यूपी में राज्यपाल बदलने की अटकलें तेज, घनश्याम तिवाड़ी का नाम चर्चा में

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के लंबी छुट्टी पर जाने के बाद यूपी के नए राज्यपाल को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार राजस्थान के वरिष्ठ भाजपा नेता घनश्याम तिवाड़ी का नाम चर्चा में है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों के राज्यपालों में फेरबदल की चर्चाएं हैं। भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम के गठन के बाद अब मोदी मंत्रिमंडल में भी बड़े बदलाव की अटकलें तेज हैं। पूरे घटनाक्रम को 2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 की लोकसभा चुनाव रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

Aug 20, 2026 - 18:30
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यूपी में राज्यपाल बदलने की अटकलें तेज, घनश्याम तिवाड़ी का नाम चर्चा में
घनश्याम तिवाड़ी

बीजेपी संगठन के बाद अब केंद्र में बड़े बदलाव के संकेत, आनंदीबेन पटेल के लंबी छुट्टी पर जाने के बाद कयासबाजी तेज, 2027 के चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरण साधने की कवायद 

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अगले कुछ दिनों में बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। वर्तमान राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के लंबी छुट्टी पर जाने के बाद कयासों का दौर शुरू हो गया है कि उत्तर प्रदेश का अगला राज्यपाल कौन होगा। आनंदीबेन पटेल जुलाई 2019 से उत्तर प्रदेश की राज्यपाल हैं और उन्होंने इस पद पर सात वर्ष से अधिक समय पूरे कर लिए हैं। जुलाई 2026 में वह उत्तर प्रदेश के इतिहास में सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाली राज्यपाल बन गई थीं।

घनश्याम तिवाड़ी का नाम चर्चाओं में

राजनीतिक सूत्रों के हवाले से उत्तर प्रदेश के नए राज्यपाल के लिए राजस्थान के वरिष्ठ भाजपा नेता घनश्याम तिवाड़ी का नाम चर्चा में बताया जा रहा है। हालांकि, उनके नाम को लेकर अभी तक राष्ट्रपति भवन या केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में इसे फिलहाल संभावित नाम के तौर पर ही देखा जा रहा है। घनश्याम तिवाड़ी राजस्थान की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं और प्रदेश सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। ऐसे में यदि उन्हें उत्तर प्रदेश का राज्यपाल बनाया जाता है तो इसे केवल संवैधानिक नियुक्ति के बजाय व्यापक राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा सकता है।

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राजनीतिक राज्य है और अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों के कारण यहां राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक हलकों में विशेष दिलचस्पी है। हालांकि राज्यपाल संवैधानिक पद है, लेकिन इतने बड़े राज्य में इस पद पर नियुक्ति का व्यापक राजनीतिक महत्व माना जाता है।

कई राज्यों के राज्यपाल बदलने की भी चर्चा

राजनीतिक गलियारों में केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि कई अन्य राज्यों के राज्यपालों में भी फेरबदल की अटकलें चल रही हैं। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल पद पर मनोज सिन्हा के भविष्य को लेकर भी चर्चाएं हैं। हालांकि इन संभावित बदलावों पर अंतिम फैसला राष्ट्रपति की ओर से केंद्र सरकार की सलाह के आधार पर ही होगा। राज्यपालों में संभावित फेरबदल को भाजपा के व्यापक संगठनात्मक पुनर्गठन से जोड़कर भी देखा जा रहा है। पार्टी ने 17 अगस्त को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम का ऐलान कर दिया है। नई टीम में स्मृति ईरानी, वसुंधरा राजे और राम माधव जैसे अनुभवी नेताओं को अहम जिम्मेदारियां मिली हैं। पार्टी की नई संरचना में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आठ राष्ट्रीय महासचिव और 16 राष्ट्रीय सचिव शामिल किए गए हैं।

संगठन के बाद अब सरकार में बदलाव की अटकलें

भाजपा संगठन में बड़े फेरबदल के बाद अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में भी संभावित मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्टों में इसे आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और गोवा समेत कई राज्यों में अगले विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में केंद्र सरकार के स्तर पर भी क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए बदलाव की संभावना पर राजनीतिक विश्लेषकों की नजर है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव की अटकलों को उस समय और बल मिला जब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को भाजपा का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया। इससे ‘एक व्यक्ति-एक पद’ की पार्टी परंपरा को लेकर भी सवाल उठे और संभावित मंत्रिमंडलीय फेरबदल की चर्चाएं तेज हुईं।

यूपी पर विशेष नजर, जातीय और क्षेत्रीय समीकरण अहम

उत्तर प्रदेश में राज्यपाल की संभावित नई नियुक्ति ऐसे समय होगी, जब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश का राजनीतिक महत्व देखते हुए राजभवन में नई नियुक्ति को भी राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है। यदि घनश्याम तिवाड़ी के नाम पर मुहर लगती है तो राजस्थान के एक अनुभवी भाजपा नेता को उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपे जाने का संदेश राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होगा। खासकर उत्तर भारत की राजनीति में ब्राह्मण नेतृत्व, क्षेत्रीय संतुलन और अनुभवी राजनीतिक चेहरों की भूमिका को देखते हुए इस नियुक्ति के अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जा सकते हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश के लिए किसी स्थायी राज्यपाल की नियुक्ति करेगी या पहले किसी अन्य राज्यपाल को अतिरिक्त प्रभार दिया जाएगा। अंतिम तस्वीर राष्ट्रपति भवन की अधिसूचना के बाद ही साफ होगी।

आनंदीबेन पटेल ने 29 जुलाई 2019 को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल पद की शपथ ली थी। इससे पहले वह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राज्यपाल भी रह चुकी थीं। उत्तर प्रदेश में उनके कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालयों, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य और महिला एवं बाल कल्याण जैसे विषयों पर उनकी सक्रियता चर्चा में है। अब उत्तर प्रदेश के नए राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर दिल्ली से लखनऊ तक राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। भाजपा संगठन की नई टीम के गठन के तुरंत बाद राजभवनों में संभावित बदलाव और फिर केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चाएं इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना रही हैं।