हेमा मालिनी की ‘मां गंगा’ नृत्य नाटिका से ब्रजरज उत्सव का आगाज, गंगा अवतरण से चार युगों की यात्रा और प्रदूषण से कराहती नदियों की पीड़ा का भावपूर्ण मंचन
वृंदावन। पद्मश्री हेमा मालिनी की नृत्य नाटिका ‘मां गंगा’ के मंचन के साथ शुक्रवार को वृंदावन के नवनिर्मित स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह में ब्रजरज उत्सव की सांस्कृतिक गतिविधियों का शुभारंभ हुआ। करीब पौने दो घंटे की प्रस्तुति में गंगा के पृथ्वी पर अवतरण, चार युगों की यात्रा और गंगा-यमुना समेत नदियों की मौजूदा दुर्दशा को नृत्य, संगीत और अभिनय के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। पौराणिक प्रसंगों के साथ नदियों को प्रदूषण से बचाने और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण का संदेश भी दिया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण, संत विजय कौशल महाराज, सांसद तेजवीर सिंह, उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र और सीईओ लक्ष्मी नागप्पन सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। गणेश वंदना के बाद हेमा मालिनी ने तीन दर्जन से अधिक कलाकारों के साथ मां गंगा की भूमिका में नृत्य नाटिका प्रस्तुत की।

ब्रजरज उत्सव का शुभारंभ करते कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण, संत विजय कौशल महाराज, सांसद तेजवीर सिंह, ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र और सीईओ लक्ष्मी नागप्पन।
भागीरथ की तपस्या से शिव की जटाओं तक गंगा की महिमा
प्रस्तुति में राजा भगीरथ की तपस्या, पूर्वजों के उद्धार के लिए गंगा को पृथ्वी पर लाने का उनका संकल्प और भगवान शिव द्वारा गंगा की वेगवती धारा को अपनी जटाओं में धारण करने के प्रसंगों का सजीव मंचन किया गया। शास्त्रीय नृत्य की भाव-भंगिमाओं, संगीत, नाटकीय दृश्यों और तकनीक के माध्यम से गंगा की महिमा तथा मानव जीवन में उनके महत्व को दर्शाया गया।
नृत्य नाटिका में गंगा की यात्रा को चार युगों के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया गया। पौराणिक आख्यानों के साथ भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक चेतना से जुड़े प्रसंगों ने प्रस्तुति को व्यापक स्वरूप दिया। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, कालिंदी के कुंजों में उनकी लीलाओं, महाभारत के युद्ध और गीता के संदेश का भी जीवंत चित्रण किया गया।
गंगा-यमुना की दुर्दशा ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
नृत्य नाटिका का महत्वपूर्ण पक्ष गंगा, यमुना और दूसरी नदियों की वर्तमान स्थिति तथा प्रदूषण की समस्या रहा। प्रस्तुति में दिखाया गया कि भारतीय संस्कृति में जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी मानी जाने वाली नदियां मानवीय लापरवाही और प्रदूषण से प्रभावित हो रही हैं। भावपूर्ण दृश्यों के जरिए नदियों की पीड़ा को सामने रखते हुए यमुना सहित सभी नदियों को स्वच्छ रखने और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण की जरूरत बताई गई। धार्मिक आस्था, शास्त्रीय नृत्य और पर्यावरणीय संवेदनशीलता के संगम ने दर्शकों को नदियों के आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व से जोड़ा।
इस अवसर पर संत बलराम दास महाराज, संत गोविंदानंद तीर्थ, डॉ. आदित्यानंद महाराज, श्रीवत्स गोस्वामी, महंत सुंदर दास महाराज, विधायक पूरन प्रकाश, आगरा रेल मंडल के डीआरएम गगन गोयल और भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र चौधरी सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

ब्रजरज उत्सव में मौजूद दर्शक।
उत्तर भारत के प्रमुख उत्सवों में बना रहा पहचान
गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने कहा कि ब्रजरज उत्सव उत्तर भारत के प्रमुख उत्सवों में अपनी पहचान बना चुका है। इसमें प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक की सहभागिता रही है। उन्होंने कहा कि इस बार उत्सव की पहली प्रस्तुति के रूप में सांसद हेमा मालिनी की नृत्य नाटिका ने आयोजन को विशिष्ट आयाम दिया।
सांसद तेजवीर सिंह ने ब्रजरज उत्सव को ब्रज की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह के निर्माण की विभिन्न प्रक्रियाओं में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सांसद हेमा मालिनी के योगदान का उल्लेख किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संत विजय कौशल महाराज ने मां गंगा की महिमा का वर्णन किया।
24 अक्टूबर से मथुरा में शुरू होंगी अन्य गतिविधियां
ब्रजरज उत्सव के तहत इस बार मथुरा के साथ वृंदावन के नवनिर्मित स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मथुरा के धौलीप्याऊ स्थित रेलवे ग्राउंड पर 24 अक्टूबर से उत्सव की अन्य गतिविधियां शुरू होंगी। शनिवार को यहां वंदनाश्री और ईशान मिश्रा की प्रस्तुतियां होंगी।