आगरा मेट्रो की इंजीनियरिंग का कमाल, एनएच-19 पर फुट ओवरब्रिज हटाए बिना रख दिया यू-गर्डर

आगरा मेट्रो ने प्रथम कॉरिडोर पर गुरु का ताल स्टेशन के पास एनएच-19 स्थित फुट ओवरब्रिज को हटाए बिना उसके ऊपर यू-गर्डर स्थापित किया है। इस तकनीक को राहगीरों की सुविधा और यातायात पर कम असर डालने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रुनकता कास्टिंग यार्ड में प्रीकास्ट तकनीक से तैयार यू-गर्डर क्रेन की मदद से पिलरों पर लगाए जाते हैं। आईएसबीटी-सिकंदरा खंड में प्रस्तावित 272 में से 240 यू-गर्डर, 52 में से 40 आई-गर्डर और 123 में से 117 पियरकैप स्थापित किए जा चुके हैं। आईएसबीटी, गुरु का ताल और सिकंदरा स्टेशनों के लिए सभी 24 क्रॉस आर्म का इरेक्शन भी पूरा हो गया है।

Oct 14, 2026 - 17:40
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आगरा मेट्रो की इंजीनियरिंग का कमाल, एनएच-19 पर फुट ओवरब्रिज हटाए बिना रख दिया यू-गर्डर
मेट्रो ने गुरु का ताल मेट्रो स्टेशन के पास स्थित फुट ओवरब्रिज हटाए बिना रख दिया यू-गर्डर।

गुरु का ताल मेट्रो स्टेशन के पास बड़ी उपलब्धि, राहगीरों की सुविधा और यातायात को ध्यान में रखकर अपनाई गई विशेष तकनीक, आईएसबीटी-सिकंदरा खंड में 240 यू-गर्डर स्थापित

आगरा। आगरा मेट्रो परियोजना के निर्माण में आधुनिक इंजीनियरिंग और तकनीकी दक्षता की एक और मिसाल सामने आई है। प्रथम कॉरिडोर पर निर्माणाधीन गुरु का ताल मेट्रो स्टेशन के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (NH-19) पर स्थित फुट ओवरब्रिज (एफओबी) को हटाए बिना उसके ऊपर सुरक्षित तरीके से यू-गर्डर स्थापित किया गया है। इस तकनीकी उपलब्धि से न केवल निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने में मदद मिली है, बल्कि पैदल यात्रियों की सुविधा और सड़क यातायात को कम से कम प्रभावित रखने के प्रयास को भी मजबूती मिली है।

आमतौर पर मेट्रो निर्माण के दौरान मौजूदा संरचनाओं के कारण इंजीनियरिंग से जुड़ी चुनौतियां सामने आती हैं। ऐसे में गुरु का ताल के पास एफओबी को डिस्मेंटल किए बिना उसके ऊपर यू-गर्डर का इरेक्शन करना निर्माण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस व्यवस्था में पहले से मौजूद फुट ओवरब्रिज को हटाने की जरूरत नहीं पड़ी, जिससे राहगीरों के लिए सड़क पार करने की सुविधा बनाए रखने में मदद मिली।

निर्माण में अपनाई गई विशेष तकनीक

गुरु का ताल मेट्रो स्टेशन के पास एनएच-19 पर यू-गर्डर की स्थापना को आगरा मेट्रो के सिविल निर्माण की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस स्थान पर पहले से मौजूद फुट ओवरब्रिज को हटाने के बजाय उसके ऊपर यू-गर्डर स्थापित करने का निर्णय लिया गया। इसका उद्देश्य पैदल यात्रियों की सुविधा बनाए रखने के साथ निर्माण कार्य को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना था। मेट्रो के एलिवेटेड कॉरिडोर में यू-गर्डर दो पिलरों के बीच रखे जाते हैं और इनके ऊपर ट्रैक से जुड़ी संरचना तैयार होती है। इस तरह की प्रीकास्ट तकनीक से निर्माण स्थल पर होने वाले कार्य को अपेक्षाकृत कम समय में पूरा करने में सहायता मिलती है। साथ ही, सड़क पर निर्माण गतिविधियों का दबाव कम रखने में भी मदद मिलती है।

