बरेली में सात साल बाद होगी सारंग की गर्जना, 15 और 17 अक्टूबर को आसमान में दिखेंगे भारतीय वायुसेना के हैरतअंगेज करतब
-आरके सिंह- बरेली। भारतीय वायुसेना की सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम सात साल बाद एक बार फिर बरेली के आसमान में अपने हैरतअंगेज हवाई करतब दिखाने जा रही है। त्रिशूल एयर बेस पर 15 और 17 अक्टूबर को होने वाले इस प्रदर्शन में स्वदेशी ध्रुव हेलीकॉप्टरों की फुर्ती, पायलटों के असाधारण उड़ान कौशल और आपसी समन्वय का प्रदर्शन होगा।
ग्रुप कैप्टन अभिजीत कुमार के नेतृत्व में पहुंची सारंग टीम का उद्देश्य भारतीय वायुसेना की पेशेवर दक्षता और स्वदेशी विमानन तकनीक की क्षमता प्रदर्शित करने के साथ युवाओं को वायुसेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करना भी है। इस शो को देखने के लिए बरेली के स्कूल-कॉलेजों के छात्र-छात्राओं के भी त्रिशूल एयर बेस पहुंचने की तैयारी है।
2005 में हुआ सारंग टीम का गठन
ग्रुप कैप्टन अभिजीत कुमार ने बताया कि सारंग टीम का गठन वर्ष 2005 में स्वदेशी उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) ध्रुव की क्षमताओं को प्रदर्शित करने और भारतीय वायुसेना के पेशेवर कौशल को सामने लाने के उद्देश्य से किया गया था। टीम की स्थापना वर्ष 2003 में हुई थी और फरवरी 2004 में सिंगापुर के एशियन एयरोस्पेस एयर शो में इसने पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन किया था।
सारंग टीम अपने विशिष्ट हवाई करतबों और हेलीकॉप्टरों की निकट संरचना में उड़ान के लिए जानी जाती है। सामान्यतः टीम पांच हेलीकॉप्टरों के साथ प्रदर्शन करती है, हालांकि किसी आयोजन में हेलीकॉप्टरों की संख्या प्रदर्शन योजना के अनुसार अलग हो सकती है।
स्वदेशी ध्रुव हेलीकॉप्टरों की ताकत का प्रदर्शन
सारंग टीम के हेलीकॉप्टर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा विकसित स्वदेशी ध्रुव एएलएच पर आधारित हैं। यह बहुउद्देश्यीय हेलीकॉप्टर है, जिसका इस्तेमाल विभिन्न सैन्य अभियानों सहित अन्य आवश्यकताओं में किया जाता है।
टीम के हवाई प्रदर्शन का प्रमुख उद्देश्य हेलीकॉप्टरों की तकनीकी क्षमता, फुर्ती और गतिशीलता को प्रदर्शित करना है। इसके साथ ही पायलटों के उड़ान कौशल, अनुशासन और आपसी तालमेल का परिचय देना तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की विमानन क्षमता और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण को पहचान दिलाना भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
सारंग टीम का प्रदर्शन युवाओं को भारतीय वायुसेना में करियर बनाने के लिए प्रेरित करने का माध्यम भी है। हवाई करतबों के जरिए युवाओं को वायुसेना के अनुशासन, तकनीकी दक्षता और चुनौतीपूर्ण कार्यशैली से परिचित कराया जाता है।
डॉल्फिन लीप से सारंग स्प्लिट तक रोमांचक करतब
सारंग टीम के प्रदर्शन में ‘डॉल्फिन लीप’, ‘स्पॉट स्टॉल टर्न’, डायमंड फॉर्मेशन, लाइन एस्टर्न, स्टार मैनूवर और सारंग स्प्लिट जैसे रोमांचक करतब शामिल हो सकते हैं। इन करतबों के दौरान हेलीकॉप्टरों की गति, दिशा और आपसी दूरी का सटीक तालमेल जरूरी होता है।
हेलीकॉप्टरों को बेहद कम दूरी पर एक निर्धारित संरचना में उड़ाना पायलटों से उच्च स्तर के नियंत्रण, अनुशासन और सतर्कता की मांग करता है। प्रत्येक करतब के लिए पहले से निर्धारित उड़ान योजना और सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है।
