आशुतोष रांका- सौरव दास को न्यायिक हिरासत,  पांच दिन के लिए भेजे गए तिहाड़,  दिपके ने कहा - सरकार इमरजेंसी ही लगा दे

सीजेपी नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को न्यायिक हिरासत में भेजने पर पार्टी की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। सीजेपी नेता अजिंक्या शिंदे ने कहा कि आशुतोष और सौरव दास सिर ऊंचा करके जेल में जा रहे हैं। उधर अभिजीत दिपके ने कहा कि सरकार अब इमरजेंसी ही लगा दे।

Oct 14, 2026 - 10:42
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आशुतोष रांका- सौरव दास को न्यायिक हिरासत,  पांच दिन के लिए भेजे गए तिहाड़,  दिपके ने कहा - सरकार इमरजेंसी ही लगा दे


 
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास को बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे मंदिर मार्ग पुलिस थाने में विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। सुनवाई के बाद उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसके बाद पार्टी की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। सीजेपी नेता अजिंक्य शिंदे ने कहा कि आशुतोष और सौरव सिर ऊंचा करके जेल जा रहे हैं। शिंदे ने बताया कि उन्होंने भी बॉन्ड भरा है।

उन्होंने पुलिस के उस दावे को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया कि दोनों नेताओं ने लोगों को जंतर-मंतर पहुंचने के लिए फोन किया था। शिंदे के मुताबिक, पुलिस ने यह आशंका जताई कि दोनों नेता रिहा होने के बाद फिर से ऐसा कर सकते हैं, इसलिए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। 

बुधवार को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (एसईएम) ने सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दोनों नेताओं को मंगलवार सुबह दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। आरोप है कि उन्होंने जंतर-मंतर के बंद गेट को फांदकर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया। उनके साथ संगठन के कई अन्य सदस्य भी मौजूद थे।

यह कार्रवाई जंतर-मंतर का निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थल का दर्जा खत्म किए जाने के एक दिन बाद हुई। इसके बाद सीजेपी नेताओं के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की।

दोनों नेताओं की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अभिष्ट हेला ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने मजिस्ट्रेट के सामने दलील दी कि आशुतोष रांका और सौरव दास ने लोगों को फोन करके जंतर-मंतर पहुंचने के लिए कहा था। पुलिस ने इसे आपराधिक अतिक्रमण से जुड़ा मामला बताया।

वकील के अनुसार, पुलिस ने यह भी कहा कि दोनों आरोपितों ने रविवार को दिल्ली कैंट पुलिस थाने में विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने एक बांड पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें उन्होंने शांति भंग करने वाली किसी गतिविधि में शामिल नहीं होने का भरोसा दिया था। पुलिस का आरोप था कि जंतर-मंतर में प्रवेश करके उन्होंने इस बांड की शर्तों का उल्लंघन किया।

अधिवक्ता अभिष्ट हेला के मुताबिक, पुलिस ने मजिस्ट्रेट के सामने यह दलील भी दी कि यदि दोनों नेताओं को बाहर रहने दिया गया, तो उनके दोबारा अपराध करने की आशंका है। इसी आधार पर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की गई।