जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल सूची से हटाने को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में याचिका, कहा गया कि यह मौलिक अधिकार का हनन
एक वकील की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि प्रदर्शन स्थल को हटाना शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और अपनी बात रखने के मौलिक अधिकारों का हनन है।
नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के दिल्ली पुलिस के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। एक वकील की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि प्रदर्शन स्थल को हटाना शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और अपनी बात रखने के मौलिक अधिकारों का हनन है।
वहीं, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के दिल्ली पुलिस के फैसले को इंडियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने याचिका दाखिल कर दिल्ली पुलिस के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है।
दिल्ली के पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से 11 अक्टूबर को जारी किये गये स्थायी आदेश के अनुसार जंतर-मंतर अब विरोध-प्रदर्शन का स्थल नहीं होगा और प्रदर्शन के लिए तीन नए स्थल रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान होंगे। दिल्ली पुलिस ने अपने आदेश में कहा है कि तीनों जगहों पर होने वाले विरोध-प्रदर्शनों के लिए एक विस्तृत और संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अलग से जारी की जायेगी।
इससे पहले, शीर्ष अदालत में दायर याचिका में राष्ट्रीय राजधानी में विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगहों की उपलब्धता और उपयुक्तता को लेकर चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया कि शीर्ष अदालत ने पहले जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगह के तौर पर मंजूरी दी थी और रामलीला मैदान को इसके लिए सही विकल्प नहीं माना था।
याचिका में इन पाबंदियों और प्रदर्शनों के लिए दूसरी जगहों को चुनने के पीछे की वजह पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में विरोध-प्रदर्शन के लिए प्रस्तावित वैकल्पिक जगहों को लेकर भी चिंता जताई गई है।
इसमें आरोप लगाया गया है कि इनमें से कुछ जगहें दिल्ली के ‘लैंडफिल’ (विशाल कूड़ास्थल) इलाकों के पास हैं और सार्वजनिक सभाओं के लिए उपयुक्त नहीं हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता याचिकाकर्ता की कानूनी टीम का नेतृत्व कर सकती हैं।