आगरा में दशहरे पर दिखेगा ‘चलता-फिरता’ रावण, तलवार चलाएगा तो ढाल से करेगा बचाव

आगरा के बिजलीघर स्थित रामलीला मैदान में इस बार दशहरे पर 120 फीट ऊंचा रावण आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। रावण की आंखें झपकेंगी, हाथ हिलेंगे और एक हाथ तलवार से वार करता तो दूसरा ढाल से बचाव करता नजर आएगा। पहली बार पुतले को लाल, काले और केसरिया रंगों से सजाया जा रहा है। मथुरा के सात कारीगर 33 दिनों से इसे तैयार करने में जुटे हैं। रावण के साथ 100 फीट के मेघनाद और 30 फीट के कुंभकरण का भी दहन होगा, जिसमें लाखों रुपये की आतिशबाजी की जाएगी। वहीं, आगरा के घटिया आजम खां और नामनेर बाजार में 5 से 20 फीट तक के रावण के पुतलों की बिक्री शुरू हो गई है, जिनकी कीमत 1,500 से 10 हजार रुपये तक है।

Oct 17, 2026 - 19:08
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आगरा में दशहरे पर दिखेगा ‘चलता-फिरता’ रावण, तलवार चलाएगा तो ढाल से करेगा बचाव
रामलीला मैदान में 120 फुट के रावण को तैयार करते कारीगर।

बिजलीघर रामलीला मैदान में इस बार बदले अंदाज में होगा रावण दहन, लाल-काले-केसरिया रंगों में नजर आएगा लंकापति, 100 फीट मेघनाद और 30 फीट कुंभकरण भी रहेंगे आकर्षण

आगरा। दशहरे पर बुराई के प्रतीक रावण का दहन तो हर साल होता है, लेकिन आगरा के बिजलीघर स्थित रामलीला मैदान में इस बार रावण का पुतला लोगों के लिए खास आकर्षण बनने जा रहा है। यहां 120 फीट ऊंचा रावण तैयार किया जा रहा है, जिसकी खासियत सिर्फ उसका विशाल आकार ही नहीं, बल्कि उसकी चलती आंखें और हिलते हाथ भी होंगे।

इस बार रावण के पुतले को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि उसका एक हाथ तलवार से वार करता नजर आएगा, जबकि दूसरा हाथ ढाल से बचाव करेगा। रावण की आंखें भी झपकेंगी और उसके हाथों में भी मूवमेंट दिखाई देगा। पहली बार रावण को तीन अलग-अलग रंगों के विशेष संयोजन में सजाया जा रहा है।

लाल, काले और केसरिया रंग में दिखेगा रावण

रावण के चेहरे को इस बार पारंपरिक रंगों से अलग आकर्षक रूप दिया जा रहा है। चेहरा केसरिया, होंठ लाल और मूंछें, आंखें व भौंहें काली रखी जाएंगी। तीन रंगों का यह संयोजन रावण के पुतले को पहले से अलग और ज्यादा प्रभावशाली रूप देगा। रामलीला मैदान में रावण के साथ 100 फीट ऊंचे मेघनाद और 30 फीट ऊंचे कुंभकरण के पुतले भी तैयार किए जा रहे हैं। दशहरे की शाम तीनों पुतलों का भव्य दहन किया जाएगा।

33 दिन से सात कारीगर दिन-रात जुटे

120 फीट ऊंचे रावण को तैयार करने के लिए मथुरा से आए सात कारीगर पिछले 33 दिनों से लगातार काम कर रहे हैं। पुतले के निर्माण में बांस की लकड़ी, धागा, कागज, रद्दी और लेई का इस्तेमाल किया जा रहा है। कारीगर जाफर अली के मुताबिक, अकेले रावण के पुतले में करीब डेढ़ कुंतल कागज इस्तेमाल होगा। पुतले के विशाल आकार और उसमें होने वाली गतिविधियों को देखते हुए इसे तैयार करने में काफी मेहनत और तकनीकी कौशल की जरूरत पड़ रही है।

पांचवीं पीढ़ी तक पहुंची रावण बनाने की परंपरा

रावण का पुतला तैयार करने वाले कारीगर जाफर अली ने बताया कि उनके परिवार में रावण और अन्य पुतले बनाने की परंपरा पांचवीं पीढ़ी तक पहुंच चुकी है। इस बार उनके साथ अमीर, कलुआ, शाहरुख खान, टेटा उर्फ मुकर्रम, नवाब और पप्पू भी काम में जुटे हैं। कारीगरों की टीम दिन-रात पुतले को अंतिम रूप देने में लगी है। विशाल ढांचे को खड़ा करने से लेकर चेहरे की सजावट, हाथों की गतिविधि और आतिशबाजी के लिए जगह तैयार करने तक हर काम को बारीकी से किया जा रहा है।

तलवार और ढाल वाला रावण होगा खास आकर्षण

इस बार रावण के पुतले में सबसे खास प्रयोग उसके हाथों की गतिविधि को लेकर किया गया है। दर्शकों को दहन से पहले रावण का एक हाथ तलवार से हमला करता और दूसरा ढाल से बचाव करता हुआ नजर आएगा। इसके साथ ही आंखों की मूवमेंट भी पुतले को जीवंत रूप देने का काम करेगी। दशहरे पर रामलीला मैदान में पहुंचने वाले दर्शकों के लिए यह रावण दहन से पहले ही बड़ा आकर्षण बनने की उम्मीद है।

आतिशबाजी से रोशन होगा दशहरा

रामलीला कमेटी के महामंत्री राजीव अग्रवाल के मुताबिक, इस बार तीनों बड़े पुतलों में लाखों रुपये की आतिशबाजी लगाई जाएगी। रावण, मेघनाद और कुंभकरण के दहन के दौरान आतिशबाजी का भव्य नजारा देखने को मिलेगा। पुतलों के अंदर आतिशबाजी लगाने के लिए पीलीभीत से विशेष कारीगर बुलाए गए हैं। सुरक्षा और आतिशबाजी की व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुतलों को तैयार किया जा रहा है।

रावण ही नहीं, हिरन से लेकर जटायु तक तैयार

रामलीला के मंचन और दशहरे के आयोजन को खास बनाने के लिए कारीगरों ने रावण के अलावा कई अन्य पुतले भी तैयार किए हैं। इनमें हिरन, जटायु, कौआ, कुंभकरण, मेघनाद और ताड़का के पुतले शामिल हैं। इसके अलावा लंका और हनुमानजी की गदा भी तैयार की गई है। यानी रामलीला मैदान में इस बार दर्शकों को सिर्फ रावण दहन ही नहीं, बल्कि रामायण के कई प्रमुख पात्रों और प्रसंगों से जुड़े आकर्षण देखने को मिलेंगे।

आगरा के बाजारों में भी सजने लगे रावण के पुतले

दशहरे की तैयारियों का असर आगरा के बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। घटिया आजम खां और नामनेर बाजार में रावण के छोटे-बड़े पुतलों की बिक्री शुरू हो गई है। बाजार में इस समय करीब 5 से 20 फीट तक के पुतले उपलब्ध हैं। इनकी कीमत आकार और डिजाइन के अनुसार 1,500 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक है। कारीगर प्रेम के मुताबिक, इस बार दस सिर वाले रावण के पुतलों की मांग सबसे ज्यादा है। हालांकि पुतलों की मुख्य बिक्री 18 अक्टूबर से तेज होने की उम्मीद है। इन बाजारों से शहर के अलग-अलग इलाकों के लिए रावण के पुतले भेजे जाते हैं।

बड़े आयोजन से लेकर मोहल्लों तक दशहरे की तैयारी तेज

आगरा में बड़े रामलीला आयोजनों के साथ-साथ कॉलोनियों और मोहल्लों में भी दशहरे की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं। कहीं बड़े आकार के पुतले तैयार हो रहे हैं तो कहीं बच्चों और युवाओं के लिए छोटे पुतलों की खरीदारी शुरू हो गई है। बिजलीघर के रामलीला मैदान का 120 फीट ऊंचा, रंग-बिरंगा और हाथ-पैर हिलाने वाला रावण इस बार दशहरे के सबसे बड़े आकर्षणों में शामिल होने जा रहा है। अब सभी की नजरें दशहरे की शाम पर हैं, जब हजारों दर्शकों के सामने बुराई के प्रतीक रावण का भव्य दहन किया जाएगा।