सरस्वती शिशु मंदिर के 200 भैया-बहनों ने निकाली कांवड़ यात्रा, हर-हर महादेव के जयघोष की गूंज

सरस्वती शिशु मंदिर, उत्तर विजय नगर के करीब 200 भैया-बहनों ने श्रावण मास में कांवड़ यात्रा निकालकर भारतीय संस्कृति और शिवभक्ति का संदेश दिया। भगवा वेशभूषा में कावड़ लेकर निकले विद्यार्थियों के ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।

Aug 27, 2026 - 13:11
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सरस्वती शिशु मंदिर के 200 भैया-बहनों ने निकाली कांवड़ यात्रा, हर-हर महादेव के जयघोष की गूंज
कांवड़ यात्रा निकालते सरस्वती शिशु मंदिर, उत्तर विजय नगर, आगरा के छात्र-छात्राएं।

आगरा। श्रावण मास की पावन बेला में भारतीय संस्कृति, आस्था और संस्कारों का अनूठा संगम देखने को मिला, जब विद्या भारती से संबद्ध शिशु शिक्षा समिति ब्रज प्रदेश द्वारा नियोजित कार्यक्रम के तहत सरस्वती शिशु मंदिर, उत्तर विजय नगर, आगरा के करीब 200 भैया-बहनों ने भव्य एवं संस्कारमय कांवड़ यात्रा निकाली। भगवा वेशभूषा में कांवड़ लेकर निकले विद्यार्थियों के ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से नगर का वातावरण शिवमय हो उठा।

कावड़ यात्रा का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव परिवार के विधिवत पूजन-अर्चन के साथ हुआ। विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री मनीष अग्रवाल एवं व्यवस्थापक किशोरी श्याम गोयल ने पूजन-अर्चन किया। इसके बाद भैया-बहनों ने हाथों में कांवड़ लेकर यात्रा प्रारंभ की और नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए श्रद्धा एवं उत्साह के साथ आगे बढ़े।

यात्रा में नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। भगवा वस्त्रों में सजे विद्यार्थी पूरे अनुशासन के साथ कांवड़ लेकर चल रहे थे और लगातार भगवान शिव के जयकारे लगा रहे थे। ‘हर-हर महादेव’ तथा ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो गया। यात्रा मार्ग में अनेक स्थानों पर श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर कांवड़ यात्रियों का स्वागत किया।

विद्यालय की ओर से बताया गया कि भारतीय संस्कृति में कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा, अनुशासन, संयम और सामूहिक एकता का भी प्रतीक है। श्रावण मास में शिवभक्त पवित्र जल कावड़ में लेकर भगवान शिव को अर्पित करते हैं। विद्यार्थियों को इस परंपरा से जोड़ने का उद्देश्य उन्हें भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और संस्कारों के प्रति जागरूक करना तथा उनके भीतर सेवा, संयम, अनुशासन और श्रद्धा की भावना विकसित करना है।

शिशु वाटिका द्वारा आयोजित इस कांवड़ यात्रा में विद्यालय परिवार के आचार्य-आचार्याओं की सहभागिता से भक्ति, संस्कार और संस्कृति का सुंदर समन्वय देखने को मिला। विद्यार्थियों के साथ आचार्य-आचार्याओं ने यात्रा को व्यवस्थित और अनुशासित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यात्रा के सफल आयोजन में विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल, प्रबंधक किशोरी श्याम गोयल, प्रधानाचार्य अरविंद तिवारी, विद्यालय के सभी आचार्य-आचार्याओं तथा अभिभावकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सभी ने विद्यार्थियों को आवश्यक मार्गदर्शन देते हुए यात्रा को सुचारु एवं व्यवस्थित रूप से संपन्न कराया।

SP_Singh AURGURU Editor