अग्रवाल समाज के सामाजिक संगठन श्री अग्रबंधु समन्वय समिति में रार, एक पक्ष ने वीके अग्रवाल पर लगाये फर्जीवाड़े के आरोप, मामले में मुकदमा भी दर्ज है और 11 महीने से चल रही पुलिस जांच

आगरा। समाजसेवा के नाम पर चंदा जुटाने और संस्था के दस्तावेजों में कथित फर्जीवाड़े के आरोपों को लेकर बल्केश्वर क्षेत्र के दो पूर्व पार्षदों, वर्तमान पार्षदों और समाजसेवियों ने विष्णु कुमार उर्फ वीके अग्रवाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को वाटर वर्क्स स्थित अतिथिवन में प्रेस वार्ता कर उन्होंने आरोप लगाया कि ‘श्री अग्रबंधु समन्वय समिति’ के नाम से शुरू हुई संस्था को बिना वैध नवीनीकरण के चलाया गया और बाद में संस्था के नाम में बदलाव कर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसका नवीनीकरण कराया गया। मामले में कमला नगर थाने में 27 सितंबर 2025 को धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों से संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज है और पुलिस जांच जारी है।

Aug 24, 2026 - 21:43
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अग्रवाल समाज के सामाजिक संगठन श्री अग्रबंधु समन्वय समिति में रार, एक पक्ष ने वीके अग्रवाल पर लगाये फर्जीवाड़े के आरोप, मामले में मुकदमा भी दर्ज है और 11 महीने से चल रही पुलिस जांच
श्री अग्रबंधु समन्वय समिति से संबंधित मामलों में प्रेस से बात करते पूर्व पार्षद ताराचंद मित्तल (तोती भाई), प्रकाश चंद्र अग्रवाल और रमन अग्रवाल एवं अन्य।

पूर्व पार्षद ताराचंद मित्तल ‘तोती भाई’ ने आरोप लगाया कि वर्ष 2004 में ‘श्री अग्रबंधु समन्वय समिति’ का पंजीकरण हुआ था और वीके अग्रवाल उसके अध्यक्ष थे। संस्था का कार्यालय उनके बल्केश्वर स्थित आवास पर था तथा प्रशासनिक और आर्थिक कार्य भी वही देखते थे। उनका आरोप है कि संस्था का निर्धारित अवधि में नवीनीकरण नहीं कराया गया, इसके बावजूद महाराजा अग्रसेन जयंती सहित अन्य सामाजिक आयोजनों के नाम पर चंदा जुटाने का सिलसिला जारी रहा।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2019 में वीके अग्रवाल ने ‘श्री अग्रबंधु समन्वय समिति’ से ‘श्री’ हटाकर ‘अग्रबंधु समन्वय समिति’ के नाम से नया पंजीकरण कराया और नई नियमावली में महामंत्री के रूप में अपने पास महत्वपूर्ण अधिकार सुरक्षित कर लिए।

फर्जी हस्ताक्षर और शपथपत्र का आरोप

पूर्व पार्षद प्रकाश चंद्र अग्रवाल ने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 में उनके फर्जी हस्ताक्षर और फर्जी शपथपत्र के आधार पर परिवर्तित संस्था ‘अग्रबंधु समन्वय समिति’ का नवीनीकरण कराया गया। उनका कहना है कि संस्था की गतिविधियों पर संदेह होने के बाद जब नियमावली और हिसाब-किताब मांगा गया तो उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बाद सब रजिस्ट्रार कार्यालय से दस्तावेज निकलवाने पर कथित गड़बड़ियों का पता चला।

प्रकाश चंद्र अग्रवाल के मुताबिक, 31 जनवरी 2025 को सब रजिस्ट्रार कार्यालय में शिकायत की गई। जांच अधिकारी ने 9 जुलाई 2025 को अपनी रिपोर्ट में विष्णु कुमार उर्फ वीके अग्रवाल को दोषी माना। इसके बाद सब रजिस्ट्रार ने 16 जुलाई 2025 के आदेश में धारा 12-डी के तहत ‘अग्रबंधु समन्वय समिति’ को निरस्त कर दिया और पुलिस कार्रवाई की संस्तुति की।

एफआईआर के बाद भी 11 महीने से जांच

पार्षद हरिओम गोयल ‘बाबा’ ने बताया कि सब रजिस्ट्रार की संस्तुति के बाद प्रकाश चंद्र अग्रवाल और ताराचंद मित्तल ने 7 अगस्त 2025 को पुलिस से शिकायत की। पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर एसीपी स्तर से जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर कमला नगर थाने में 27 सितंबर 2025 को वीके अग्रवाल के खिलाफ धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत एफआईआर दर्ज की गई। प्रेस वार्ता में बताया गया कि एफआईआर के बाद करीब 11 महीने से जांच चल रही है।

समाजसेवी गिर्राज बंसल और रमन अग्रवाल ने आरोप लगाया कि ‘अग्रबंधु समन्वय समिति’ के निरस्त होने के बाद वीके अग्रवाल ने सदर तहसील में ‘श्री अग्रबंधु सेवा ट्रस्ट’ के नाम से नया संगठन बना लिया है।

शीघ्र जांच और गिरफ्तारी की मांग

प्रेस वार्ता में रवि अग्रवाल, गोपाल दास अग्रवाल सहित मौजूद समाजसेवियों ने पुलिस अधिकारियों से मामले की जांच शीघ्र पूरी करने और आरोपों की पुष्टि होने पर वीके अग्रवाल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने समाज के लोगों से भी अपील की कि किसी संस्था या व्यक्ति को चंदा देने से पहले उसके पंजीकरण, नवीनीकरण और वित्तीय दस्तावेजों की जांच जरूर करें।

इस बारे में पूछे जाने पर वीके अग्रवाल ने कहा कि उनके ऊपर लगाये जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि श्री अग्रबंधु समन्वय समिति में वे तो केवल मार्गदर्शक की भूमिका में थे। इस समिति में ताराचंद मित्तल (तोती भाई) संस्थापक, प्रकाश चंद्र अग्रवाल अध्यक्ष और रमन अग्रवाल कोषाध्यक्ष थे। वे छह माह के लिए अपने बेटे के पास अमेरिका गये थे। वहां से लौटकर कोषाध्यक्ष से हिसाब मांगा तो वे नाराज हो गये और इन तीनों ने मिलकर उन्हीं पर आरोप लगाने शुरू कर दिये।

SP_Singh AURGURU Editor