दुनिया को मिलेगा भारत की न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी का फायदा, यूएनजीए में भारत का बड़ा ऐलान, कई देशों ने कहा - शुक्रिया
संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मिशन की संगीता सिंह देव ने परमाणु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की प्रगति का जिक्र किया और आईएईए के 'तकनीकी सहयोग कार्यक्रम' और प्रमुख पहलों के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया। मिशन ने यह भी बताया कि भारत ने 'साउथ-साउथ सहयोग' के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है।
न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र में भारत ने परमाणु विज्ञान और प्रौद्योगिकी के सुरक्षित, संरक्षित और शांतिपूर्ण इस्तेमाल को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इस दौरान भारत ने लगातार विकास को बढ़ावा देने और संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने में 'अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी' (आईएईए) की भूमिका पर जोर दिया है।
भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की नेता और सांसद संगीता कुमारी सिंह देव ने आईएईए के रोल को लेकर महासभा को संबोधित किया। उन्होंने सदस्य देशों की मानवीय और संस्थागत क्षमताओं को विकसित करने में आईएईए की भूमिका को रेखांकित किया जिसमें परमाणु विज्ञान के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए नियामक ढांचे तैयार करना भी शामिल है।
एक्स पर एक पोस्ट में संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मिशन ने बताया कि संगीता सिंह देव ने परमाणु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की प्रगति का जिक्र किया और आईएईए के 'तकनीकी सहयोग कार्यक्रम' और प्रमुख पहलों के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया। मिशन ने यह भी बताया कि भारत ने 'साउथ-साउथ सहयोग' के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परमाणु विज्ञान के लाभ उन देशों तक पहुंचें जिन्हें इनकी आवश्यकता है और साथ ही परमाणु सुरक्षा और संरक्षा के मजबूत ढांचे को भी बनाए रखा जाए।
इसके अलावा 22 अक्टूबर को आयोजित 'भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष' के नौवें वार्षिक कार्यक्रम में कई देशों ने भारत से मिली विकास सहायता को सराहा। लाओस, श्रीलंका, तंजानिया, माइक्रोनेशिया, मोल्दोवा, मोरक्को और सेंट लूसिया के प्रतिनिधियों ने भारत के सहयोग के लिए अपना आभार व्यक्त किया।
संयुक्त राष्ट्र में मोल्दोवा के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत जॉर्जे ल्यूका ने कहा कि इस साझेदारी ने उनके देश की उस क्षमता को मजबूत किया है जिसके जरिए वे सार्वजनिक नीतियों को बेहतर बनाने के लिए जनसंख्या डेटा का उपयोग कर सकते हैं। ल्यूका ने कहा 'ऐसे समय में जब आधिकारिक विकास सहायता (ODA) पर दबाव है भारत की निरंतर प्रतिबद्धता एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। एकजुटता, आपसी सम्मान और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर आधारित साझेदारी ठोस परिणाम देना जारी रख सकती है।'
संयुक्त राष्ट्र में श्रीलंका के दूत राजदूत जयनथा जयसूर्या ने कहा कि 'भारत-संयुक्त राष्ट्र कोष' विभिन्न विषयों से जुड़े क्षेत्रों पर काम करता है और इसमें शामिल देशों की जरूरतों के आधार पर परियोजनाओं को समर्थन देता है।
उन्होंने कहा 'भारत-संयुक्त राष्ट्र कोष कई तरह के विषयों को कवर करता है और ये परियोजनाएं उन जरूरतों को पूरा करती हैं जिनकी पहचान खुद देशों ने की है... इसके मूल में यह सोच है कि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान किया जाना चाहिए।' वहीं लाओस के संयुक्त राष्ट्र राजदूत, थोंगफेन सवनफेट ने विकासशील देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने में भारत की भूमिका की सराहना की। संयुक्त राष्ट्र में तंजानिया के प्रतिनिधि, राजदूत टोगोलानी एड्रिस मावुरा ने भी तंजानिया में सतत विकास के लिए भारत के निरंतर समर्थन की सराहना की।