जनकपुर में गूंजे मंगलगीत, वैदिक मंत्रों के बीच हुआ श्री तुलसी-शालिग्राम विवाह
आगरा के शमशाबाद स्थित जनकपुर की शिव वाटिका के जनक महल में श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव के अंतर्गत श्री तुलसी-शालिग्राम विवाह समारोह वैदिक मंत्रोच्चार और मंगलगीतों के बीच संपन्न हुआ। श्री महंत योगेश पुरी के संरक्षण में विवाह और कन्यादान की रस्में निभाई गईं। राजा जनक और रानी सुनयना के रूप में ऋषि एवं रेखा वर्मा ने बेटी की विदाई के प्रसंग को भावुक बना दिया। शाम को रामलीला मंचन में सीता विदाई, बारात की अयोध्या वापसी और दशरथ-कैकेयी संवाद से जुड़ी लीलाओं का मंचन हुआ। समारोह में केंद्रीय मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव में शिव वाटिका के जनक महल में साकार हुई मिथिलानगरी की छटा, राजा जनक और रानी सुनयना के वात्सल्य ने किया भावविभोर
आगरा। “सिय रघुबीर बिबाहु जे गावहिं। सुनहिं सदा ते परम पद पावहिं॥” भक्ति, श्रद्धा और सनातन परंपरा के अनुपम संगम के बीच शुक्रवार को श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव के अंतर्गत शमशाबाद में बने जनकपुर स्थित शिव वाटिका के जनक महल में श्री तुलसी-शालिग्राम विवाह समारोह श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रों की पवित्र ध्वनि, मंगल गीतों की मधुर स्वर लहरियों और पुष्पों से सजे मार्गों ने संपूर्ण वातावरण को विवाहोत्सव की दिव्य अनुभूति से भर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो मिथिलानगरी में साक्षात विवाह की मंगल बेला उतर आई हो और प्रत्येक मिथिलावासी अपनी लाड़ली सीता के विवाह में सहभागी बन रहा हो।
शुक्रवार सुबह श्री मनःकामेश्वर मठ के श्री महंत योगेश पुरी और मठ प्रशासक हरिहर पुरी स्वरूपों के साथ जनक महल बने शिव वाटिका पहुंचे। यहां अद्भुत श्रृंगार से सजे विवाह स्थल पर उत्साहित मिथिलावासियों ने विवाह की रस्मों में श्रद्धापूर्वक सहभागिता की। मार्गों पर बिछे पुष्प और विवाह के स्वागत में सजे परिसर ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया।
वैदिक मंत्रों के बीच विवाह और कन्यादान
श्री महंत योगेश पुरी के संरक्षण में आचार्यों ने विधि-विधान के साथ श्री तुलसी-शालिग्राम विवाह संपन्न कराया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह की रस्में पूरी हुईं और कन्यादान की परंपरा निभाई गई। मंगल गीतों के स्वर के बीच विवाह का प्रत्येक विधान श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति की पवित्रता और पारिवारिक संस्कारों की महत्ता का संदेश दे रहा था।
विवाह के उल्लास के बीच बेटी की विदाई का प्रसंग भावुक कर देने वाला रहा। राजा जनक और रानी सुनयना के रूप में ऋषि एवं रेखा वर्मा ने माता-पिता के दायित्व और पुत्री के प्रति वात्सल्य को सजीव किया। बेटी को विदा करने की कल्पना से व्याकुल जनक के भावों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। सायंकाल रामलीला मंचन स्थल पर विवाह प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया गया। विवाह के पश्चात सीता की विदाई और बारात की अयोध्या वापसी के प्रसंगों के बाद कथा आगे बढ़ी। अयोध्या लौटने पर महाराज दशरथ और कैकेयी के बीच संवाद तथा कोप भवन लीला की पृष्ठभूमि तैयार हुई।
प्रमुख अतिथियों ने की सहभागिता
समारोह में केंद्रीय मंत्री प्रो एसपी सिंह बघेल, भाजपा महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता, गौसेवा आयोग के सदस्य रमाकांत उपाध्याय, डॉ. राजेन्द्र सिंह, दिनेश राठौर, लक्ष्मी राठौर आदि उपस्थित रहे।