आगरा में साइबर ठगों का डबल अटैक, लाखों रुपयों की चपत लगाई
आगरा में साइबर ठगी के दो मामलों में कुल 10.93 लाख रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत सामने आई है। न्यू आगरा थाना क्षेत्र में लक्ष्मी प्रसाद के बैंक खाते से दो बार में 1.13 लाख रुपये निकालने का आरोप है। वहीं, ग्रीन गैस भुगतान के नाम पर APK लिंक भेजकर मोबाइल हैक करने और क्रेडिट कार्ड से 14 ट्रांजैक्शन में 9.80 लाख रुपये निकालने की शिकायत दर्ज हुई है। पुलिस ने दोनों मामलों में मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
डिजिटल लॉक लगाने के बाद भी खाते से निकाले 14 हजार रुपये, ग्रीन गैस के बिल भुगतान के बहाने APK लिंक भेजकर मोबाइल हैक करने का आरोप, न्यू आगरा और साइबर क्राइम थाने में मुकदमे दर्ज
आगरा। साइबर ठगों ने आगरा में दो अलग-अलग मामलों में लोगों को निशाना बनाकर लाखों रुपये की चपत लगा दी। पहले मामले में पीड़ित के बैंक खाते से दो बार में कुल 1.13 लाख रुपये निकाल लिए गए। आरोप है कि खाते पर डिजिटल लॉक लगाने के बाद भी ठगों ने 14 हजार रुपये निकाल लिए। वहीं, दूसरे मामले में ग्रीन गैस के भुगतान के नाम पर मोबाइल पर APK लिंक भेजकर साइबर ठगी किए जाने का आरोप है। पीड़ित के क्रेडिट कार्ड से 14 बार में कुल 9.80 लाख रुपये निकाल लिए गए।
दोनों मामलों में पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने एक बार फिर मोबाइल फोन पर आने वाले अनजान लिंक, फर्जी भुगतान संदेशों और साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की जरूरत को रेखांकित किया है।
डिजिटल लॉक के बाद भी खाते से निकले 14 हजार रुपये
साइबर ठगी का पहला मामला न्यू आगरा थाना क्षेत्र का है। यहां पीड़ित लक्ष्मी प्रसाद के बैंक खाते से साइबर ठगों ने कथित तौर पर दो बार में 1.13 लाख रुपये निकाल लिए। पीड़ित के मुताबिक, पहली बार उनके खाते से 99,800 रुपये की रकम निकाली गई। इसके बाद खाते को सुरक्षित करने के लिए डिजिटल लॉक लगाया गया, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद खाते से 14 हजार रुपये और निकाल लिए गए। इस घटना ने पीड़ित की चिंता बढ़ा दी। डिजिटल लॉक लगाने के बाद भी खाते से रकम निकलने के मामले में यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि अनधिकृत लेनदेन किस माध्यम से किए गए और खाते की सुरक्षा में सेंध कैसे लगी। पीड़ित लक्ष्मी प्रसाद ने मामले की शिकायत पुलिस से की। उनकी शिकायत के आधार पर न्यू आगरा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब बैंक खाते से हुए लेनदेन और ठगी से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है।
ग्रीन गैस के भुगतान के बहाने 9.80 लाख की ठगी
साइबर ठगी का दूसरा मामला ग्रीन गैस के भुगतान से जुड़ा है। आरोप है कि साइबर ठगों ने भुगतान करने के बहाने पीड़ित को मोबाइल फोन पर एक APK लिंक भेजा। लिंक पर भरोसा कर उसे खोलने या उससे संबंधित प्रक्रिया पूरी करने के बाद ठगों ने कथित तौर पर मोबाइल फोन तक पहुंच बना ली। इसके बाद पीड़ित के क्रेडिट कार्ड से 14 अलग-अलग ट्रांजैक्शन में कुल 9.80 लाख रुपये निकाल लिए गए। खाते और कार्ड से लगातार रकम निकलने की जानकारी सामने आने पर पीड़ित को ठगी का पता चला। मामले में आरोप है कि साइबर अपराधियों ने मोबाइल फोन से संबंधित जानकारी हासिल कर क्रेडिट कार्ड का दुरुपयोग किया। हालांकि, मोबाइल हैक होने और रकम निकालने के वास्तविक तरीके का खुलासा पुलिस की तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगा। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस लेनदेन के विवरण, संदिग्ध लिंक और ठगी में इस्तेमाल किए गए डिजिटल माध्यमों की जांच कर रही है।
APK फाइल के जरिए कैसे हो सकती है ठगी?
APK एंड्रॉयड मोबाइल फोन में ऐप इंस्टॉल करने के लिए इस्तेमाल होने वाली फाइल का प्रारूप है। साइबर अपराधी कई बार बिजली, गैस, बैंकिंग या अन्य सेवाओं के भुगतान और अपडेट के नाम पर लोगों को संदिग्ध APK फाइल डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते हैं। ऐसी फाइल इंस्टॉल करने पर, यदि उसमें दुर्भावनापूर्ण कोड हो और उसे आवश्यक अनुमतियां मिल जाएं, तो मोबाइल में मौजूद संवेदनशील जानकारी जोखिम में पड़ सकती है। कुछ मामलों में अपराधी ओटीपी, बैंकिंग संबंधी जानकारी या अन्य गोपनीय विवरण हासिल करने की कोशिश करते हैं। इसलिए गैस बिल या किसी अन्य भुगतान के लिए अनजान नंबर से भेजे गए लिंक पर भरोसा करने के बजाय संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का इस्तेमाल करना चाहिए। किसी भी अनजान APK फाइल को इंस्टॉल करने से बचना जरूरी है।
पुलिस की जांच पर टिकी निगाहें
दोनों मामलों में पुलिस ने मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पहले मामले में बैंक खाते से दो बार निकाली गई रकम और डिजिटल लॉक के बावजूद हुए लेनदेन की जांच की जा रही है। वहीं, ग्रीन गैस भुगतान के नाम पर हुई ठगी में क्रेडिट कार्ड से किए गए 14 ट्रांजैक्शन और संदिग्ध APK लिंक की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। साइबर ठगी के मामलों में रकम किन खातों में ट्रांसफर हुई, लेनदेन किस माध्यम से किए गए और संदिग्ध मोबाइल नंबरों या डिजिटल गतिविधियों के पीछे कौन लोग हैं, इन तथ्यों से जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
साइबर ठगी से बचने के लिए बरतें सावधानी
ग्रीन गैस या किसी अन्य सेवा के भुगतान के लिए अनजान नंबर से आए APK लिंक को डाउनलोड न करें।
बैंक, क्रेडिट कार्ड या बिल भुगतान से संबंधित जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।
मोबाइल पर आए ओटीपी, पिन और बैंकिंग पासवर्ड किसी को न बताएं।
खाते में संदिग्ध लेनदेन दिखाई देने पर तुरंत बैंक से संपर्क कर कार्ड या खाते को सुरक्षित कराएं।
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज कराएं।
आगरा में सामने आए दोनों मामले बताते हैं कि साइबर अपराधी अलग-अलग तरीकों से लोगों की जमा-पूंजी को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान करते समय सतर्कता बरतना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना देना बेहद जरूरी है।