जिन अखिलेश यादव को कांग्रेस सांसद इमरान मसूद घेरते रहे, उन्हीं की साइकिल पर सवार हुए दामाद शायान: मसूद परिवार की कलह ने खोला सियासत का नया मोर्चा

यूपी के सहारनपुर के मसूद परिवार की मौजूदा कहानी में सबसे बड़ा राजनीतिक विरोधाभास यही है कि कांग्रेस सांसद इमरान मसूद जिन अखिलेश यादव को लगातार चुनौती देते रहे, उनका दामाद शायान मसूद उन्हीं अखिलेश यादव के खेमे में जा खड़ा हुआ है। पारिवारिक विवाद ने इस राजनीतिक दूरी को और सुर्खियों में ला दिया है। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि शायान की सपा में एंट्री वास्तव में इमरान के राजनीतिक आधार को कितना प्रभावित करेगी, लेकिन इतना स्पष्ट है कि सहारनपुर में मसूद परिवार की लड़ाई अब केवल परिवार की चारदीवारी में नहीं रही; उसका एक सिरा सीधे सपा-कांग्रेस की 2027 की राजनीतिक जंग से जुड़ गया है।

Aug 24, 2026 - 18:36
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जिन अखिलेश यादव को कांग्रेस सांसद इमरान मसूद घेरते रहे, उन्हीं की साइकिल पर सवार हुए दामाद शायान: मसूद परिवार की कलह ने खोला सियासत का नया मोर्चा
सांसद इमरान मसूद और उनके दामाद शायान मसूद।

सहारनपुर। राजनीति में रिश्ते अक्सर विचारधारा से बड़े नहीं होते और जब पारिवारिक रिश्तों के साथ राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं टकराती हैं तो तस्वीर और भी दिलचस्प हो जाती है। सहारनपुर के मसूद परिवार में इन दिनों कुछ ऐसा ही दिखाई दे रहा है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद लंबे समय से समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व को लेकर मुखर रहे हैं, लेकिन अब उन्हीं के दामाद शायान मसूद ने कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। इतना ही नहीं, सपा में शामिल होते ही शायान ने अपने ससुर इमरान मसूद की राजनीतिक लाइन से खुलकर असहमति जताई और अखिलेश यादव के पक्ष में खड़े दिखाई दिए।

यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शायान का सपा में प्रवेश केवल एक सामान्य दल-बदल नहीं है। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री और सहारनपुर के दिग्गज नेता काजी रशीद मसूद के पौत्र और शादान मसूद के बेटे हैं। दूसरी ओर पारिवारिक रिश्ते में वह इमरान मसूद के दामाद हैं। यानी शायान की राजनीतिक पहचान सहारनपुर के दो प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों से जुड़ती है। ऐसे में उनका सपा में जाना सहारनपुर की राजनीति में एक नए शक्ति-संतुलन की संभावना पैदा करता है।

इमरान का अखिलेश विरोध, दामाद का अखिलेश का साथ

मसूद परिवार की मौजूदा राजनीतिक कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यही विरोधाभास है। इमरान मसूद पिछले कुछ समय से लगातार सपा और अखिलेश यादव पर आक्रामक रहे हैं। जुलाई में उन्होंने यहां तक कहा था कि कांग्रेस को किसी बैसाखी की जरूरत नहीं है और वह अपने दम पर चुनाव लड़ सकती है। इसी दौर में उन्होंने सपा नेतृत्व को लेकर भी तीखे सवाल उठाए थे।

इमरान के इस रुख के ठीक उलट शायान ने कांग्रेस छोड़कर सपा का रास्ता चुना। 20 अगस्त को वह अखिलेश यादव की मौजूदगी में समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने अपने ससुर की राजनीतिक सोच से असहमति जताते हुए कहा कि वह इमरान मसूद की विचारधारा से सहमत नहीं हैं।

यानी एक ही परिवार में राजनीतिक दिशा दो विपरीत ध्रुवों पर खड़ी हो गई है। ससुर कांग्रेस में रहकर अखिलेश की राजनीति पर सवाल उठा रहे हैं और दामाद उन्हीं अखिलेश यादव के साथ खड़े होकर ससुर की राजनीतिक लाइन को चुनौती दे रहा है।

