत है। वैश्विक समस्याओं का समाधान केवल ताकत के बल पर नहीं, बल्कि बहुपक्षीय सहयोग, संवाद और साझा संकल्प से ही संभव है। संयुक्त राष्ट्र दिवस पर मित्र सोसाइटी की ओर से नागरी प्रचारिणी सभा के पुस्तकालय सभागार में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने ये विचार व्यक्त किए। ‘वैश्विक चुनौतियां और समाधान’ विषय पर हुई चर्चा में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका, युद्धों के दुष्परिणाम, अमेरिकी दबदबे, चिकित्सा एवं शिक्षा की बढ़ती लागत और आध्यात्मिक शांति जैसे मुद्दे उठाए गए।

Oct 24, 2026 - 21:45
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युद्ध, अमेरिकी दबदबे और ऊर्जा संकट से घिरी दुनिया, वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र को मजबूत करना जरूरी
संयुक्त राष्ट्र दिवस पर मित्र सोसाइटी की ओर से नागरी प्रचारिणी सभा के पुस्तकालय सभागार में आयोजित संगोष्ठी में मौजूद वक्तागण।   

संयुक्त राष्ट्र दिवस पर मोमबत्तियां जलाकर अंधेरा मिटाने का संदेश देते मित्र सोसाइटी के सदस्य।

आगरा कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अरुणोदय बाजपेयी ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि संयुक्त राष्ट्र को प्रभावी बनाने के लिए छोटे देशों को मजबूत करना जरूरी है। भारत का ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश वैश्विक समस्याओं के समाधान का रास्ता दिखाता है। युद्धों के बीच भी समाधान निकल सकता है, बशर्ते दुनिया के देश इसके लिए संकल्पित हों। उन्होंने कहा कि बहुपक्षीयता संयुक्त राष्ट्र की मूल भावना है और आज ग्लोबल सिटिजनशिप का दौर है, जिसमें लोग वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।

प्रो. बाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संगठन ने विभिन्न देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण काम किया है। स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में भी उसका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने अमेरिका के प्रभाव और उसकी नीतियों पर टिप्पणी करते हुए वहां होने वाले चुनावों के संदर्भ में अमेरिकी दबदबे में बदलाव की संभावना भी जताई।

युद्ध में किसी की जीत नहीं, दुनिया को ऊर्जा और जल संकट का खतरा

मुख्य अतिथि ब्रिगेडियर विनोद दत्ता ने कहा कि युद्ध में किसी की वास्तविक जीत नहीं होती। एक युद्ध किसी देश को विकास के मामले में 20 साल पीछे धकेल सकता है। युद्ध की परिस्थितियों में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है, लेकिन कुछ देशों को छोड़कर दुनिया के अनेक देशों के लिए यह संगठन अपनी भूमिका पर पूरी तरह खरा नहीं उतर पाया है।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी दबाव का प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ रहा है और अमेरिका का दबदबा परेशानी का कारण बन रहा है। भविष्य के संभावित विश्व युद्ध के कारणों पर चर्चा करते हुए उन्होंने ईंधन, ऊर्जा और पानी को लेकर संघर्ष की आशंका जताई। उन्होंने ‘डॉलर टेररिज्म’ से दुनिया को मुक्ति दिलाने की जरूरत बताते हुए कहा कि लोग स्थानीय समस्याओं पर चर्चा करते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी व्यापक विमर्श होना चाहिए।

चिकित्सा और शिक्षा पर कर लगाने के बजाय खर्च कम करने पर जोर

विशिष्ट अतिथि डॉ. डीवी शर्मा ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों पर सरकारों को कर लगाने के बजाय लोगों की पहुंच आसान बनाने पर ध्यान देना चाहिए। दुनिया के अनेक देशों में इलाज महंगा है। इसे कम करने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

आध्यात्मिक शांति से ही मिल सकता है मन को सुकून

विशिष्ट अतिथि बीके रश्मि सिंह ने आध्यात्मिकता और आंतरिक शांति के महत्व पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि शांति की शक्ति आत्मा को ऊर्जा देती है और मनुष्य को कठिन परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम बनाती है। मन को मौन करके व्यक्ति आत्मा से जुड़ सकता है और अपने भीतर शांति का अनुभव कर सकता है।

उन्होंने कहा कि विज्ञान ने जीवन को सुविधाजनक बनाने के लिए अनेक साधन दिए हैं, लेकिन यह विचार करना भी जरूरी है कि ये साधन वास्तविक सुख और शांति कितना प्रदान करते हैं। संपन्नता के बावजूद जीवन में सुख-शांति का अभाव हो सकता है, जिसकी पूर्ति आध्यात्मिक मौन और आत्मिक संतुलन से संभव है। बीके रश्मि सिंह ने भक्ति से परिपूर्ण गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम का आध्यात्मिक वातावरण में समापन किया।

ग्लोब पर माल्यार्पण से हुआ संगोष्ठी का शुभारंभ

मित्र सोसाइटी की ओर से संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी का उद्घाटन अतिथियों ने ग्लोब पर माल्यार्पण करके किया। शुरुआत में संस्था अध्यक्ष डॉ. महेश धाकड़ ने संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 26 जून 1945 को दुनिया के 50 देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर किए थे। 24 अक्टूबर 1945 को चार्टर लागू होने के साथ संयुक्त राष्ट्र औपचारिक रूप से अस्तित्व में आया। इसी कारण हर वर्ष 24 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र दिवस मनाया जाता है।

कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का संयुक्त राष्ट्र दिवस पर दुनिया के नाम दिया गया संदेश माही वी. कुमार ने पढ़कर सुनाया।

मोमबत्तियां जलाकर दिया अंधकार मिटाने का संदेश

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने संयुक्त रूप से मोमबत्तियां जलाकर दीपावली की शुभकामनाएं दीं और अंधकार मिटाने का संदेश दिया। अतिथियों का स्वागत संस्था के संरक्षक अनिल शुक्ल, अध्यक्ष डॉ. महेश धाकड़, अवधेश उपाध्याय और वंदना तिवारी ने किया। अतिथियों को स्मृति चिह्न सत्य प्रकाश शुक्ल, अभय शुक्ला, नरेश पारस, समी आगाई, नरेश कुमार तन्हा, मनोज सिंह और टोनी फास्टर ने प्रदान किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. महेश धाकड़ ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अवधेश उपाध्याय ने दिया।

SP_Singh AURGURU Editor