सारंग नाम संस्कृत के उस शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ मोर होता है। हेलीकॉप्टरों पर चमकीले रंगों और मोर की आकृति का इस्तेमाल टीम को विशिष्ट पहचान देता है। यही रंगीन स्वरूप और सधे हुए हवाई करतब दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनते हैं।
अंतरराष्ट्रीय एयर शो में भारत का प्रतिनिधित्व
सारंग टीम ने विभिन्न वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय एयर शो और विमानन समारोहों में भारतीय वायुसेना का प्रतिनिधित्व किया है। इनमें सिंगापुर एयर शो, दुबई एयर शो, जर्मनी के बर्लिन में आयोजित आईएलए एयर शो, ब्रिटेन के प्रमुख एयर शो, बहरीन अंतरराष्ट्रीय एयर शो और रूस, श्रीलंका, मॉरीशस तथा मिस्र में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम शामिल हैं।
टीम ने वर्ष 2024 और 2026 के सिंगापुर एयर शो में भी भाग लिया। जर्मनी में आयोजित आईएलए एयर शो में उसे निकट संरचना में उड़ान भरने वाली एरोबेटिक टीम के रूप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। ब्रिटेन के एयर शो में भाग लेने के दौरान टीम के हेलीकॉप्टरों ने जर्मनी से ब्रिटेन तक इंग्लिश चैनल पार कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।
सितंबर 2026 में टीम ने मिस्र के एल अलामीन अंतरराष्ट्रीय एयर शो में भी हिस्सा लिया। इन आयोजनों के माध्यम से सारंग टीम विदेशी वायुसेनाओं, विमानन विशेषज्ञों और रक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ पेशेवर संपर्क बढ़ाने तथा भारत की विमानन क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में योगदान देती है।
आपदा राहत अभियानों में भी निभाई अहम भूमिका
ग्रुप कैप्टन अभिजीत कुमार ने बताया कि सारंग टीम की भूमिका केवल हवाई प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। टीम ने मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में भी योगदान दिया है। वर्ष 2013 में उत्तराखंड में राहत अभियान, वर्ष 2017 में केरल में चक्रवात ओखी के दौरान सहायता और वर्ष 2018 में केरल में बाढ़ राहत अभियान इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
इससे टीम की बहुआयामी भूमिका सामने आती है। एक ओर वह हवाई प्रदर्शन के माध्यम से भारतीय वायुसेना की दक्षता और स्वदेशी तकनीक का परिचय देती है, वहीं दूसरी ओर जरूरत के समय राहत एवं बचाव कार्यों में भी योगदान करती है।
25 सदस्यीय टीम में 10 पायलट
सारंग टीम के अधिकारियों ने बरेली में आयोजित होने वाले प्रदर्शन और टीम की कार्यप्रणाली की जानकारी दी। टीम में कुल 25 सदस्य हैं। पांच हेलीकॉप्टरों के प्रदर्शन के लिए 10 पायलट शामिल होंगे।
टीम का नेतृत्व ग्रुप कैप्टन अभिजीत कुमार कर रहे हैं। विंग कमांडर प्रियंशु वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी हैं, जबकि स्क्वाड्रन लीडर अखिल और स्क्वाड्रन लीडर गोकुल पायलट के रूप में टीम में शामिल हैं। फ्लाइट लेफ्टिनेंट अमन ढाका ने भी टीम के अधिकारियों की भूमिकाओं और प्रदर्शन से जुड़ी जानकारी साझा की।
टीम की सदस्य अंकिता ने बताया कि 15 और 17 अक्टूबर को होने वाले सारंग शो को देखने के लिए बरेली के स्कूल-कॉलेजों के छात्र-छात्राएं त्रिशूल एयर बेस पहुंचेंगे। इस प्रदर्शन के जरिए युवाओं को भारतीय वायुसेना की कार्यशैली, तकनीकी दक्षता और उसमें करियर बनाने के अवसरों से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा।