श्री रामचरितमानस के एक-एक अक्षर में जीवन को दिशा देने वाली ऊर्जा, मन शुद्ध होगा तो चरित्र शुद्ध होगा और रामकृपा स्वतः मिलेगी

श्री रामचरितमानस की प्रासंगिकता पर आयोजित गोष्ठी में कहा गया कि मानस मनुष्य के मन और चरित्र को शुद्ध कर जीवन को सही दिशा देने वाला जीवन-दर्शन है। वक्ताओं ने मानस की चौपाइयों को वर्तमान सामाजिक जीवन के लिए उपयोगी बताते हुए इसे परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताया।

Aug 26, 2026 - 18:19
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श्री रामचरितमानस के एक-एक अक्षर में जीवन को दिशा देने वाली ऊर्जा, मन शुद्ध होगा तो चरित्र शुद्ध होगा और रामकृपा स्वतः मिलेगी
खंदारी बाईपास रोड स्थित एक होटल में श्री रामचरितमानस की प्रासंगिकता विषयक विचार गोष्ठी एवं काव्यांजलि को संबोधित करते श्रीमहंत योगेश पुरी। मंच पर हैं प्रो. उमापति दीक्षित, अपर जिलाधिकारी प्रशासन आजाद भगत सिंह, संजय सिंघल, प्रो. हरिवंश पांडे, डॉ. रुचि चतुर्वेदी और पदम गौतम।

आगरा। श्री रामचरितमानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मनुष्य के मन, चरित्र, परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण का जीवन-दर्शन है। मन निर्मल होगा तो चरित्र शुद्ध होगा और मन-चरित्र की पवित्रता से प्रभु श्रीराम की कृपा प्राप्त होगी। यह विचार श्री मनःकामेश्वर मंदिर के श्रीमहंत योगेश पुरी ने खंदारी बाईपास रोड स्थित होटल विक्रम पैलेस में आयोजित विचार गोष्ठी में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मानस की प्रत्येक चौपाई और प्रत्येक अक्षर में मनुष्य को जीवन की सही दिशा देने वाली ऊर्जा निहित है।

तारक सेवा संस्था, अयोध्या शोध संस्थान एवं बयार फाउंडेशन लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास जयंती पखवाड़ा के अंतर्गत “श्री रामचरितमानस की प्रासंगिकता” विषय पर विचार गोष्ठी एवं काव्यांजलि का आयोजन किया गया। विद्वानों, संतों और साहित्यकारों ने वर्तमान सामाजिक परिवेश में रामचरितमानस की उपयोगिता और प्रासंगिकता पर विचार रखे।

दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ: कार्यक्रम का शुभारंभ अपर जिलाधिकारी प्रशासन आजाद भगत सिंह, श्रीमहंत योगेश पुरी, प्रो. उमापति दीक्षित, अशोक चौबे, बीना लवानिया एवं गीता मनीषी प्रो. हरिवंश पांडे ने दीप प्रज्वलित कर किया। अंतरराष्ट्रीय कवयित्री डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने मां सरस्वती को समर्पित काव्य प्रस्तुति “मां शारदे वरदान दे” दी। इसके बाद संतोष तिवारी ने श्रीराम स्तुति प्रस्तुत की।

मानस में जीवन का मार्गदर्शन: तारक सेवा संस्था के अध्यक्ष प्रो. उमापति दीक्षित ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास युगदृष्टा संत थे। उन्होंने सैकड़ों वर्ष पहले ही अपनी चौपाइयों के माध्यम से समाज की अनेक चुनौतियों की ओर संकेत कर दिया था। आज की पीढ़ी को माता-पिता के प्रति समर्पण, परिवार के प्रति जिम्मेदारी और रिश्तों की मर्यादा का महत्व समझाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि रघुकुल रीति सदा चली आई। प्राण जाए पर वचन न जाई॥ केवल कथा का हिस्सा नहीं, बल्कि वचन, विश्वास और मर्यादा की प्रतिष्ठा का जीवन-मंत्र है।

शबरी प्रसंग में अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का संदेश: श्रीमहंत योगेश पुरी ने कहा कि मानस के प्रसंगों को केवल कथा के रूप में नहीं, बल्कि जीवन के संदेश के रूप में देखने की जरूरत है। गंगा पार करने के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का माता सीता को पहले नाव पर चढ़ाना पति-पत्नी के बीच सम्मान, सुरक्षा और जिम्मेदारी का संदेश देता है।

उन्होंने निषादराज से श्रीराम की मित्रता को सामाजिक समरसता और एकता का प्रतीक बताया। वहीं लंका विजय के बाद विभीषण को राज्य सौंपने के प्रसंग को योग्य व्यक्ति को उसका अधिकार देने का उदाहरण बताया।

उन्होंने कहा कि “परहित सरिस धरम नहि भाई। पर पीड़ा सम नहि अधमाई॥” को यदि जीवन का आधार बना लिया जाए तो समाज की अनेक समस्याओं का समाधान संभव है।

रामराज में अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे शासन: वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ में शबरी प्रसंग को महत्वपूर्ण बताते हुए श्रीमहंत योगेश पुरी ने कहा कि प्रभु श्रीराम स्वयं शबरी की कुटिया तक पहुंचते हैं। इसका संदेश है कि रामराज की स्थापना तभी संभव है, जब शासन और राजसत्ता समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचे।

विभीषण प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति कितना ही गुणवान क्यों न हो, राष्ट्र के प्रति विश्वासघात उसे आदर्श नहीं बना सकता। राष्ट्र के प्रति निष्ठा किसी भी समाज की आधारशिला है।

मानस की चौपाइयां सिद्ध मंत्र के समान: गीता मनीषी प्रो. हरिवंश पांडे ने कहा कि श्रीरामचरितमानस की प्रत्येक चौपाई सिद्ध मंत्र के समान है। उन्होंने हनुमान चालीसा और गोस्वामी तुलसीदास की रचना हनुमान बाहुक का उल्लेख करते हुए कहा कि तुलसीदास की रचनाओं में भक्ति के साथ जीवन की गहरी साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा भी निहित है।

योगी सूर्यनाथ ने संस्कृत में काव्य पाठ प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में श्रीरामलीला में राजा दशरथ का स्वरूप निभाने वाले संजय सिंघल एवं उनके पुत्र रजत सिंघल का विशेष सम्मान किया गया। मानस पर शोध कार्य करने वाले योगीराज को भी सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन पदम गौतम ने किया। इस अवसर पर आचार्य उमाकांत पाराशर, नंद नंदन गर्ग, प्रभुदत्त उपाध्याय, आनंद राय, दीपक चौबे, रवि चौबे, डॉ. भोजराज शर्मा, वंदना पाराशर, प्रीति यादव, सपना संकल्प सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor