छीपीटोला में गूंजे गुरु उपकार के जयकारे, 11वें महा महोत्सव एवं मुनि दीक्षा दिवस पर भक्ति में झूमे श्रद्धालु, ‘समत्व की अंतर्यात्रा’ पुस्तक का विमोचन
आगरा। धर्मनगरी छीपीटोला स्थित श्री निर्मल सेवा सदन में शनिवार को 11वें गुरु उपकार महा महोत्सव एवं मुनि दीक्षा दिवस समारोह का भव्य आयोजन किया गया। संत चर्या शिरोमणि पट्टाचार्य आचार्य भगवन्त श्री 108 विशुद्ध सागर जी महामुनिराज के तीन अनमोल रत्न एवं परम प्रभावक शिष्य श्रमण मुनि श्री 108 समत्व सागर जी महाराज, श्रमण मुनि श्री 108 शील सागर जी महाराज और श्रमण मुनि श्री 108 सुप्रभात सागर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित समारोह में आगरा सहित विभिन्न शहरों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ सहभागिता की। विशाल पंडाल में तीनों मुनिराजों के पहुंचते ही जयकारे गूंज उठे और पूरा परिसर मंदिर प्रांगण जैसा नजर आने लगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ छोटी बच्ची के मंगलाचरण से हुआ। श्रमण सांस्कृतिक महिला मंडल के बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। सिंगर आशीष जैन और कुमारी दीक्षा जैन ने भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। महिला मंडल द्वारा मंगलाचरण के बाद दीप प्रज्ज्वलन, पाद प्रक्षालन सहित अन्य मांगलिक कार्यक्रम संपन्न हुए। विभिन्न महिला एवं युवा मंडलों ने भक्ति में झूमते हुए मुनिश्री को अर्घ्य एवं श्रीफल अर्पित किए।
2015 में मिली थी दीक्षा, गुरु उपकार को किया याद
समारोह में मुनि श्री 108 समत्व सागर महाराज ने अपनी दीक्षा यात्रा और गुरु उपकार को स्मरण करते हुए कहा कि अनंत काल से निरंतर गतिमान जीव की यात्रा में कुछ क्षण ऐसे आते हैं, जो जीवन की दिशा बदल देते हैं। वर्ष 2015 में भीलवाड़ा और कोटा, राजस्थान में आया ऐसा ही क्षण उनके जीवन में परिवर्तन का मोड़ बना।
उन्होंने कहा कि यदि सही मार्ग दिखाने वाला गुरु न होता तो आज जिस मार्ग पर चल रहे हैं, उस पर आगे बढ़ना संभव नहीं होता। उन्होंने आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज और आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु के विशुद्ध परिणामों का प्रभाव आज हजारों युवाओं को दीक्षा और जिन शासन की ओर प्रेरित कर रहा है।
मुनि श्री समत्व सागर महाराज ने कहा कि सामान्यतः धार्मिक आयोजनों में वरिष्ठ लोगों की संख्या अधिक दिखाई देती है, लेकिन गुरु भगवंत के साथ विहार के दौरान उन्हें बड़ी संख्या में युवा दिखाई देते हैं। उन्होंने आचार्य विशुद्ध सागर जी के सरल हृदय और गंभीर व्यक्तित्व का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका हृदय सागर जैसी गहराइयों को स्पर्श करता है।
उन्होंने कहा कि दीक्षा के संस्कार कुछ समय में संपन्न हो सकते हैं, लेकिन दीक्षा को सुरक्षित रखना अत्यंत सावधानी और साधना का कार्य है। दीक्षा योग की ओर ले जाती है, भोग की ओर नहीं।
कई शहरों से पहुंचे श्रद्धालु
समारोह में आगरा एवं फिरोजाबाद के साथ जयपुर, टीकमगढ़, बरेली, मेरठ, सागर, दिल्ली और भिंड से आए श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। भजनों की प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु नृत्यमय भक्ति में झूमते नजर आए। मंच संचालन कवि पंडित विकर्ष शास्त्री ने किया।
मुनिराजों के सानिध्य में ‘समत्व की अंतर्यात्रा’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया। विशाल जनसमुदाय की मौजूदगी में पावन समारोह सानंद और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।
इस अवसर पर श्रुत मंथन वर्षायोग समिति के मनोज जैन, रमेश जैन, प्रवीण जैन (पद्मावती ज्वैलर्स), मुकेश जैन (लले), सचिन जैन, शैलेश जैन, विवेक जैन, चक्रेश जैन, राजीव जैन, अनिल जैन, आशीष जैन, अमित जैन बॉबी, आशीष जैन, हरेश जैन (बबलू), कैलाश जैन, दया चंद्र जैन, सतेंद्र जैन (सदर), राजू भाई (चचे), अमित जैन, पंकज जैन, अंशुल जैन, रोहित जैन, सनी जैन, दीपक जैन, विनित जैन, संभव जैन, सोनू जैन, दीपक जैन बोतल सहित समस्त मंडलों के पदाधिकारी एवं सकल जैन समाज मौजूद रहा। मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग किया।