सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट केसी जैन ने रखे सुझाव- ठेका देने से पहले अभियंता बताए, पानी कहां जाएगा, जलनिकासी प्रमाणपत्र के बिना सड़क का न तो ठेका मिले और जांच के बिना अंतिम भुगतान न हो

आगरा/नई दिल्ली। सड़क निर्माण में जलभराव, गड्ढों और समय से पहले सड़कें टूटने की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए आगरा के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता केसी जैन ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष जवाबदेही तय करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे हैं। उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि सड़क निर्माण या मरम्मत का ठेका देने से पहले सक्षम अभियंता से जलनिकासी का प्रमाणपत्र लिया जाए, सड़क की घोषित उपयोगी उम्र और ठेकेदार की गारंटी सार्वजनिक की जाए तथा हर सड़क पर खर्च से लेकर मरम्मत तक का पूरा हिसाब ऑनलाइन उपलब्ध हो। उनके सुझावों में जलनिकासी की व्यवस्था सुनिश्चित होने तक अंतिम भुगतान रोकने, शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई और लापरवाही साबित होने पर जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था भी शामिल है।

Oct 18, 2026 - 21:43
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सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट केसी जैन ने रखे सुझाव- ठेका देने से पहले अभियंता बताए, पानी कहां जाएगा, जलनिकासी प्रमाणपत्र के बिना सड़क का न तो ठेका मिले और जांच के बिना अंतिम भुगतान न हो

केसी जैन का कहना है कि जनता के पैसे से बनने वाली सड़कों पर सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। सड़क निर्माण के समय पानी की निकासी की अनदेखी, नालियों की नियमित सफाई में लापरवाही और खराब निर्माण के लिए जिम्मेदारी तय नहीं होने से नागरिकों को बार-बार परेशानी झेलनी पड़ती है। इन समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने सड़क निर्माण, रखरखाव, निगरानी और शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने का प्रस्ताव दिया है।

ठेका देने से पहले जलनिकासी का प्रमाणपत्र अनिवार्य हो

जैन का प्रमुख सुझाव है कि नई सड़क बनाने, चौड़ी करने, मजबूत करने, दोबारा डामर बिछाने या नियमित मरम्मत के लिए निविदा जारी करने, कार्यादेश देने अथवा काम शुरू करने से पहले सक्षम अभियंता का जलनिकासी प्रमाणपत्र लिया जाए। मौके का निरीक्षण करने के बाद प्रमाणपत्र में स्पष्ट किया जाए कि पानी निकालने की पर्याप्त व्यवस्था पहले से मौजूद है या इसके लिए स्वीकृत योजना, बजट और समयसीमा सड़क निर्माण के कार्य में ही शामिल है। बाद में नाली बनवा देने का सामान्य आश्वासन पर्याप्त नहीं माना जाए।

प्रमाणपत्र में सड़क की ढाल, निचले हिस्सों, नालियों, पुलियों और पानी के अंतिम निकास का पूरा विवरण हो। जहां नाली जरूरी है, वहां बिना निकास वाली नाली को जलनिकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं माना जाए। यदि सड़क और नाली बनाने की जिम्मेदारी अलग-अलग विभागों की है तो काम शुरू होने से पहले दोनों की जिम्मेदारी तय की जाए। जलनिकासी की व्यवस्था को निर्माण की शर्तों और लागत में शामिल किया जाए।

जैन ने यह भी सुझाव दिया है कि जरूरी जलनिकासी चालू होने से पहले सड़क पर डामर की अंतिम परत नहीं बिछाई जाए। सड़क को ऊंचा या चौड़ा करते समय पानी निकलने के पुराने रास्ते बंद न हों। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जलनिकासी प्रमाणपत्र की यह व्यवस्था उनका नया सुझाव है, जिसे मौजूदा सड़क निर्माण मानकों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तावित किया गया है। इसे पहले से लागू हर सड़क पर अनिवार्य एक समान भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) की शर्त के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है।

नाली बनाकर छोड़ने से नहीं चलेगा काम, सफाई की जिम्मेदारी भी तय हो

जैन के अनुसार, केवल नालियां बना देना पर्याप्त नहीं है। नालियों, पानी के प्रवेश स्थानों, पुलियों और निकास से गाद, कचरा तथा घास नियमित रूप से हटाने की व्यवस्था होनी चाहिए। बारिश से पहले, बारिश के बाद और भारी वर्षा के दौरान इनकी जांच की जाए। सफाई की तारीख, तस्वीर, जिम्मेदार अधिकारी और खर्च का रिकॉर्ड रखा जाए। नालियों से निकाला गया मलबा ऐसी जगह न छोड़ा जाए, जहां से वह अगली बारिश में फिर नालियों में पहुंच जाए।

बार-बार जलभराव होने पर उसके वास्तविक कारण का पता लगाकर निर्धारित समयसीमा में स्थायी समाधान किया जाए। सड़क की नियमित जांच और मरम्मत पूरी करने की समयसीमा भी तय हो। निर्माण या मरम्मत स्थल पर ठेकेदार, निगरानी करने वाले अभियंता, संपर्क नंबर और काम पूरा करने की समयसीमा वाला सूचना बोर्ड लगाया जाए। प्रत्येक तीन महीने में सड़क की खराबियों, नागरिकों की शिकायतों और मरम्मत की प्रगति की समीक्षा की जाए।

सड़क कितने साल चलेगी और गारंटी कितनी होगी, जनता को बताएं

जैन ने सड़क निर्माण और मरम्मत के ठेकों में सड़क की अपेक्षित उपयोगी उम्र स्पष्ट रूप से दर्ज करने का सुझाव दिया है। जनता को बताया जाए कि सड़क कितने वर्षों तक उपयोग योग्य रहने के लिए बनाई गई है और कितनी अवधि तक उसमें गड्ढे भरने, दोबारा सतह बिछाने या पुनर्निर्माण की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए।

इसके साथ ठेकेदार की गारंटी अवधि अलग से स्पष्ट की जाए। यह भी बताया जाए कि ठेकेदार कितने समय तक सड़क में होने वाली खराबियों को अपने खर्च पर ठीक करने के लिए जिम्मेदार रहेगा। सड़क की घोषित उपयोगी उम्र और गारंटी अवधि कब शुरू और कब समाप्त होगी, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए।

यदि सड़क निर्धारित समय से पहले खराब होती है तो निर्माण की रूपरेखा, इस्तेमाल की गई सामग्री, काम की गुणवत्ता और रखरखाव की जांच हो। जांच के बाद जिम्मेदार ठेकेदार, सलाहकार, अधिकारी या संस्था की जवाबदेही तय की जाए। कानून और अनुबंध की शर्तों के अनुसार मरम्मत का खर्च जिम्मेदार पक्ष से वसूला जाए। जैन का कहना है कि केवल नया मरम्मत बजट मंजूर कर देने से पुराने निर्माण की खामियों की जवाबदेही समाप्त नहीं होनी चाहिए। इसके साथ नालियों की सफाई जैसी नियमित देखभाल भी जारी रहनी चाहिए।

गूगल मानचित्र पर सड़क छूते ही खुलेगा निर्माण से मरम्मत तक का हिसाब

सड़कों के निर्माण और मरम्मत में पारदर्शिता लाने के लिए जैन ने गूगल मानचित्र से जुड़े सार्वजनिक डिजिटल नक्शे की व्यवस्था का सुझाव दिया है। इसमें प्रत्येक सड़क खंड और उस पर हुए हर निर्माण या मरम्मत कार्य को अलग पहचान दी जाए। नागरिक मोबाइल पर सड़क या उसके निशान को छूकर संबंधित कार्य का पूरा विवरण देख सकें। इसके लिए किसी खाते में प्रवेश करना अनिवार्य न हो।

यह रिकॉर्ड काम स्वीकृत होने के समय से तैयार किया जाए और निर्माण की प्रगति, काम पूरा होने, गुणवत्ता जांच तथा बाद की मरम्मत के साथ लगातार अद्यतन होता रहे। इसमें सड़क की लंबाई, स्वीकृत कार्य, मंजूर बजट, ठेके की राशि, वास्तविक खर्च, ठेकेदार और अभियंता के नाम, काम शुरू होने तथा पूरा होने की निर्धारित और वास्तविक तारीखें दर्ज हों।

इसके अलावा सामग्री की गुणवत्ता जांच, जलनिकासी प्रमाणपत्र, सड़क की घोषित उपयोगी उम्र, गारंटी अवधि और पिछली मरम्मत का विवरण भी उपलब्ध हो। संबंधित स्वीकृतियों, प्रमाणपत्रों और तस्वीरों को भी इसी व्यवस्था के माध्यम से देखा और डाउनलोड किया जा सके। मूल रिकॉर्ड संबंधित सरकारी संस्था के पास सुरक्षित रहे तथा उसकी सार्वजनिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया जाए।

गड्ढे की शिकायत पर मिले रसीद, कार्रवाई की तस्वीर भी दिखे

जैन ने नागरिकों को सड़क के गड्ढों और जलभराव की शिकायत दर्ज कराने के लिए कई माध्यम उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है। नागरिक सार्वजनिक वेबसाइट, निःशुल्क दूरभाष नंबर, व्हाट्सऐप या लिखित आवेदन के जरिए शिकायत कर सकें। डिजिटल नक्शे पर संबंधित स्थान चिह्नित करके तस्वीर के साथ शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी हो।

