बांग्लादेशी जोड़े को सऊदी अरब में फांसी, ढाका में जबर्दस्त आक्रोश, सजा क्यों मिली, वजह साफ नहीं
सऊदी अरब में बांग्लादेश के दो नागरिकों को फांसी दिए जाने को लेकर ढाका में आक्रोश फैला हुआ है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि उनका अपराध क्या था और क्या बांग्लादेश को इसके बारे में पहले जानकारी दी गई थी। इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया जा रहा है। इसके अलावा लोग सऊदी अरब की कानूनी प्रक्रिया पर भी सवाल उठा रहे हैं।
ढाका: सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में एक मस्जिद में अनैतिक कृत्यों के आरोपी दो बांग्लादेशी नागरिकों को फांसी दिए जाने पर ढाका में आक्रोश फैल गया है। बांग्लादेशी लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या सऊदी अरब ने उनके कथित अपराधों, अदालती प्रक्रिया और मुकदमों की निष्पक्षता पर क्या बांग्लादेश की सरकार को सूचित किया था। या क्या बांग्लादेश किसी भी तरह से अपने दो नागरिकों की जान को बचा सकता था। हालांकि, बांग्लादेश की सरकार ने कहा है कि उन्हें इसके बारे में पहले कोई जानकारी नहीं दी गई। बांग्लादेश ने सऊदी अरब से इस मामले में विस्तृत जवाब भी मांगा है और इसे वियना कन्वेंशन का उल्लंघन करार दिया है।
सऊदी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मक्का की एक मस्जिद के अंदर "अनैतिक कृत्यों" के लिए दोनों को 14 अक्टूबर को फांसी दी गई थी। हालांकि, रिपोर्टों में न तो उन "अनैतिक कृत्यों" का विवरण दिया गया और न ही सऊदी अधिकारियों की ओर से कोई और जानकारी दी गई। सऊदी अरब दुनिया में मृत्युदंड का सबसे अधिक प्रयोग करने वाले देशों में से एक है। ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में कम से कम 356 लोगों को फांसी दी गई, जिनमें से अधिकांश गैर-हिंसक मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों के लिए थीं।
सऊदी अरब के मीडिया सूत्रों ने गृह मंत्रालय के हवाले से बताया कि इन दोनों व्यक्तियों की पहचान नजरुल इस्लाम अब्दुल बशीर और सिटी अख्तर के रूप में हुई है। उन पर मक्का शहर की एक मस्जिद के अंदर "अनैतिक कृत्य" करने का आरोप है । सऊदी अरब ने लगभग इतनी ही जानकारी सार्वजनिक की है। सऊदी अधिकारियों ने कथित कृत्यों, दोनों की गिरफ्तारी की तारीख या उनके मुकदमों की कार्यवाही के बारे में सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है।
अब्दुल बशीर और रहीमा बेगम के सबसे बड़े बेटे नजरुल चटोग्राम डिवीजन के ब्राह्मणबारिया सदर उपजिला के रहने वाले थे। वे नवंबर 2022 में सऊदी अरब चले गए और मक्का की मस्जिद अल-हरम में सफाईकर्मी के रूप में काम करने लगे। उनके परिवार ने प्रोथोम आलो को बताया कि पुलिस ने उन्हें आठ महीने बाद गिरफ्तार कर लिया और फांसी दिए जाने तक वे जेल में ही रहे। रिश्तेदारों ने बताया कि उन्होंने नजरुल से आखिरी बार 11 अक्टूबर को बात की थी। तीन दिन बाद, परिवार को फोन आया जिसमें उन्हें उसकी फांसी की सूचना दी गई। खबर सुनकर उसकी 65 वर्षीय चाची, अबेदा बेगम बेहोश हो गईं और बाद में उनकी मौत हो गई।
मृत्युदंड को लेकर सऊदी अरब की अक्सर आलोचना की जाती है। लेकिन, सऊदी अरब के प्रधानमंत्री और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने 2022 के एक इंटरव्यू में दावा किया था कि उनके देश में मृत्युदंड केवल हत्या के मामलों तक ही सीमित है। सऊदी अरब इस्लामी कानून की तीन व्यापक श्रेणियों के तहत मृत्युदंड देता है: किसास (प्रतिशोध, मुख्य रूप से हत्या के लिए), हुदूद (विशिष्ट अपराधों के लिए निर्धारित दंड) और ताजिर (मनमानी वाले दंड, जिनमें मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य अपराध शामिल हैं)।
बताया जा रहा है कि दो बांग्लादेशी नागरिकों को ताजीर के तहत मौत की सजा सुनाई गई थी । खबरों के मुताबिक, सऊदी अरब की निचली से लेकर ऊपरी अदालतों ने उनकी मौत की सजा को बरकरार रखा। इसके बाद मक्का क्षेत्र में उनकी फांसी को अधिकृत करने वाला एक शाही आदेश जारी किया गया। यह सऊदी अरब में विदेशी नागरिकों को दी गई मौत की सजा से जुड़ा दूसरा मामला है। इससे पहले श्रीलंका के एक हिंदू प्रवासी अनोजन सिवरासा को हाल ही में ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन कोलंबो के हस्तक्षेप के कारण उनकी सजा पलट दी गई।
अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि उन दो बांग्लादेशी नागरिकों ने ऐसा क्या किया था जिसके कारण उनकी मृत्यु हुई। सऊदी अरब ने इसे एक कथित "अनैतिक कृत्य" बताया। अब ऐसी खबरें हैं कि वे मस्जिद में एक-दूसरे को चूम रहे थे। बाद में सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि पुरुष ने महिला को सिर्फ माथे पर एक चुंबन दिया था। यह भी बताया गया है कि दोनों पति-पत्नी नहीं हैं, बल्कि उनकी मुलाकात सऊदी अरब में रहने के दौरान हुई थी। लेकिन, सऊदी अरब की तरफ से बहुत कम जानकारी देने और फांसी पर लटाने के कारण बांग्लादेश में आक्रोश बढ़ गया है।