दयालबाग विश्वविद्यालय की युवा संसद में सरकार से तीखे सवाल, ‘वन नेशन, वन एजुकेशन’ पर पेश हुआ विधेयक

आगरा। दयालबाग विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय सभागार में 16 अक्टूबर को आयोजित राष्ट्रीय युवा संसद में युवाओं ने संसदीय लोकतंत्र का जीवंत प्रदर्शन किया। प्रश्नकाल में विपक्ष ने सरकार से ज्वलंत मुद्दों पर जवाब मांगे, जबकि शिक्षा मंत्री अतिशय जैन ने ‘वन नेशन, वन एजुकेशन’ पर विधेयक पेश किया। प्रधानमंत्री की भूमिका ऋषभ सक्सेना ने निभाई और जाह्नवी सिंह ने सदन की अध्यक्षता की।

Oct 16, 2026 - 21:59
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दयालबाग विश्वविद्यालय की युवा संसद में सरकार से तीखे सवाल, ‘वन नेशन, वन एजुकेशन’ पर पेश हुआ विधेयक
दयालबाग विवि में आयोजित युवा संसद की एक झलक।

युवा संसद में मंत्रिमंडल और विपक्ष के सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों पर सवाल-जवाब, तर्क-वितर्क और विचार-विमर्श के माध्यम से संसदीय कार्यप्रणाली का अभ्यास किया। इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, नीति निर्धारण, निर्णय लेने और नेतृत्व कौशल से परिचित कराना था।

प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष ने यूपीआई से जुड़े मुद्दे उठाते हुए सरकार से पूछा कि इस गंभीर विषय पर प्रभावी कदम उठाने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं। वित्त मंत्री गौरी अग्रवाल ने विपक्ष के सवालों का जवाब दिया। शिक्षा मंत्री अतिशय जैन ने ‘वन नेशन, वन एजुकेशन’ पर जोर देते हुए विधेयक पेश किया। विपक्ष की ओर से जानकी और वजीहा ने सवाल पूछे, जबकि सिमरत ने गंभीर मुद्दों पर चर्चा के दौरान सरकार पर कटाक्ष किए।

निर्णायक मंडल ने परखा प्रतिभागियों का प्रदर्शन

राष्ट्रीय युवा संसद के निर्णायक मंडल में डॉ. उमेंद्र नारायण शुक्ला, निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट, डॉ. बी.आर. आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा तथा डीएवी कॉलेज, जालंधर के डॉ. दिनेश अरोड़ा शामिल रहे।

विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर एस.के. शर्मा, पूर्व प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ मैनेजमेंट, डीईआई, आगरा ने छात्राओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन की प्रशंसा की। उन्होंने इस तरह के आयोजनों को विद्यार्थियों में तार्किक क्षमता, आत्मविश्वास और संसदीय समझ विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत संस्थान के निदेशक प्रोफेसर सी. पटवर्धन और कुलसचिव प्रो. संजीव स्वामी ने किया। निर्णायक मंडल के सदस्यों डॉ. उमेंद्र नारायण शुक्ला और डॉ. दिनेश अरोड़ा को संस्थान के निदेशक प्रोफेसर सी. पटवर्धन ने स्मृति चिह्न प्रदान किए। उन्होंने संस्थान में निर्णायकों की गरिमामय उपस्थिति के लिए आभार व्यक्त किया।

लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय जागरूकता पर जोर

राष्ट्रीय युवा संसद की समन्वयक डॉ. जसप्रीत कौर ने अपने उद्बोधन में कहा कि युवा संसद प्रतियोगिता विद्यार्थियों को संसदीय शैली में बहस, चर्चा और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर देती है। इसका उद्देश्य युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देना और संसदीय कार्यप्रणाली के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

युवा संसद के माध्यम से विद्यार्थियों को सरकार और विपक्ष की भूमिकाओं को समझने, जनहित के मुद्दों पर सवाल उठाने तथा तर्कपूर्ण ढंग से अपने विचार रखने का अवसर मिला। इस तरह की गतिविधियां युवाओं में नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में सहायक हैं।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. निशीथ गौड़ ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम समन्वयक डॉ. जसप्रीत कौर ने दिया।

आयोजक मंडल में प्रोफेसर एस.के. चौहान, प्रोफेसर नंदिता दास, डॉ. मंजू श्रीवास्तव, शुभांक्षी सोनकर, प्रो. के. स्वामी दया, डॉ. बजरंग भूषण, डॉ. कविता रायजादा, डॉ. सनिल, डॉ. मयंक अग्रवाल, आनंद और विवेक सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor