ईरान जंग के बीच जयशंकर ऐलान,   यूएई से मजबूत करेंगे दोस्‍ती,    अमीरात के शासक से की भेंट

एस जयशंकर द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा के लिए तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर बुधवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पहुंचे हैं। उन्होंने यहां कई अहम बैठकों में हिस्सा लिया है।

Oct 16, 2026 - 21:19
 0
ईरान जंग के बीच जयशंकर ऐलान,   यूएई से मजबूत करेंगे दोस्‍ती,    अमीरात के शासक से की भेंट

दुबई। डॉक्टर एस. जयशंकर ने रास अल खैमाह के शासक और यूएई सुप्रीम काउंसिल के सदस्य शेख सऊद बिन अल कासिमी से मुलाकात की है। दोनों के बीच ये मुलाकात जयशंकर के यूएई दौरे के आखिरी दिन शुक्रवार को हुई है। जयशंकर और शेख सऊद की यूएई-भारत संबंध मजबूत करने पर चर्चा हुई है। जयशंकर का दौरा और यूएई से रिश्ते बेहतर करने का ऐलान इसलिए अहम है क्योंकि पश्चिम एशिया में लंबे समय से उथल-पुथल है। खासतौर से ईरान में युद्ध ने ना सिर्फ अरब बल्कि दुनिया के बड़े हिस्से में एनर्जी सप्लाई को प्रभावित किया है।

जयशंकर की रस अल खैमाह के शासक से मुलाकात हुई है, जो यूएई के सात अमीरात में से एक है। यह देश के सबसे उत्तरी हिस्से के निकट स्थित है। इसकी अंतरराष्ट्रीय सीमा ओमान से लगती है और यह अमीरात खाड़ी के तट पर अहम समुद्री रूट होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है। ऐसे में मौजूदा संकट में इस क्षेत्र की भूमिका काफी अहम है।

विदेश मंत्री जयशंकर भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करने के लिए तीन दिवसीय यात्रा पर बुधवार को अबू धाबी पहुंचे थे। बुधवार को ही जयशंकर ने यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाह्यान से मुलाकात की थी और द्विपक्षीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया था।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को अबू धाबी में वैश्वीकरण पर बोलते हुए अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण को पलटा नहीं जा सकता और इससे अधिक दृढ़ता के साथ तालमेल बनाना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अपनी क्षमताओं का निर्माण कर रहा है और भरोसेमंद साझेदारियां स्थापित कर रहा है।

जयशंकर ने अबू धाबी में रायसीना डायलॉग के सत्र में 'द वर्ल्ड अहेड: पावर, पर्पज एंड पॉसिबिलिटी' में अपने भाषणों में इस बात पर जोर दिया गया कि दुनिया की व्यवस्था तेजी से बदल रही है। यह बदलाव लंबे समय से चल रहे रुझानों और हाल की घटनाओं का नतीजा है। इससे तालमेल बैठाते हुए नए विकल्प तलाशना बहुत जरूरी है।

जयशंकर ने कहा, 'हर देश अपनी परिस्थितियों से प्रतिक्रिया देता है। इसमें नए साझेदारों और नए विकल्पों की तलाश स्वाभाविक है। अब साझेदारियां पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर रणनीतिक समझ विकसित करने की मांग करती हैं। आज बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार बहुत जरूरी है और इसे छोटे लेकिन मजबूत सहयोगी समूहों के जरिए समर्थन दिया जा सकता है।

जयशंकर ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत-यूएई साझेदारी इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे दोनों देशों ने बदलते वैश्विक माहौल के अनुसार खुद को ढाला है। जयशंकर का यूएई का दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब पूरे क्षेत्र में तनाव है। ईरान में जारी संघर्ष और यमन में हूती समूह तथा सऊदी अरब के बीच बढ़े तनाव ने क्षेत्र की स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।