आगरा में दशहरा शोभायात्रा की समिति पर सियासी संग्राम, भाजपा-सपा गुट आमने-सामने

आगरा में विजयादशमी पर लोहामंडी से सेंट जोंस चौराहे तक निकलने वाली दशहरा शोभायात्रा की आयोजन समिति को लेकर विवाद गहरा गया है। भाजपा से जुड़े पार्षदों और क्षेत्रीय निवासियों ने डीसीपी को शिकायत देकर आरोप लगाया कि चार अक्टूबर को सामूहिक रूप से शोभायात्रा निकालने का निर्णय हुआ था, लेकिन इसके बावजूद 14 अक्टूबर को विनय अग्रवाल ने नई समिति गठित कर ली। शिकायतकर्ताओं ने बैठक रजिस्टर और पिछले आयोजनों के आय-व्यय की जांच कर पुराने निर्णय को बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि शोभायात्रा मिश्रित आबादी से गुजरती है और हजारों श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं, इसलिए विवाद का जल्द समाधान जरूरी है।

Oct 15, 2026 - 20:11
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आगरा में दशहरा शोभायात्रा की समिति पर सियासी संग्राम, भाजपा-सपा गुट आमने-सामने
घटना के बारे में जानकारी देते पार्षद शरद चौहान, हेमंत प्रजापति, राजेश प्रजापति, अमित पटेल और विक्रांत कुशवाह आदि।

चार अक्टूबर के सर्वसम्मत फैसले को दरकिनार कर नई समिति बनाने का आरोप, पार्षदों ने डीसीपी से की शिकायत, बोले—विवाद से बिगड़ सकती है शांति व्यवस्था

आगरा। विजयादशमी पर लोहामंडी से सेंट जोंस चौराहे तक निकलने वाली वर्षों पुरानी दशहरा शोभायात्रा इस बार आयोजन से पहले ही विवादों में घिर गई है। शोभायात्रा की आयोजन समिति के गठन को लेकर भाजपा से जुड़े क्षेत्रीय पार्षदों और स्थानीय लोगों ने सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि चार अक्टूबर को बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय को दरकिनार कर कुछ लोगों ने अपनी मर्जी से नई समिति का गठन कर लिया। इस मामले में पार्षदों और क्षेत्रीय निवासियों ने पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) को शिकायती पत्र देकर हस्तक्षेप की मांग की है।

समिति के गठन को लेकर भाजपा और समाजवादी पार्टी से जुड़े गुटों के बीच टकराव की स्थिति बनने का आरोप लगाया गया है। विवाद के कारण दशहरा शोभायात्रा की तैयारियों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। शिकायतकर्ता पार्षद हेमंत प्रजापति, शरद चौहान, विक्रांत कुशवाह, राजेश कुमार प्रजापति, अमित पटेल सहित क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि यह शोभायात्रा वर्षों से धार्मिक आस्था और परंपरा का प्रतीक रही है। इसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे में आयोजन समिति को लेकर पैदा हुआ विवाद समय रहते नहीं सुलझाया गया तो आयोजन की व्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं।

11 सितंबर की बैठक में बनी थी चुनाव की रूपरेखा

शिकायत के मुताबिक, आयोजन समिति को लेकर विवाद की शुरुआत 11 सितंबर को हुई बैठक से जुड़ी है। यह बैठक पार्षद शरद चौहान के निवास पर आयोजित की गई थी। इसमें रामदास कटारा, पार्षद हेमंत प्रजापति, विक्रांत कुशवाह, विनय अग्रवाल, हिमांशु शिवहरे, विकास गुप्ता, अमित बंसल, अमित सिंह पटेल समेत कई क्षेत्रीय लोग मौजूद थे। बैठक में बताया गया कि दशहरा शोभायात्रा की आयोजन समिति पंजीकृत नहीं है। इसलिए हर साल चुनाव अधिकारियों और वरिष्ठ संरक्षक मंडल की मौजूदगी में समिति का गठन किया जाता है। इसी व्यवस्था के तहत पिछले वर्ष के आय-व्यय का हिसाब प्रस्तुत करने और नई समिति के चयन के लिए चार अक्टूबर को मंदिर परिसर में बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया था।

