बरेली में मिलिट्री इंटेलिजेंस की सूचना पर पकड़ा गया फर्जी हवलदार, अग्निवीर भर्ती में री-मेडिकल पास कराने का झांसा देकर चला रहा था ठगी का जाल; 40 हजार की पेमेंट से खुला नेटवर्क

बरेली कैंट थाना पुलिस ने मिलिट्री इंटेलिजेंस की सूचना पर योगेश त्रिवेदी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार वह खुद को सेना का सेवानिवृत्त हवलदार बताकर अग्निवीर भर्ती के मेडिकल में अनफिट अभ्यर्थियों को री-मेडिकल में पास कराने का झांसा देता था। उसके पास से फर्जी मोहर, रजिस्टर, मोबाइल और सेना से संबंधित दस्तावेज बरामद हुए हैं।

Aug 26, 2026 - 18:06
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बरेली में मिलिट्री इंटेलिजेंस की सूचना पर पकड़ा गया फर्जी हवलदार, अग्निवीर भर्ती में री-मेडिकल पास कराने का झांसा देकर चला रहा था ठगी का जाल; 40 हजार की पेमेंट से खुला नेटवर्क
बरेली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये गये फर्जी हवलदार के बारे में जानकारी देते एसपी सिटी मानुष पारीक।

-आरके सिंह-

बरेली। अग्निवीर भर्ती में मेडिकल जांच में अनफिट अभ्यर्थियों को री-मेडिकल में पास कराने का झांसा देकर ठगी करने वाले एक आरोपी को बरेली कैंट थाना पुलिस ने मिलिट्री इंटेलिजेंस की सूचना पर गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को सेना का सेवानिवृत्त हवलदार बताकर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलता था। पुलिस ने उसके कब्जे से अभ्यर्थियों की जानकारी वाला रजिस्टर, मोबाइल फोन, फर्जी मोहर और सेना से संबंधित बताए जा रहे दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच के दौरान एक अभ्यर्थी के यूपीआई से आरोपी के खाते में 40 हजार रुपये पहुंचने का विवरण भी सामने आया है।

मिलिट्री अस्पताल के पास दबोचा: कैंट थाना प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार धीर के मुताबिक 25 अगस्त को मिलिट्री इंटेलिजेंस से सूचना मिली थी कि मिलिट्री अस्पताल के पास एक व्यक्ति खुद को सेना का हवलदार बताकर अग्निवीर जनरल ड्यूटी के अभ्यर्थियों को री-मेडिकल में पास कराने का झांसा दे रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मिलिट्री इंटेलिजेंस कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचकर संदिग्ध को पकड़ लिया।

पूछताछ में आरोपी की पहचान योगेश त्रिवेदी (36) के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार उसके पास से मिले रजिस्टर में कई अभ्यर्थियों के नाम, मेडिकल सेंटर, मेडिकल में अनफिट होने के कारण तथा फिट-अनफिट संबंधी विवरण दर्ज था। रजिस्टर में कई अभ्यर्थियों की रेफरल संबंधी जानकारी और सेना से संबंधित बताए गए कॉल लेटर भी मिले हैं।

फर्जी मोहर और मोबाइल बरामद: पुलिस के मुताबिक आरोपी के पास से 155 INF BN (TA) JAK RIF की बताई जा रही एक फर्जी मोहर और रेडमी मोबाइल फोन भी बरामद हुआ। मोबाइल की जांच में कई अभ्यर्थियों के दस्तावेज, बैंक लेनदेन और अन्य संबंधित जानकारी सामने आने की बात पुलिस ने कही है।

40 हजार रुपये की पेमेंट से खुला राज: जांच में 21 अगस्त को एक अभ्यर्थी के यूपीआई से आरोपी को 40 हजार रुपये प्राप्त होने का विवरण मिला। पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह खुद को सेवानिवृत्त हवलदार बताकर मेडिकल में अनफिट अभ्यर्थियों को री-मेडिकल में पास कराने का भरोसा देता था। इसके बदले अभ्यर्थियों से रुपये लिए जाते थे।

गजेंद्र सिंह के साथ साझेदारी का दावा: पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह इस काम में गजेंद्र सिंह नामक व्यक्ति के साथ साझेदारी करता था। अभ्यर्थियों से जुड़ी जानकारी व्हाट्सऐप के माध्यम से गजेंद्र सिंह को भेजी जाती थी। रकम मिलने के बाद आरोपी अपना हिस्सा रखता और शेष राशि गजेंद्र सिंह के बताए बैंक खातों में भेज देता था।

पुलिस का कहना है कि आरोपी और उसके सहयोगियों ने फर्जी दस्तावेज और मोहर का इस्तेमाल कर अभ्यर्थियों के बीच विश्वास पैदा किया और इसी आधार पर ठगी का नेटवर्क तैयार किया। अब पुलिस गजेंद्र सिंह समेत इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।

बीएनएस की धाराओं में मुकदमा: कैंट थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने बरामद रजिस्टर, मोबाइल फोन, फर्जी मोहर और अन्य दस्तावेज कब्जे में लेकर उनकी जांच शुरू कर दी है।

अन्य अभ्यर्थियों और आरोपियों की तलाश: पुलिस अधीक्षक नगर मानुष पारीक ने बताया कि जांच के दौरान गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और ठगी के शिकार अभ्यर्थियों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस मोबाइल फोन, रजिस्टर और बैंक लेनदेन से सामने आए तथ्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

SP_Singh AURGURU Editor