आगरा में किरावली क्षेत्र के चैंकोरा गांव में खारी नदी पर बड़ा हादसा: जलकुम्भी के जाल में फंसीं 18 भैंसों की दर्दनाक मौत, खनन से बने गहरे गड्ढों में समा गये बेजुबान जानवर
आगरा के किरावली क्षेत्र के चैंकोरा गांव में खारी नदी की घनी जलकुम्भी में फंसकर 18 भैंसों की मौत हो गई। मृत भैंसों में कमल सिंह बघेल की 12 और वीरेंद्र बघेल की छह भैंसें शामिल हैं। ग्रामीणों के अनुसार खनन से नदी तल में बने गहरे गड्ढों और ऊपर फैली जलकुम्भी ने हादसे को गंभीर बना दिया। प्रशासन से पीड़ित किसानों को आर्थिक सहायता और खनन की जांच की मांग की गई है।

खारी नदी में जलकुम्भी, जिसमें फंसने से 18 भैंसों की मौत हो गई।
आगरा। किरावली थाना क्षेत्र के चैंकोरा गांव में खारी नदी में जलकुम्भी का घना जाल 18 भैंसों के लिए जानलेवा साबित हुआ। पानी पिलाने के लिए नदी में उतारी गईं भैंसें जलकुम्भी में इस कदर फंस गईं कि लाख कोशिशों के बावजूद बाहर नहीं निकल सकीं। बताया जा रहा है कि नदी में बड़े पैमाने पर हुए खनन से बने गहरे गड्ढों में भैंसें जा फंसीं और ऊपर से घनी जलकुम्भी ने उन्हें जकड़ लिया। देखते ही देखते 18 मूक पशु नदी की गहराइयों में समा गए। हादसे से दोनों किसानों के परिवारों में कोहराम मच गया।
जानकारी के अनुसार चैंकोरा गांव निवासी कमल सिंह बघेल की 12 भैंसें और वीरेंद्र बघेल की छह भैंसें शनिवार को पानी पिलाने के लिए खारी नदी पर ले जाई गई थीं। नदी में प्रवेश करते ही भैंसें घनी जलकुम्भी में फंस गईं। जलकुम्भी इतनी अधिक थी कि भैंसें अपने सींगों से उसे हटाने के लिए लगातार छटपटाती रहीं, लेकिन निकलने में कामयाब नहीं हो सकीं।
हादसे की जानकारी मिलते ही दोनों किसानों के परिवारीजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। लोगों ने भैंसों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन नदी की स्थिति और घनी जलकुम्भी के कारण कोई भी प्रयास सफल नहीं हो सका। सूचना मिलने पर अछनेरा के एसीपी भी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया।
खनन के गहरे गड्ढों में फंसने की आशंका
18 भैंसों के नदी में डूबने की एक बड़ी वजह नदी में बड़े पैमाने पर हुआ खनन भी बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वहां खनन के कारण नदी तल में काफी गहरे गड्ढे हो गए हैं। आशंका है कि पानी में उतरने के बाद भैंसें इन्हीं गहरे गड्ढों में जा पहुंचीं। गहराई के कारण वे संभल नहीं सकीं और ऊपर से घनी जलकुम्भी में उलझ जाने के कारण उनकी मुश्किल और बढ़ गई।
ग्रामीणों के मुताबिक भैंसों ने जलकुम्भी से निकलने के लिए काफी देर तक संघर्ष किया। उनकी छटपटाहट देखकर मौके पर मौजूद लोग भी उन्हें बचाने के लिए प्रयास करते रहे, लेकिन नदी की गहराई और जलकुम्भी की अधिकता के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। देखते ही देखते सभी 18 भैंसें पानी में डूब गईं।
शाम तक एक भैंस का शव निकाला जा सका
शाम तक केवल एक भैंस को मृत अवस्था में नदी से बाहर निकाला जा सका था। बाकी भैंसों के शवों को निकालने के प्रयास जारी थे। नदी की गहराई और जलकुम्भी के कारण ग्रामीणों के लिए पानी में उतरना बेहद मुश्किल बना हुआ था। ग्रामीणों का कहना था कि पानी में पड़े पशुओं के शवों को जल्द बाहर निकालना जरूरी है, क्योंकि शवों के सड़ने से नदी का पानी भी दूषित हो सकता है।
आंखों के सामने पशुधन गंवाकर रो पड़े किसान
अपना पशुधन आंखों के सामने गंवाने के बाद कमल सिंह बघेल और वीरेंद्र बघेल बदहवास हो गए और रोने लगे। उनके परिजन भी इस घटना से बेहद दुखी नजर आए। दोनों किसानों के लिए भैंसें केवल पशुधन ही नहीं, बल्कि परिवार की आय का महत्वपूर्ण साधन थीं। ग्रामीणों ने दोनों किसानों को ढांढस बंधाया और हरसंभव मदद का भरोसा दिया।
नेताओं ने पहुंचकर मांगी प्रशासन से मदद
हादसे की जानकारी मिलने के बाद रालोद नेता बृजेश चाहर, फतेहपुर सीकरी की ब्लॉक प्रमुख के पति गुड्डू चाहर, अरविंद चाहर समेत अन्य नेता भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित किसानों और उनके परिजनों से मुलाकात कर उन्हें हिम्मत बंधाई। नेताओं ने प्रशासन से दोनों किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की है।
ग्रामीणों ने भी प्रशासन से हादसे की वजहों की जांच कराने, नदी में हुए अवैध अथवा अनियंत्रित खनन की जांच कराने और जलकुम्भी की सफाई कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।