पारंपरिक बॉक्स गर्डर की तुलना में यू-गर्डर के कई फायदे

आगरा मेट्रो में यू-गर्डर तकनीक का इस्तेमाल निर्माण की गति, लागत और उपयोगिता को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। पारंपरिक बॉक्स गर्डर की तुलना में यू-गर्डर की संरचना अलग होती है। अंग्रेजी अक्षर 'U' के आकार वाले इस गर्डर में दोनों ओर पर्याप्त जगह उपलब्ध रहती है, जिससे सिग्नलिंग उपकरणों की स्थापना और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं के लिए सुविधा मिलती है। यू-गर्डर का एक बड़ा लाभ यह है कि इन्हें निर्माण स्थल से दूर तैयार किया जा सकता है। इससे मौके पर लंबे समय तक शटरिंग और कंक्रीटिंग जैसी गतिविधियों की आवश्यकता कम होती है। प्रीकास्ट तकनीक के कारण गर्डर की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है।

रुनकता कास्टिंग यार्ड में तैयार होते हैं यू-गर्डर

आगरा मेट्रो के लिए यू-गर्डर का निर्माण रुनकता स्थित कास्टिंग यार्ड में प्रीकास्ट तकनीक के माध्यम से किया जाता है। यहां तैयार गर्डरों को विशेष ट्रकों के जरिए निर्माण स्थल तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद क्रेन की सहायता से उन्हें निर्धारित पिलरों के बीच स्थापित किया जाता है। इस प्रक्रिया में निर्माण स्थल पर होने वाले काम को व्यवस्थित रखने और आसपास के यातायात पर प्रभाव कम करने का प्रयास किया जाता है। खासकर उन स्थानों पर यह तकनीक उपयोगी साबित होती है, जहां सड़क पर वाहनों और पैदल यात्रियों की आवाजाही अधिक रहती है।

डबल टी और पाई गर्डर से तेजी से बन रहे मेट्रो स्टेशन

आगरा मेट्रो के एलिवेटेड स्टेशनों के निर्माण में भी पारंपरिक तरीकों के स्थान पर आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सामान्य तौर पर स्टेशन के कॉनकोर्स और अन्य हिस्सों को तैयार करने के लिए शटरिंग और साइट पर कंक्रीट डालने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके विपरीत, आगरा मेट्रो में डबल टी गर्डर और पाई गर्डर का उपयोग किया जा रहा है। डबल टी गर्डर की संरचना अंग्रेजी अक्षर 'T' के दो जुड़े हुए आकार जैसी होती है, जबकि पाई गर्डर का आकार गणितीय चिह्न 'π' जैसा दिखाई देता है। इन प्रीकास्ट संरचनाओं की सहायता से स्टेशन के विभिन्न स्तरों का निर्माण तेजी से किया जा सकता है। इस तकनीक का प्रमुख उद्देश्य निर्माण की अवधि कम करना और नीचे चलने वाले यातायात पर पड़ने वाले प्रभाव को सीमित रखना है। व्यस्त सड़कों के ऊपर एलिवेटेड मेट्रो स्टेशन तैयार करने में ऐसी तकनीक विशेष रूप से उपयोगी होती है।

प्रथम कॉरिडोर के तीन स्टेशनों के सभी क्रॉस आर्म स्थापित

आगरा मेट्रो के प्रथम कॉरिडोर के शेष एलिवेटेड हिस्से में आईएसबीटी, गुरु का ताल और सिकंदरा स्टेशन का निर्माण कार्य आगे बढ़ रहा है। इन तीनों स्टेशनों के लिए सभी 24 क्रॉस आर्म स्थापित किए जा चुके हैं। क्रॉस आर्म एलिवेटेड स्टेशन की संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसे पिलर के ऊपर स्थापित किया जाता है, जिस पर आगे कॉनकोर्स और प्लेटफॉर्म स्तर से जुड़ी संरचनाएं तैयार की जाती हैं। सभी क्रॉस आर्म का इरेक्शन पूरा होने से इन स्टेशनों के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

गुरु का ताल और सिकंदरा स्टेशन में सिंगल पिलर तकनीक

गुरु का ताल और सिकंदरा मेट्रो स्टेशन का निर्माण सिंगल पिलर तकनीक के आधार पर किया जा रहा है। इस हिस्से में सभी पियर का निर्माण पूरा हो चुका है और यू-गर्डर की कास्टिंग का काम भी पूरा किया जा चुका है। सामान्य एलिवेटेड स्टेशन निर्माण में तीन ग्रिड में पिलर तैयार किए जाते हैं। इसके बाद क्षैतिज बीम और अन्य संरचनाओं की मदद से कॉनकोर्स तथा प्लेटफॉर्म स्तर तैयार किए जाते हैं। इसके विपरीत, सिंगल पिलर तकनीक में स्टेशन की मुख्य संरचना के लिए मध्य ग्रिड में पिलर तैयार किए जाते हैं और उनके ऊपर लंबी क्रॉस आर्म स्थापित की जाती है। इसके बाद कॉनकोर्स और प्लेटफॉर्म स्तर की संरचनाओं का निर्माण किया जाता है। इस तकनीक में सड़क के किनारों पर अतिरिक्त जगह की जरूरत कम हो सकती है।

