तिब्बत में भूकंप के तेज झटके, रिक्टर स्केल पर 7.0 मापी गई तीव्रता, चीन हाई अलर्ट पर
चीन के कब्जे वाले तिब्बत में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 7.0 मापी गई है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने बताया है कि तिब्बत में भूकंप भारतीय समयानुसार 8.03 मिनट पर आया। इसका केंद्र जमीन की सतह से 173 किमी नीचे बताया गया है।
ल्हासा। तिब्बत में गुरुवार शाम को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.0 मापी गई है, जो कि खतरनाक माना जाता है। अभी तक जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है, लेकिन कई इलाकों में पहाड़ों के दरकने और लैंडस्लाइड की खबरें हैं। चीनी अधिकारी तिब्बत में भूकंप के बाद के हालात का जायजा ले रहे हैं।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने बताया है कि तिब्बत में भारतीय समयानुसार रात लगभग 8:03 बजे 7.0 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र 173 किमी की गहराई पर था।
तिब्बत भूकंप को लेकर काफी संवेदनशील माना जाता है। तिब्बत में भूकंप का प्रमुख कारण भारतीय और यूरेशियन प्लेटों का टकराव है। तिब्बत के पठार का निर्माण ही लगभग 5 से 6 करोड़ वर्ष पहले, भारतीय टेक्टोनिक प्लेट के उत्तर की ओर बढ़ते हुए यूरेशियन प्लेट से टकराने से हुआ था। भारतीय प्लेट आज भी प्रति वर्ष लगभग 4 से 5 सेंटीमीटर की गति से उत्तर की ओर यूरेशियन प्लेट के नीचे खिसक रही है। इस दबाव से भूगर्भ में भारी ऊर्जा और तनाव जमा होता है, जो अचानक टूटने पर भूकंप के रूप में बाहर निकलता है।
तिब्बत और उससे सटे हिमालयी क्षेत्र में इतिहास में कई विनाशकारी भूकंप दर्ज किए गए हैं। 15 अगस्त 1950 को असम और तिब्बत में 8.6 तीव्रता का भूकंप आया था। इस भूकंप के कारण भारी भूस्खलन हुआ था, जिससे कई नदियों का प्रवाह थम गया था। तिब्बत और असम में लगभग 4,800 से अधिक लोगों की जान गई थी। 2008 में तिब्बत के डामक्सुंग में 6.6 तीव्रता का भूकंप आया था। 2010 में तिब्बत के पूर्वी हिस्से (युशु क्षेत्र) में आए भूकंप में 2,600 से अधिक लोगों की जान गई थी और सैकड़ों घर तबाह हुए थे। 2015 में नेपाल और तिब्बत में भूकंप आया था। इसमें तिब्बत में 100 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। 2025 में दक्षिणी तिब्बत के टिंगरी काउंटी में बड़ा भूकंप आया था, जिसमें 120 से अधिक लोगों की जान गई थी।