थाने से गायब हुआ सीज ट्रक सिद्धार्थनगर से बरामद, मालिक-बेटे पर शक, फिर बिना मुकदमे के छोड़ा
आगरा के एकता थाना क्षेत्र से ओवरलोडिंग में सीज किया गया ट्रक 5 अगस्त की रात गायब हो गया। पुलिस ने टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर करीब 629 किलोमीटर दूर सिद्धार्थनगर से ट्रक बरामद कर लिया। ट्रक मालिक और उसके बेटे को भी पकड़ा गया, लेकिन पूछताछ के बाद दोनों को छोड़ दिया गया और मामले में चोरी की एफआईआर दर्ज नहीं की गई। अब डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने मामले की जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है।
आगरा। पुलिस थाने की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। आगरा के एकता थाना क्षेत्र से सीज किया गया एक ट्रक चोरी हो गया। ट्रक के गायब होने के बाद पुलिस कई दिनों तक उसकी तलाश में जुटी रही। एक्सप्रेसवे और टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद पुलिस को ट्रक की लोकेशन का सुराग मिला।
पुलिस टीम ने ट्रक का पीछा करते हुए करीब 629 किलोमीटर दूर सिद्धार्थनगर तक पहुंचकर उसे बरामद कर लिया। इस दौरान ट्रक मालिक और उसके बेटे को भी हिरासत में लिया गया। हालांकि, पूरे मामले में उस समय नया मोड़ आ गया, जब थाने से चोरी किए जाने के आरोप में कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया और पूछताछ के बाद दोनों को छोड़ दिया गया। मामले की जानकारी सामने आने के बाद अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
ओवरलोडिंग में सीज हुआ था ट्रक
मामले के अनुसार राजस्थान के अलवर निवासी कालूराम अपना ट्रक लेकर 2 अगस्त को आगरा आए थे। एकता पुलिस चौकी क्षेत्र में यात्री कर अधिकारी वीके आनंद ने ओवरलोडिंग के आरोप में ट्रक को पकड़ लिया। अधिकारी ने ट्रक को सीज करते हुए उस पर 69,500 रुपये का जुर्माना लगाया था। कार्रवाई के बाद ट्रक को थाना परिसर में खड़ा कराया गया और उसकी चाबी थाना एकता में जमा करा दी गई।
5 अगस्त की रात थाने से गायब हुआ ट्रक
ट्रक के सीज होने के कुछ दिन बाद मामला उस समय गंभीर हो गया, जब 5 अगस्त की देर रात ट्रक थाना परिसर से गायब हो गया। पुलिस के लिए यह घटना बड़ी चुनौती बन गई। थाने से सीज वाहन के गायब होने के बाद ट्रक की तलाश के लिए पुलिस टीम लगाई गई। पुलिस ने आसपास के रास्तों के साथ ही विभिन्न टोल प्लाजा के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की।
टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज से मिला सुराग
जांच के दौरान पुलिस को लखनऊ एक्सप्रेसवे समेत अन्य टोल प्लाजा की सीसीटीवी फुटेज में ट्रक दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस को वाहन की दिशा और उसके आगे बढ़ने की जानकारी मिलती गई। सुराग मिलने के बाद आगरा पुलिस की टीम ट्रक के पीछे लग गई। वाहन की तलाश करते-करते पुलिस टीम सिद्धार्थनगर तक पहुंच गई। वहां स्थानीय पुलिस के सहयोग से ट्रक को कब्जे में ले लिया गया।
ट्रक के साथ मालिक और बेटा भी पकड़े गए
पुलिस ने ट्रक बरामद करने के दौरान ट्रक मालिक कालूराम और उसके बेटे को भी पकड़ लिया। इसके बाद आगरा पुलिस दोनों को ट्रक के साथ वापस एकता पुलिस चौकी लेकर आई। पूछताछ के दौरान बताया गया कि ट्रक मालिक के बेटे ने दूसरी चाबी का इस्तेमाल कर ट्रक को थाना परिसर से निकाल लिया था। इसके बावजूद, थाने से सीज ट्रक ले जाने के मामले में कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
बिना मुकदमे के छोड़ने पर उठे सवाल
ट्रक को सैकड़ों किलोमीटर दूर से बरामद करने के बाद भी मामले में एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस ने ट्रक मालिक और उसके बेटे से पूछताछ की, लेकिन बाद में दोनों को छोड़ दिया गया। आरोप है कि दोनों को थाने में चाय-नाश्ता कराने के बाद जाने दिया गया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम और पुलिस की कार्रवाई को लेकर अब जांच की बात कही जा रही है।
जुर्माना जमा कर ट्रक कराया रिलीज
ट्रक मालिक ने बाद में आरटीओ कार्यालय में ओवरलोडिंग का जुर्माना जमा कर दिया। जानकारी के अनुसार, करीब एक सप्ताह पहले 69,500 रुपये का जुर्माना जमा करने के बाद ट्रक को रिलीज करा लिया गया। इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर सीज किया गया ट्रक थाना परिसर से कैसे बाहर निकला, उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी और ट्रक बरामद होने के बाद चोरी या अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा क्यों दर्ज नहीं किया गया।
डीसीपी बोले-मामले की होगी जांच
मामले में डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने कहा कि पूरा मामला उनके संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि थाना परिसर से सीज ट्रक के गायब होने के मामले में किस स्तर पर लापरवाही हुई और बरामदगी के बाद कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।