बलूचिस्तान में सेना पर हमलों से आगे बढ़े विद्रोही, सरकार की 'नस' पर वार, मुनीर-शहबाज की टेंशन बढ़ना तय
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मीऔर दूसरे गुट लगातार पाकिस्तानी आर्मी और सरकार को निशाना बना रहे हैं। खासतौर से हालिया पाकिस्तानी एयर स्ट्राइक के बाद प्रांत में गुस्सा है।
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक बार फिर विद्रोही गुटों ने सरकारी ढांचे को निशाना बनाया है। विद्रोदी गुटों ने सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक सुविधाओं को निशाना बनाकर हमले किए हैं। एक अहम घटनाक्रम में हथियारबंद हमलावरों ने चाघी जिले के जियारत बालानोश में एक सरकारी रेस्ट हाउस में आग लगाई है। बंदूकधारी सरकारी इमारत में घुसे, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, कीमती सामान लूटा और इमारत में आग लगाकर फरार हो गए।
चाघी की घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। हमलावरों की पहचान और नुकसान के बारे में अभी स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। चाघी की घटना बलूचिस्तान में सरकारी और सुरक्षा ठिकानों पर हो रहे हमलों की श्रृंखला का हिस्सा है। इससे पता चलता है कि विद्रोही सुरक्षाबलों पर सीधे हमलों से बढ़कर प्रशासनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच रहे हैं। यह जमीन पर सरकार की कमर तोड़ने जैसा है।
बलूचिस्तान में चाघी से पहले पिशिन जिले के सरनान शहर में एक पुलिस स्टेशन पर हमला हुआ था। यहां हथियारबंद लोगों ने स्टेशन पर हमला करते हुए पुलिसकर्मियों से हथियार छीन लिए और पुलिस की गाड़ी लेकर भाग गए। सरनान में कुछ समय के लिए शहर के कई हिस्सों पर विद्रोहियों ने कब्जा कर लिया था।
बलूचिस्तान में सैन्य काफिले पर हाल ही में एक हमले में सात सुरक्षाकर्मी मारे गए। इससे प्रांत में पाकिस्तान की सैन्य मौजूदगी के लिए बलूच अलगाववादी समूहों से बने खतरे का पता चलता है। इसी महीने, 14 अगस्त को मस्तुंग में बलूचिस्तान के गृह मंत्री मीर जियाउल्लाह लैंगोव के काफिले पर हथियारबंद हमले में वे बाल-बाल बचे हैं।
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने हालिया दिनों में पाकिस्तानी आर्मी के खिलाफ बड़े पैमाने पर हमले किए हैं और इन हमलों को लगातार जारी रखने की बात कही है। बीते हफ्ते गुट ने एक बयान जारी करते हुए दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने बीते आठ दिनों में बलूचिस्तान में 22 हमलों को अंजाम दिया है। ये हमले पाक आर्मी के ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए, जिसमें 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए।
बलूचिस्तान में हिंसा और अलगाववादी आंदोलन का लंबा इतिहास रहा है। बलूचिस्तान क्षेत्रफल के लिहाज से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है लेकिन 1947 के बाद से ही यहां अस्थिरता रही है। कई संगठन और सशस्त्र गुट लगातार पाकिस्तानी आर्मी और सरकार के खिलाफ लड़ते रहे हैं। इन गुटों की मांग पाकिस्तान अनसुनी करता है, जिससे गुस्सा और भड़क रहा है।