आय-व्यय का हिसाब मांगने पर बढ़ा विवाद

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, चार अक्टूबर को मंदिर परिसर में हुई बैठक में चुनाव अधिकारी बसंत श्रीवास्तव, रामदास कटारा और मटरू सिंह मौजूद थे। बैठक में सदस्यों ने पिछले वर्ष दशहरा शोभायात्रा के आयोजन पर हुए खर्च और प्राप्त धनराशि का ब्योरा मांगा। आरोप है कि मांग के बावजूद आय-व्यय का हिसाब प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके बाद बैठक में विवाद की स्थिति बन गई। मामला बढ़ने पर चुनाव अधिकारियों ने उपस्थित सदस्यों की राय ली। शिकायत में दावा किया गया है कि सभी सदस्यों की सहमति से निर्णय लिया गया कि इस वर्ष किसी व्यक्ति को अध्यक्ष या अन्य पदाधिकारी घोषित नहीं किया जाएगा। इसके बजाय सभी कार्यकर्ताओं की देखरेख और सामूहिक सहभागिता से दशहरा शोभायात्रा निकाली जाएगी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे पहले भी समिति को लेकर विवाद की स्थिति बनने पर सामूहिक व्यवस्था के तहत शोभायात्रा का आयोजन सफलतापूर्वक कराया जा चुका है। ऐसे में चार अक्टूबर को लिया गया निर्णय सभी पक्षों की सहमति से विवाद टालने का प्रयास था।

14 अक्टूबर को नई समिति के गठन की खबर से मचा हड़कंप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चार अक्टूबर के फैसले के बाद भी 13 अक्टूबर तक मंदिर परिसर में लगातार बैठकें हो रही थीं। इन बैठकों की जानकारी व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से सदस्यों को दी जा रही थी। इस दौरान सामूहिक रूप से शोभायात्रा निकालने की व्यवस्था पर चर्चा चल रही थी। इसी बीच 14 अक्टूबर को समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली कि विनय अग्रवाल ने स्वयं को अध्यक्ष घोषित करते हुए नई आयोजन समिति का गठन कर लिया है। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद समिति से जुड़े लोगों और क्षेत्रीय निवासियों में नाराजगी फैलने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने इस गठन को चार अक्टूबर के कथित सर्वसम्मत निर्णय के विपरीत बताते हुए सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सामूहिक व्यवस्था से आयोजन कराने के फैसले के बावजूद अलग समिति बनाकर विवाद को फिर से हवा दी गई है।

राजनीतिक स्वार्थ के लिए समिति बनाने का आरोप

शिकायत में विनय अग्रवाल पर राजनीतिक उद्देश्य से समिति गठित करने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि विनय अग्रवाल समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ चुके हैं और उनके इस कदम के पीछे निजी तथा राजनीतिक हित हो सकते हैं। हालांकि, ये आरोप शिकायतकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। शिकायत के अनुसार, चुनाव अधिकारियों ने भी व्हाट्सएप ग्रुप पर नई समिति के गठन को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। पार्षदों और स्थानीय लोगों का कहना है कि जब बैठक में सभी की सहमति से इस वर्ष पदाधिकारी नहीं बनाने का फैसला लिया गया था, तो उसके बाद नई समिति गठित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

डीसीपी से जांच और पुराने फैसले को बहाल करने की मांग

भाजपा से जुड़े क्षेत्रीय पार्षदों और शिकायतकर्ताओं ने पुलिस उपायुक्त को पत्र देकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने बैठक के रजिस्टर, चार अक्टूबर की बैठक में लिए गए निर्णय और पिछले आयोजनों के आय-व्यय के रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग रखी है। शिकायतकर्ताओं की प्रमुख मांग है कि चार अक्टूबर को लिए गए सर्वसम्मत निर्णय को बहाल किया जाए और शोभायात्रा का आयोजन सामूहिक व्यवस्था के तहत कराया जाए। उनका कहना है कि समिति के गठन को लेकर पारदर्शिता जरूरी है, ताकि किसी भी पक्ष को मनमानी या उपेक्षा की शिकायत का मौका न मिले।

मिश्रित आबादी से गुजरती है शोभायात्रा, शांति व्यवस्था की चिंता

शिकायतकर्ताओं ने शोभायात्रा के मार्ग और उसमें शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मामले को संवेदनशील बताया है। उनके मुताबिक, लोहामंडी से सेंट जोंस चौराहे तक निकलने वाली यह शोभायात्रा मिश्रित आबादी वाले क्षेत्र से गुजरती है और इसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे में आयोजन समिति को लेकर चल रहा विवाद धार्मिक आयोजन की तैयारियों के साथ-साथ कानून-व्यवस्था के लिहाज से भी चिंता का विषय बन सकता है। पार्षदों ने प्रशासन से समय रहते हस्तक्षेप कर विवाद का समाधान कराने की मांग की है, ताकि विजयादशमी का आयोजन आपसी समन्वय, शांतिपूर्ण माहौल और परंपरागत तरीके से संपन्न हो सके। फिलहाल, शिकायतकर्ताओं की मांग है कि समिति के गठन से जुड़े सभी दस्तावेजों और बैठकों के निर्णयों की जांच कर स्थिति स्पष्ट की जाए। विवाद का समाधान किस स्तर पर और किस प्रक्रिया से होगा, इस पर अब प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नजरें टिकी हैं।