भीड़भाड़ वाले इलाकों में सिंगल पिलर तकनीक उपयोगी

आगरा जैसे शहर में, जहां प्रमुख सड़कों पर वाहनों का दबाव अधिक रहता है, वहां मेट्रो निर्माण के दौरान यातायात को सुचारु बनाए रखना बड़ी चुनौती है। सिंगल पिलर तकनीक से निर्माण के लिए अपेक्षाकृत कम जगह की आवश्यकता होती है, जिससे सड़क पर काम के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है। इस तकनीक का एक अन्य लाभ भविष्य में सड़क चौड़ीकरण की संभावनाओं से जुड़ा है। सड़क के किनारों पर अतिरिक्त पिलर नहीं होने से उपलब्ध स्थान का उपयोग अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। इसके अलावा, एकल पिलर पर आधारित स्टेशन संरचना कॉरिडोर को अलग दृश्यात्मक पहचान भी देती है।

आईएसबीटी-सिकंदरा खंड में 240 यू-गर्डर स्थापित

आगरा मेट्रो के प्रथम कॉरिडोर पर आईएसबीटी से सिकंदरा के बीच निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उपलब्ध परियोजना आंकड़ों के अनुसार, इस खंड में लगभग 272 यू-गर्डर लगाए जाने हैं। इनमें से 240 यू-गर्डर का इरेक्शन पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा, इस हिस्से में कुल 52 आई-गर्डर में से 40 स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं, 123 पियरकैप में से 117 का इरेक्शन पूरा हो गया है। ये आंकड़े एलिवेटेड हिस्से में चल रहे सिविल निर्माण की प्रगति को दर्शाते हैं। यू-गर्डर, आई-गर्डर और पियरकैप जैसी संरचनाएं एलिवेटेड मेट्रो लाइन और स्टेशनों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

29.4 किलोमीटर के नेटवर्क में 27 स्टेशन, दो कॉरिडोर पर काम

ताजनगरी में आगरा मेट्रो परियोजना के तहत कुल 29.4 किलोमीटर लंबे दो कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। इस नेटवर्क में कुल 27 स्टेशन प्रस्तावित हैं। प्रथम कॉरिडोर लगभग 14 किलोमीटर लंबा है, जो ताज ईस्ट गेट से सिकंदरा तक बनाया जा रहा है। इसमें कुल 13 स्टेशन हैं, जिनमें छह एलिवेटेड और सात भूमिगत स्टेशन शामिल हैं। इस कॉरिडोर के छह किलोमीटर लंबे प्राथमिकता खंड में मेट्रो का संचालन किया जा रहा है। परियोजना विवरण के अनुसार, आगे के पांच स्टेशनों पर यात्री सेवाओं के विस्तार की दिशा में तैयारी की जा रही है। वहीं, दूसरे कॉरिडोर का निर्माण आगरा कैंट से कालिंदी विहार के बीच किया जा रहा है। यह लगभग 16 किलोमीटर लंबा है और इसमें 14 एलिवेटेड स्टेशन बनाए जा रहे हैं।

आधुनिक निर्माण तकनीक से आगरा मेट्रो को मिलेगी गति

आगरा मेट्रो परियोजना में प्रीकास्ट यू-गर्डर, डबल टी गर्डर, पाई गर्डर और सिंगल पिलर तकनीक का इस्तेमाल निर्माण कार्य को अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। खासकर एनएच-19 जैसे व्यस्त मार्ग पर फुट ओवरब्रिज को हटाए बिना यू-गर्डर स्थापित करना यह दर्शाता है कि निर्माण के दौरान मौजूदा यातायात व्यवस्था और पैदल यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर तकनीकी विकल्प अपनाए जा रहे हैं। आईएसबीटी से सिकंदरा के बीच सिविल निर्माण की प्रगति और स्टेशन संरचनाओं के इरेक्शन के पूरा होने से प्रथम कॉरिडोर के शेष हिस्से को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे भविष्य में मेट्रो सेवाओं का विस्तार होने पर शहर के प्रमुख इलाकों के बीच आवागमन के लिए एक अतिरिक्त सार्वजनिक परिवहन विकल्प उपलब्ध हो सकेगा।