लखनऊ में पोस्टर वार से गरमाई सियासत, राहुल-अखिलेश समेत 10 हस्तियों को रावण के सिरों में दिखाया
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी में दशहरे से पहले लगाए गए एक विवादित होर्डिंग ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी। सनातन रक्षा संगठन की ओर से लगाए गए इस होर्डिंग में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत 10 चर्चित हस्तियों के चेहरे रावण के दस सिरों के रूप में प्रदर्शित किए गए। होर्डिंग पर ‘रावण, सनातन भारत के शत्रु’ संदेश भी लिखा गया था। हजरतगंज और गोमती नगर जैसे प्रमुख इलाकों में लगाए गए इन पोस्टरों का समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध किया और उन्हें हटाए जाने की खबर सामने आई। धार्मिक प्रतीक के जरिए राजनीतिक और सार्वजनिक हस्तियों को निशाना बनाने की इस घटना ने चुनाव से पहले पोस्टरबाजी की राजनीति को फिर चर्चा में ला दिया है।
रावण के प्रतीक के जरिए किन चेहरों को बनाया निशाना?
होर्डिंग में राहुल गांधी और अखिलेश यादव के अलावा अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क, अमेरिकी सांसद इल्हान उमर, बांग्लादेश के अर्थशास्त्री मुहम्मद यूनुस, निवेशक जॉर्ज सोरोस और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण की तस्वीरें दिखाई गईं। इनके साथ उत्तर प्रदेश के पूर्व सांसद अतीक अहमद, पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी और समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के चेहरे भी शामिल थे।
इन हस्तियों को रावण के दस सिरों के रूप में दिखाकर संगठन ने एक साझा राजनीतिक-सामाजिक संदेश देने की कोशिश की। हालांकि, होर्डिंग पर इस्तेमाल की गई भाषा संगठन का अपना आरोप और दृष्टिकोण है। इसे तस्वीरों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ किसी न्यायिक निष्कर्ष या प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
प्रमुख इलाकों में लगे पोस्टरों पर सपा कार्यकर्ताओं का विरोध
राजधानी के हजरतगंज और गोमती नगर समेत प्रमुख स्थानों पर लगे होर्डिंग सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गए। पोस्टरों में राजनीतिक नेताओं के साथ देश-विदेश की अन्य चर्चित हस्तियों को भी शामिल किए जाने से विवाद का दायरा केवल उत्तर प्रदेश की राजनीति तक सीमित नहीं रहा।
समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इन होर्डिंग का विरोध किया और उनके हटाए जाने की सूचना सामने आई। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में पोस्टर लगाए जाने और विरोध के बाद उन्हें हटाए जाने का उल्लेख है। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से किसी मुकदमे, गिरफ्तारी या आधिकारिक जांच की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
2027 के चुनाव से पहले तेज हो सकती है पोस्टर और प्रतीकों की राजनीति
उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राजधानी में सामने आया यह घटनाक्रम राजनीतिक दलों और संगठनों के बीच बढ़ती बयानबाजी के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। पोस्टर और होर्डिंग लंबे समय से राजनीतिक संदेश पहुंचाने का माध्यम रहे हैं, लेकिन जब उनमें धार्मिक प्रतीकों के सहारे विरोधियों को निशाना बनाया जाता है तो विवाद और तीखा हो जाता है।
दशहरे का रावण बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इस प्रतीक को समकालीन राजनीतिक विरोध से जोड़कर सार्वजनिक हस्तियों के चेहरे प्रदर्शित करना अपने आप में एक आक्रामक संदेश है। इससे राजनीतिक असहमति की भाषा और धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल की सीमाओं पर भी चर्चा शुरू होती है।
फिलहाल इस प्रकरण में मुख्य रूप से होर्डिंग लगाए जाने, उनमें शामिल चेहरों और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के विरोध की जानकारी सामने आई है। किसी कानूनी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि के बिना इस मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।