दयालबाग में 70 एकड़ जैविक धान की कटाई शुरू, खेतों से भंडारा ग्राउंड तक जुटे बच्चे, युवा और बुजुर्ग
आगरा। दयालबाग में 70 एकड़ क्षेत्र में उगाई गई जैविक धान की फसल की कटाई मंगलवार से शुरू हो गई। सिकंदरपुर स्थित डेढ़ गाँव कैंप के पास खेतों में धान काटने के साथ ही भंडारा ग्राउंड में उसकी झड़ाई का काम भी शुरू कर दिया गया। इस कार्य में भाई साहबान, बहनें, सुपरह्यूमेन स्कीम के बच्चे और बुजुर्ग निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अलग-अलग पालियों में भाग ले रहे हैं। बासमती समेत धान की विभिन्न किस्मों की फसल की कटाई के साथ इस बार सीधी बुवाई तकनीक से उगाए गए धान की कटाई भी की जा रही है।

खेतों में कटाई, भंडारा ग्राउंड में झड़ाई
मंगलवार सुबह पहली पाली में भाई साहबान, बहनों और सुपरह्यूमेन स्कीम के बच्चों ने सिकंदरपुर के पास खेतों में धान काटने में भाग लिया। कटे हुए धान को एकत्र कर भंडारा ग्राउंड पहुंचाया गया, जहां बालियों से धान के दाने अलग करने का काम शुरू हुआ। अगली पाली में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 60 वर्ष तक की आयु के भाई साहबान तथा उपदेश की हाजिरी वाले भाई साहबान कटाई के लिए सिकंदरपुर पहुंचे। वहीं सभी बहनें, सुपरह्यूमेन स्कीम के बच्चे और 60 वर्ष से अधिक आयु के भाई साहबान भंडारा ग्राउंड में धान की झड़ाई में जुटे। बुजुर्ग बहनों के लिए भी सेवा स्थल भंडारा ग्राउंड निर्धारित किया गया।
बच्चों से बुजुर्गों तक की भागीदारी
धान की कटाई, फसल को खेतों से एकत्र कर भंडारा ग्राउंड तक पहुंचाने और वहां झड़ाई का काम पूरे उत्साह के साथ चल रहा है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। सुबह की पाली से लेकर अगली पाली तक खेतों और भंडारा ग्राउंड में सहभागियों की सक्रियता बनी रही।
रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बजाय जैविक पद्धति
दयालबाग में 70 एकड़ क्षेत्र में धान की खेती पूरी तरह जैविक तरीके से की गई है। इस पद्धति में रासायनिक खाद और कीटनाशकों के स्थान पर जैविक खाद तथा जैविक उपायों से फसल की देखरेख की जाती है। खेती के दौरान मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और उसमें मौजूद उपयोगी जीवों के संरक्षण पर ध्यान दिया जाता है।
DSR तकनीक से भी उगाई गई धान की फसल
इस बार बासमती सहित धान की कई किस्में उगाई गई हैं। इनमें डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक से तैयार फसल भी शामिल है, जिसकी कटाई शुरू हो गई है। इस तकनीक में नर्सरी में पौधे तैयार करके उनकी रोपाई करने के बजाय धान के बीज सीधे खेत में बोए जाते हैं। इससे खेत में लगातार पानी भरे रखने की जरूरत कम हो सकती है। उचित प्रबंधन के साथ इस पद्धति से पानी और रोपाई में लगने वाले श्रम की बचत भी संभव है।