12 साल की जुदाई खत्म, भाई से मिलते ही छलकी नेपाल की राजकुमारी की आंखें, बरेली में पुलिस और मनोसमर्पण संस्था के प्रयासों से हुआ भावुक पुनर्मिलन, नेपाल के कंचनपुर जिले में मिला परिवार का पता
-आरके सिंह- बरेली। करीब 12 साल से परिवार से बिछड़ी नेपाल निवासी राजकुमारी को आखिरकार अपने परिजनों का साथ मिल गया। बरेली में इज्जतनगर थाना पुलिस और मनोसमर्पण सेवा संस्थान के संयुक्त प्रयासों से उनकी पहचान और परिवार का पता लगाया गया। बहन को लेने बरेली पहुंचे भाई बलराम चौधरी जब उनसे मिले तो दोनों की आंखों से आंसू छलक पड़े। वर्षों की जुदाई के बाद भाई-बहन का यह मिलन वहां मौजूद लोगों के लिए भी भावुक क्षण बन गया। नेपाल के कंचनपुर जिले में राजकुमारी के परिवार का पता चलने के बाद उन्हें अपनों से मिलाने की प्रक्रिया पूरी की गई।
इज्जतनगर थाना प्रभारी सुरेश गौतम ने बताया कि राजकुमारी 21 अगस्त 2026 को थाना क्षेत्र में बैरियर चौकी-1 के अंतर्गत शहीद गेट के पास मिली थीं। पुलिस ने उन्हें रेस्क्यू करने के बाद आवश्यक कार्रवाई की और रजऊ परसपुर स्थित मनोसमर्पण सेवा संस्थान में दाखिल कराया। संस्थान में उन्हें सुरक्षित आश्रय, देखभाल और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता उपलब्ध कराई गई।
पहचान और परिवार की तलाश में जुटी संस्थान की टीम
मनोसमर्पण सेवा संस्थान के संस्थापक एवं मनोवैज्ञानिक शैलेश कुमार शर्मा ने राजकुमारी की देखभाल के साथ उन्हें उनके परिवार से मिलाने का संकल्प लिया। संस्थान में उनकी स्थिति का आकलन किया गया और जरूरत के अनुसार काउंसलिंग तथा मनोवैज्ञानिक सहयोग उपलब्ध कराया गया। इसके साथ ही उनकी पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारियां जुटाकर परिजनों की तलाश शुरू की गई।
शैलेश कुमार शर्मा के निर्देशन में संस्थान की टीम ने उपलब्ध जानकारियों के आधार पर लगातार प्रयास किए। इस कार्य में सुष्मिता शर्मा, पारुल जायसवाल और रंजीत मौर्य ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। काफी प्रयासों के बाद नेपाल के श्रीपुर, कंचनपुर जिले में राजकुमारी के परिवार का पता चल सका।
नेपाल पहुंचकर परिजनों से किया संपर्क
राजकुमारी के परिवार की जानकारी मिलने के बाद मनोसमर्पण सेवा संस्थान की टीम नेपाल के कंचनपुर पहुंची और उनके परिजनों से संपर्क स्थापित किया। इसके बाद राजकुमारी की पहचान तथा पारिवारिक संबंधों की पुष्टि की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। परिवार को बताया गया कि राजकुमारी बरेली में हैं। सूचना मिलने पर उनके भाई बलराम चौधरी उन्हें लेने बरेली पहुंचे।
करीब 12 वर्षों बाद बहन को सामने देखकर बलराम चौधरी भावुक हो उठे। भाई-बहन के गले मिलते ही लंबे समय की जुदाई का दर्द आंसुओं के रूप में छलक पड़ा। राजकुमारी के लिए भी यह पल बेहद भावुक रहा। परिवार से दोबारा जुड़ने के बाद उनके जीवन में अपनों के साथ रहने और नए सिरे से पारिवारिक जीवन शुरू करने की उम्मीद जगी है।
राजकुमारी के दो बच्चे राम और लक्ष्मण भी हैं। परिवार से उनका दोबारा जुड़ना उनके लिए भावनात्मक सहारा और पारिवारिक जीवन की नई शुरुआत की उम्मीद लेकर आया है।
मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास पर भी दिया ध्यान
मनोसमर्पण सेवा संस्थान के संस्थापक एवं मनोवैज्ञानिक शैलेश कुमार शर्मा ने राजकुमारी की काउंसलिंग कर उनकी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के अनुरूप सहयोग उपलब्ध कराया। संस्थान का प्रयास रहा कि उन्हें सुरक्षित वातावरण देने के साथ उनकी पहचान बहाल करने और परिवार से दोबारा जोड़ने की दिशा में लगातार काम किया जाए।
शैलेश कुमार शर्मा के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य केवल समस्याओं को समझना या उपचार उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति को सुरक्षित माहौल, सामाजिक जुड़ाव और भावनात्मक सहारा देना भी है। लंबे समय से परिवार से बिछड़े लोगों के लिए परिजनों से पुनर्मिलन उनके पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
पुलिस और सामाजिक संस्था के समन्वय की मिसाल
राजकुमारी का परिवार से पुनर्मिलन पुलिस और सामाजिक संस्था के समन्वित प्रयासों का उदाहरण है। 21 अगस्त को शहीद गेट के पास मिलने के बाद पुलिस ने उन्हें सुरक्षित आश्रय तक पहुंचाया। इसके बाद मनोसमर्पण सेवा संस्थान ने उनकी देखभाल, मनोवैज्ञानिक सहयोग और पहचान के आधार पर परिवार की तलाश जारी रखी। नेपाल के कंचनपुर जिले में परिजनों का पता चलने के बाद यह प्रयास भावुक पुनर्मिलन के साथ सफल हुआ।
करीब 12 वर्षों बाद राजकुमारी का अपने परिवार से मिलना मानवीय संवेदना, पुलिस की तत्परता और सामाजिक संस्था के निरंतर प्रयासों की प्रेरक मिसाल बन गया है।