पंचवटी से लंका तक पहुंची रामलीला, सूर्पणखा प्रसंग से सीता हरण तक मंच पर सजी रामकथा

श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव में रविवार को सूर्पणखा की नाक काटने, स्वर्ण मृग, मारीच के छल, सीता हरण और जटायु-रावण युद्ध के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन हुआ। कलाकारों के सजीव अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। सोमवार को सुग्रीव युद्ध और लंका दहन लीला का मंचन होगा।

Oct 18, 2026 - 20:34
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पंचवटी से लंका तक पहुंची रामलीला, सूर्पणखा प्रसंग से सीता हरण तक मंच पर सजी रामकथा
रामलीला का मंचन करते कलाकार।

आगरा। “लछिमन अति लाघवँ सो मारा। परेउ भूमि करि घोर पुकारा॥” पंचवटी में सूर्पणखा के आगमन से शुरू हुआ घटनाक्रम स्वर्ण मृग के आकर्षण और रावण के छल से माता सीता के हरण तक पहुंचा। श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव का आयोजन श्री मनःकामेश्वर ग्रामीण संस्थान, गढ़ी ईश्वरा, दिगनेर, शमशाबाद रोड में चल रहे श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव में रविवार को इन प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों के सजीव अभिनय ने रामकथा के घटनाक्रम को मंच पर जीवंत कर दिया। कहीं लक्ष्मण के पराक्रम की झलक दिखाई दी, तो कहीं माता सीता के करुण विलाप ने दर्शकों को भावुक कर दिया। स्वरूपों की आरती श्री महंत योगेश पुरी और मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने उतारी।

पंचवटी में श्रीराम के मनोहारी स्वरूप पर मोहित होकर सूर्पणखा ने उनसे विवाह की इच्छा जताई। श्रीराम के संकेत पर वह लक्ष्मण के पास पहुंची, लेकिन वहां भी उसे निराशा हाथ लगी। क्रोधित होकर जब उसने माता सीता को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया, तब लक्ष्मण ने उसकी नाक काट दी। अपमानित सूर्पणखा ने अपने भाइयों खर-दूषण और रावण को प्रतिशोध के लिए उकसाया। मारीच ने स्वर्ण मृग का रूप धारण कर माता सीता का ध्यान आकर्षित किया। उनकी इच्छा पूरी करने के लिए श्रीराम मृग के पीछे चले गए। मारीच ने अंत समय में श्रीराम की आवाज में पुकार लगाई। इससे चिंतित माता सीता ने लक्ष्मण को उनकी सहायता के लिए भेज दिया।

लक्ष्मण के कुटिया से जाते ही रावण साधु वेश में पहुंचा और भिक्षा मांगने के बहाने माता सीता को छलपूर्वक अपने साथ ले गया। माता सीता की पुकार और जटायु के रावण से संघर्ष के प्रसंग ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि सोमवार को श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव में सुग्रीव युद्ध और लंका दहन लीला के प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से रामलीला में पहुंचकर प्रभु श्रीराम की लीलाओं के दर्शन करने का आह्वान किया।