अखिलेश ने दामाद को हाथों-हाथ लिया, संदेश सहारनपुर से आगे तक

शायान की सपा में एंट्री को जिस तरह अखिलेश यादव ने स्वीकार किया, उसका राजनीतिक संदेश भी महत्वपूर्ण है। शायान को पार्टी में शामिल कराना केवल एक परिवार के सदस्य को पार्टी में जगह देने तक सीमित नहीं माना जा सकता। वह काजी रशीद मसूद की राजनीतिक विरासत से जुड़े परिवार से आते हैं और इमरान मसूद के दामाद हैं। ऐसे में अखिलेश यादव के लिए शायान की एंट्री सहारनपुर में इमरान मसूद को चुनौती देने का अवसर भी है।

यही वजह है कि शायान के सपा में आते ही बेहट विधानसभा सीट से उनकी संभावित दावेदारी की चर्चाएं भी सामने आने लगी हैं।

परिवार में कलह ने सियासी दरार को और गहरा किया

शायान के सपा में जाने के कुछ ही दिन बाद मसूद परिवार का पारिवारिक विवाद भी सार्वजनिक हो गया। इमरान मसूद के भतीजे हमजा नोमान मसूद ने आरोप लगाया कि शायान ने उनकी बहन के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार किया तथा उसे ससुराल से निकाल दिया। हमजा ने यह भी दावा किया कि परिवार के पास इससे संबंधित रिकॉर्डिंग मौजूद हैं।

राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बात यह है कि पारिवारिक विवाद और राजनीतिक ध्रुवीकरण लगभग एक ही समय पर सार्वजनिक हुए हैं। इससे मामला केवल घरेलू कलह तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि सहारनपुर की सियासत में भी इसका असर दिखाई देने लगा है।

काजी रशीद मसूद की विरासत से इमरान तक, अब शायान की नई राह

सहारनपुर की राजनीति में काजी रशीद मसूद का परिवार लंबे समय से प्रभावशाली रहा है। शायान इसी राजनीतिक विरासत के एक हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। इमरान मसूद ने भी इसी व्यापक राजनीतिक विरासत से निकलकर अपनी अलग पहचान बनाई और सहारनपुर की राजनीति में मजबूत जनाधार तैयार किया।

अब तीसरी पीढ़ी के शायान का सपा में जाना इस विरासत के भीतर शक्ति-संतुलन को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या शायान केवल कांग्रेस छोड़कर सपा में गए हैं या आने वाले विधानसभा चुनाव में वह सहारनपुर की राजनीति में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने की तैयारी कर रहे हैं।

अगर दूसरा विकल्प सही साबित होता है तो आने वाले दिनों में इमरान बनाम शायान की राजनीतिक कहानी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की उन कहानियों में शामिल हो सकती है, जहां पारिवारिक रिश्ते और राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं आमने-सामने आ जाती हैं।

अखिलेश के लिए एक तीर से कई निशाने

शायान की सपा में एंट्री से अखिलेश यादव को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक ऐसा राजनीतिक चेहरा मिला है जिसकी जड़ें पुराने काजी परिवार तक जाती हैं और जिसका सीधा पारिवारिक संबंध इमरान मसूद से है। इससे सपा को सहारनपुर में नया आधार मिल सकता है।

दूसरी तरफ इमरान मसूद के लिए चुनौती केवल दामाद के पार्टी बदलने की नहीं है। शायान ने सपा में शामिल होने के बाद जिस तरह इमरान की राजनीतिक सोच से असहमति जताई, उससे यह संकेत मिलता है कि वह केवल पार्टी बदलकर शांत बैठने वाले नहीं हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इमरान के खिलाफ राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है।

यह स्थिति इमरान के लिए इसलिए असहज है क्योंकि जिन अखिलेश यादव पर वह गठबंधन की राजनीति में कांग्रेस को कमजोर करने और सपा को जरूरत से ज्यादा महत्व देने जैसे सवाल उठाते रहे हैं, अब उन्हीं अखिलेश के साथ उनके परिवार का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक चेहरा खड़ा है।

सपा-कांग्रेस रिश्तों की बड़ी तस्वीर में छोटा नहीं है यह घटनाक्रम

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और सपा के बीच सीटों और नेतृत्व को लेकर खींचतान की खबरें लगातार आती रही हैं। 19 अगस्त को सहारनपुर की दिशा बैठक में इमरान मसूद और सपा विधायक आशु मलिक के बीच तीखी नोकझोंक की खबर भी सामने आई थी।

इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में शायान का सपा में जाना और फिर इमरान के खिलाफ बयान देना केवल पारिवारिक घटनाक्रम नहीं रह जाता। यह सपा-कांग्रेस संबंधों में पश्चिमी यूपी की जमीन पर मौजूद तनाव को भी सामने लाता है।

SP_Singh AURGURU Editor