‘बड़ा आदमी बनकर लौटूंगा’ माता-पिता के लिए खत छोड़ घर से निकले तीन बच्चे, 24 घंटे में बरामद
आगरा के लोहामंडी क्षेत्र से अचानक लापता हुए तीन बच्चों को पुलिस ने 24 घंटे के भीतर सकुशल बरामद कर लिया। घर से निकलने से पहले बच्चों ने एक पत्र छोड़ा था, जिसमें माता-पिता से माफी मांगते हुए बड़ा आदमी बनने के बाद लौटने की बात कही गई थी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, सर्विलांस, स्थानीय लोगों से पूछताछ और सोशल मीडिया प्रोफाइल की मदद से बच्चों की तलाश की। पुलिस के अनुसार, तीनों बच्चे पहले जयपुर गए और अगले दिन घर की याद आने पर आगरा लौट आए। फिलहाल दो बच्चे नाबालिग हैं और सभी को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जाएगा।
आगरा। बड़े सपने देखने और जिंदगी में कुछ बड़ा करने की चाह में तीन बच्चे अचानक घर से निकल गए। जाते-जाते उन्होंने परिवार के लिए एक ऐसा पत्र छोड़ा, जिसने माता-पिता की चिंता कई गुना बढ़ा दी। पत्र में बच्चों ने माफी मांगते हुए लिखा कि वे कुछ समय के लिए घर छोड़कर जा रहे हैं और बड़ा आदमी बनने के बाद वापस लौटेंगे। बच्चों के अचानक गायब होने की सूचना मिलते ही परिवारों में हड़कंप मच गया। मामला पुलिस तक पहुंचा तो थाना लोहामंडी पुलिस ने तत्काल तलाश शुरू कर दी और करीब 24 घंटे की लगातार कोशिश के बाद तीनों बच्चों को सकुशल बरामद कर लिया।
घर से निकले, पीछे छोड़ गए भावुक खत
मामला थाना लोहामंडी क्षेत्र का है। पुलिस के मुताबिक, 17 अक्टूबर को तीन बच्चों के घर से चले जाने की सूचना मिली थी। परिजनों ने पुलिस को तहरीर दी, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर तलाश शुरू की गई। बच्चों के अचानक गायब होने और उनकी उम्र को देखते हुए पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और कई टीमों को अलग-अलग दिशा में लगाया। इस बीच घर से मिले पत्र ने परिजनों की चिंता और बढ़ा दी। पत्र में बच्चे ने माता-पिता को संबोधित करते हुए लिखा कि वह कुछ समय के लिए घर छोड़कर जा रहा है और जब कुछ बड़ा हासिल कर लेगा तो वापस लौटेगा। उसने पढ़ाई में मन नहीं लगने की बात भी कही। पत्र के अंत में माता-पिता के प्रति प्यार जताते हुए लिखा गया था— “I Love You Papa Ji और Mummy Ji।” परिवार के मुताबिक, बच्चे इंस्टाग्राम पर रील और वीडियो देखते थे। वे एक-दूसरे को ऐसे वीडियो भी शेयर करते थे, जिनमें घर से बाहर जाकर कुछ बड़ा करने और कुछ साल बाद सफल होकर लौटने जैसी बातें दिखाई जाती थीं।
जयपुर जाने के बाद लौटी घर की याद
बच्चों के पिता के अनुसार, तीनों 17 अक्टूबर को ईदगाह बस स्टैंड से जयपुर के लिए रवाना हुए थे। वे घर से निकलकर बाहर की दुनिया देखने और कुछ बड़ा करने की सोच के साथ आगे बढ़े। हालांकि, अगले दिन उन्हें घर की याद आई और वे वापस आगरा लौट आए। आगरा पहुंचने के बाद तीनों राजामंडी रेलवे स्टेशन के आसपास पहुंचे। इसी दौरान पुलिस की तलाश भी तेज थी। लगातार निगरानी और सुराग जुटाने के बाद पुलिस टीमों को बच्चों के राजामंडी क्षेत्र में होने की जानकारी मिली। पुलिस ने चामुंडा देवी मंदिर के पास पहुंचकर तीनों बच्चों को सकुशल बरामद कर लिया।
सीसीटीवी से सोशल मीडिया तक, पुलिस ने खंगाले कई सुराग
बच्चों की तलाश के लिए पुलिस ने कई स्तर पर काम किया। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। संभावित रास्तों और सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों की गतिविधियों की जानकारी जुटाई गई। स्थानीय लोगों को बच्चों के फोटो दिखाकर उनके बारे में पूछताछ की गई। इसके साथ ही सर्विलांस टीम को भी सक्रिय किया गया। पुलिस ने बच्चों की सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच कर उनके संपर्कों और गतिविधियों से जुड़े संभावित सुराग तलाशे। इन सभी प्रयासों को जोड़ते हुए पुलिस टीम बच्चों तक पहुंचने में सफल रही। पुलिस का कहना है कि बच्चों के सोशल मीडिया से प्रभावित होकर घर छोड़ने की बात की निर्णायक पुष्टि करना फिलहाल संभव नहीं है। हालांकि, उनके द्वारा छोड़े गए पत्र में बड़ा आदमी बनने और बाद में घर लौटने की बात स्पष्ट रूप से लिखी गई थी।
दो बच्चे नाबालिग, सीडब्ल्यूसी के सामने होगी पेशी
पुलिस अधिकारी के अनुसार, तीनों बच्चों में से दो नाबालिग हैं। बरामदगी के बाद बच्चों को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सामने पेश किया जाएगा। समिति के निर्देश और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी ने बताया कि मौजूदा समय में परिवहन के साधनों के कारण बच्चे कम समय में लंबी दूरी तय कर सकते हैं। ऐसे में उनके घर छोड़ने के बाद शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। पुलिस ने इसी को ध्यान में रखते हुए तलाश अभियान तेज किया और अलग-अलग टीमों को लगाया।
बच्चे मिले तो परिवार ने ली राहत की सांस
करीब 24 घंटे की तलाश के बाद तीनों बच्चों के सकुशल मिलने से परिवारों ने राहत की सांस ली। परिजनों ने आगरा पुलिस और थाना लोहामंडी की टीम का आभार जताया। बच्चों के पिता ने पुलिस कमिश्नर समेत पूरी पुलिस टीम को धन्यवाद दिया और पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की। यह मामला सिर्फ बच्चों के घर से चले जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बदलते डिजिटल माहौल में बच्चों के साथ संवाद की जरूरत को भी सामने लाता है। बच्चों की इच्छाओं, परेशानियों, पढ़ाई से जुड़ी दिक्कतों और उनके सपनों को समझना जरूरी है। साथ ही सोशल मीडिया पर वे किस तरह की सामग्री देख रहे हैं और उसका उनके व्यवहार पर क्या असर पड़ रहा है, इस पर भी अभिभावकों को संवेदनशीलता के साथ नजर रखने की जरूरत है।