संयुक्त राष्ट्र महासभा में सांसद नवीन जैन ने रखा भारत का पक्ष, वैश्विक व्यापार व्यवस्था में हो सभी देशों की नीतिगत स्वतंत्रता और न्यायसंगत भागीदारी

आगरा/न्यूयॉर्क। राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की छठी समिति में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए वैश्विक व्यापार, अंतरराष्ट्रीय कानूनी सुधारों, डिजिटल तकनीक और निवेश विवादों के समाधान से जुड़े मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने समावेशी और विकासोन्मुखी अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में सभी देशों के हितों, नीतिगत स्वतंत्रता और न्यायसंगत भागीदारी का ध्यान रखा जाना चाहिए।

Oct 20, 2026 - 20:43
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संयुक्त राष्ट्र महासभा में सांसद नवीन जैन ने रखा भारत का पक्ष, वैश्विक व्यापार व्यवस्था में हो सभी देशों की नीतिगत स्वतंत्रता और न्यायसंगत भागीदारी
न्यूयॊर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में वैश्विक व्यापार व्यवस्था में भारत का पक्ष रखते राज्यसभा सदस्य नवीन जैन।

संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में एजेंडा मद 76 के तहत संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार विधि आयोग (यूएनसीआईटीआरएएल) से संबंधित विषयों पर चर्चा के दौरान नवीन जैन ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुगम बनाने और वाणिज्यिक विवादों के प्रभावी समाधान के लिए कानूनी प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था को पारदर्शी, प्रभावी और विभिन्न देशों की विकास संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने पर बल दिया।

अपने वक्तव्य में नवीन जैन ने संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार विधि आयोग के संस्थापक सदस्य के रूप में भारत के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने मध्यस्थता, वाणिज्यिक विवादों के निपटारे और दिवाला कानूनों से संबंधित भारत के घरेलू सुधारों को रेखांकित करते हुए कहा कि मजबूत कानूनी व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने और विवादों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

निवेश विवादों के समाधान में पारदर्शिता पर जोर

नवीन जैन ने अंतरराष्ट्रीय निवेश विवाद सुधार के लिए सलाहकार केंद्र की स्थापना की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि केंद्र की सेवाएं संबंधित देशों के लिए सुलभ होनी चाहिए तथा सदस्यता और वित्तीय दायित्वों को लेकर स्पष्टता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय विवाद निपटान के लिए ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता बताई, जिसमें पारदर्शिता, प्रभावशीलता और सभी पक्षों के हितों का ध्यान रखा जाए।

निवेशक और राज्य के बीच विवाद निपटान व्यवस्था में सुधार के मुद्दे पर उन्होंने राज्यों की सहमति, उनके नियमन के अधिकार और प्रक्रियात्मक निष्पक्षता के सम्मान पर जोर दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों का न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी बताई, ताकि अलग-अलग देशों की परिस्थितियों और हितों को उचित स्थान मिल सके।

डिजिटल तकनीक से व्यापार को सुगम बनाने की पैरवी

अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता व्यवस्था के आधुनिकीकरण का समर्थन करते हुए नवीन जैन ने इलेक्ट्रॉनिक मध्यस्थता की प्रभावी मान्यता और प्रवर्तन को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के अनुरूप व्यापारिक प्रक्रियाओं और विवाद निपटान प्रणालियों को विकसित करना जरूरी है।

उन्होंने भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना तंत्र और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 का उल्लेख करते हुए इन्हें व्यापार को सुगम बनाने तथा न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने में प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने दिवाला कानून, सार्वजनिक खरीद और डिजिटल परिसंपत्तियों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार विधि आयोग के कार्यों के महत्व को भी रेखांकित किया।

नवीन जैन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था के विकास के साथ देशों की राष्ट्रीय नीतिगत स्वतंत्रता सुरक्षित रहनी चाहिए। वैश्विक निर्णय प्रक्रियाओं में सभी देशों की न्यायसंगत भागीदारी को बढ़ावा देना भी आवश्यक है। उन्होंने समावेशी, विकासोन्मुखी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कानूनी ढांचे के निर्माण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित कर किया नमन

संयुक्त राष्ट्र महासभा से संबंधित महत्वपूर्ण बैठक से पूर्व न्यूयॉर्क में सांसद नवीन जैन ने भारतीय संसदीय दल के प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों के साथ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। इस अवसर पर 100 से अधिक देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों की सहभागिता के बीच गांधीजी के सत्य, अहिंसा और शांति के सिद्धांतों को याद किया गया।

महात्मा गांधी के विचारों को मानवता की अमूल्य धरोहर बताते हुए वैश्विक शांति, सह-अस्तित्व और आपसी सद्भाव के लिए उनकी प्रासंगिकता पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि सत्य और अहिंसा पर आधारित गांधीजी का दर्शन विभिन्न देशों और समाजों के बीच संवाद, सहयोग तथा शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को मजबूत करने का संदेश देता है। मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच उनके विचार अंतरराष्ट्रीय समुदाय को शांति और सहयोग की दिशा में प्रेरित करते हैं।

भारत की ओर से प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों में सांसद अरुण गोविल, राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति, सांसद मनीष तिवारी, सांसद हेमंत विष्णु, सांसद डॉ. कल्पना सैनी और सांसद रंजीत रंजन सहित अन्य सांसद एवं प्रतिनिधिमंडलों के सदस्य शामिल रहे।

SP_Singh AURGURU Editor