प्रत्येक शिकायत पर एक विशिष्ट नंबर जारी किया जाए और उसके माध्यम से कार्रवाई की स्थिति देखी जा सके। मरम्मत पूरी होने के बाद उसकी तस्वीर शिकायतकर्ता को भेजी जाए। यदि 15 कार्यदिवस में शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती है तो उसे राज्य के नामित वरिष्ठ समन्वय विभाग या संस्था तक पहुंचाने की व्यवस्था हो। शिकायत दर्ज कराने और कार्रवाई की स्थिति जानने की सुविधाओं का समाचार पत्रों तथा अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार भी किया जाए।

जलनिकासी की जांच के बिना काम पूरा नहीं, अंतिम भुगतान पर भी रोक

जैन ने सुझाव दिया है कि स्वीकृत जलनिकासी व्यवस्था की मौके पर जांच होने तक सड़क निर्माण का कार्य पूर्ण होने का प्रमाणपत्र और अंतिम भुगतान जारी न किया जाए। प्रत्येक वर्ष बारिश से पहले जलनिकासी व्यवस्था के चालू होने की पुष्टि की जाए। इसके अतिरिक्त नमूने के आधार पर स्वतंत्र जांच की व्यवस्था भी हो।

यदि किसी मामले में झूठा प्रमाणपत्र देने, नालियों की सफाई में लापरवाही या सड़क के समय से पहले टूटने की शिकायत सामने आती है तो उसकी जांच कराई जाए। दोष साबित होने पर संबंधित विभागीय नियमों और अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्रवाई की जाए।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि सड़क दुर्घटना या अन्य नुकसान से प्रभावित व्यक्ति को कानून के तहत मिलने वाला मुआवजा विभागों और ठेकेदार के बीच जिम्मेदारी का विवाद सुलझने तक नहीं रोका जाना चाहिए। इससे पीड़ित को मुआवजे के लिए अनावश्यक रूप से भटकना नहीं पड़ेगा।

60 दिन में प्रारूप, 90 दिन में शुरुआती रिपोर्ट का सुझाव

सड़क निर्माण में जवाबदेही और निगरानी की व्यवस्था लागू करने के लिए जैन ने समयबद्ध कार्ययोजना का प्रस्ताव भी रखा है। इसके तहत सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय राज्यों के साथ मिलकर 60 दिन में जलनिकासी प्रमाणपत्र, सड़क की उपयोगी उम्र की जानकारी और कामकाज की साझा व्यवस्था का प्रारूप तैयार करे।

राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से शुरुआती अनुपालन रिपोर्ट 90 दिन में प्रस्तुत की जाए। इसके बाद प्रत्येक तीन महीने में प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। डिजिटल नक्शे पर सड़कों और उनके निर्माण व मरम्मत संबंधी अभिलेख उपलब्ध कराने का काम भी चरणबद्ध समयसीमा में पूरा किया जाए।

नालियों की सफाई, गड्ढे भरने और एक ही सड़क पर बार-बार होने वाली मरम्मत का खर्च अलग-अलग दर्ज करने का सुझाव दिया गया है, ताकि अनावश्यक खर्च और दोहराए जा रहे कार्यों की पहचान की जा सके।

आपात मरम्मत नहीं रुकेगी, स्थायी समाधान भी जरूरी

जैन ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित जवाबदेही व्यवस्था के कारण तत्काल खतरे को दूर करने का काम नहीं रुकना चाहिए। सड़क पर खतरनाक गड्ढा होने पर उसकी अस्थायी मरम्मत, बैरिकेड लगाने, चेतावनी संकेत लगाने या बंद नाली की आपात सफाई जैसे जरूरी काम तुरंत किए जाएं। इसके बाद जहां आवश्यकता हो, वहां जलनिकासी की समस्या का स्थायी समाधान तय समयसीमा में किया जाए।

केसी जैन ने कहा—जनता के पैसे से बनी सड़क पर सुरक्षा और जवाबदेही जरूरी

के. सी. जैन ने अपने वक्तव्य में कहा, मेरी चिंता उन परिवारों की है जिनका कोई अपना सड़क के गड्ढे के कारण घर वापस नहीं लौटता, या घायल होकर लंबे समय तक तकलीफ झेलता है। सुरक्षित सड़क और समय पर मरम्मत हर नागरिक की जरूरत है। मैं चाहता हूं कि सड़क बनाने से पहले पानी निकलने का इंतजाम सुनिश्चित हो, सड़क कितने साल चलेगी यह बताया जाए और जनता को हर काम का हिसाब आसानी से मिले। जहां लापरवाही साबित हो, वहां जिम्मेदारी तय हो और पीड़ित परिवार को मुआवजे के लिए भटकना न पड़े। जनता के पैसे से बनने वाली सड़क पर उसकी सुरक्षा और उसके पैसे की पूरी जवाबदेही होनी चाहिए। इन्हीं उद्देश्यों से मैं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष ये सुझाव रख रहा हूं।

SP_Singh AURGURU Editor