ट्रेनिंग में ही रिश्वत का ‘ककहरा’ सीख गया था दरोगा, आगरा में ही दो साल के भीतर दो बार छात्रों को बनाया शिकार
आगरा के फतेहाबाद थाने के दरोगा धीरेंद्र यादव पर 30 हजार रुपये रिश्वत मांगने का ऑडियो वायरल होने के बाद निलंबन की कार्रवाई हुई है। इससे पहले वर्ष 2025 में एत्मादुद्दौला थाने में अंडर ट्रेनिंग के दौरान भी इसी दरोगा पर एक छात्र से मोटरसाइकिल छोड़ने के लिए 10 हजार रुपये लेने का आरोप लगा था और उसे निलंबित किया गया था।
-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। फतेहाबाद थाने में तैनात दरोगा धीरेंद्र यादव का 30 हजार रुपये रिश्वत मांगने का ऑडियो वायरल होने के बाद निलंबन की कार्रवाई हुई है। लेकिन दरोगा पर भ्रष्टाचार का यह पहला आरोप नहीं है। वर्ष 2025 में एत्मादुद्दौला थाने में अंडर ट्रेनिंग के दौरान भी उस पर एक छात्र से मोटरसाइकिल छोड़ने के नाम पर 10 हजार रुपये लेने का आरोप लगा था। उस मामले में तत्कालीन डीसीपी ने उसे निलंबित किया था। अब दो साल के भीतर दोबारा रिश्वत मांगने के आरोप में कार्रवाई होने से पुलिस विभाग में दरोगा की कार्यशैली चर्चा का विषय बनी हुई है।
30 हजार रुपये मांगने का ऑडियो वायरल
सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो में दरोगा धीरेंद्र यादव एक छात्र से 30 हजार रुपये की मांग करता सुनाई दे रहा है। बातचीत में छात्र उससे पूछता है कि 30 हजार रुपये केवल उसके लिए हैं या सभी लोगों के नाम निकालने के लिए। इस पर दरोगा कहता है कि उसने सभी का ठेका थोड़े ही ले रखा है। छात्र बताता है कि उसके साथ दो और लोग भी हैं और वह उनसे भी बात कर लेगा। इस पर दरोगा उससे बात करने को कहता है और चेतावनी देता है कि ऐसा नहीं हुआ तो शाम को मुकदमा दर्ज हो जाएगा। वह छात्र को एफआईआर की कॉपी भेजने की बात भी कहता है।
ऑडियो वायरल होने के बाद मामला पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा और दरोगा के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। प्रकरण की जांच एसीपी फतेहाबाद को सौंपी गई है।
ट्रेनिंग में छात्र से 10 हजार लेने का आरोप
दरोगा धीरेंद्र यादव के खिलाफ इससे पहले भी रिश्वत लेने का आरोप लग चुका है। वर्ष 2025 में जब वह एत्मादुद्दौला थाने में अंडर ट्रेनिंग था, तब हेलमेट और आवश्यक कागजात न होने के कारण एक छात्र की मोटरसाइकिल पुलिस ने पकड़ ली थी। छात्र ने शिकायत की थी कि उसकी मोटरसाइकिल करीब चार दिन तक थाने में रखी गई।
आरोप था कि मोटरसाइकिल छोड़ने के लिए दरोगा धीरेंद्र यादव ने छात्र से 10 हजार रुपये लिए थे। शिकायत के बाद तत्कालीन डीसीपी ने मामले में कार्रवाई करते हुए धीरेंद्र यादव को निलंबित कर दिया था। बाद में बहाली के बाद उसकी तैनाती पूर्वी जोन में कर दी गई।
दो साल में दो बार छात्र ही निशाने पर
दरोगा के खिलाफ सामने आए दोनों मामलों में एक समानता यह है कि दोनों बार कथित तौर पर छात्र ही रिश्वत की मांग के शिकार बने। वर्ष 2025 में ट्रेनिंग के दौरान मोटरसाइकिल छोड़ने के लिए 10 हजार रुपये लेने का आरोप लगा और अब फतेहाबाद में 30 हजार रुपये मांगने का ऑडियो सामने आया है।
लगातार दूसरी बार रिश्वत मांगने के आरोप में कार्रवाई होने से पुलिस विभाग में भी दरोगा की कार्यशैली को लेकर चर्चा है। हालांकि वर्तमान मामले में वायरल ऑडियो की जांच और एसीपी फतेहाबाद की जांच रिपोर्ट के बाद ही आरोपों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
निलंबन के बाद बहाली पर भी सवाल
इस पूरे मामले ने उन पुलिसकर्मियों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन पर पहले रिश्वतखोरी के आरोप लग चुके हैं। विभागीय स्तर पर चर्चा है कि ऐसे कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिश्वत के आरोप प्रथम दृष्ट्या सही पाए जाने के बाद निलंबन अथवा लाइन हाजिर जैसी कार्रवाई की गई, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें बहाल कर दिया गया।
इतना ही नहीं, चर्चा यह भी है कि इनमें से कुछ पुलिसकर्मी वर्तमान में थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर तैनात हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पुलिस अधिकारी सार्वजनिक रूप से यह कहते हैं कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे पुलिसकर्मियों को थाना या चौकी की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी, तो फिर ऐसे मामलों में कार्रवाई के बाद उन्हें दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां कैसे मिल जाती हैं?
दागी पुलिसकर्मियों पर मेहरबानी क्यों?
दरोगा धीरेंद्र यादव के मामले ने एक बार फिर पुलिस विभाग की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ही पुलिसकर्मी के खिलाफ दो अलग-अलग समय में रिश्वत लेने के आरोप सामने आने के बाद यह भी जांच का विषय है कि पिछली कार्रवाई के बाद उसकी कार्यशैली में सुधार क्यों नहीं आया।
अब एसीपी फतेहाबाद की जांच से यह स्पष्ट होगा कि वायरल ऑडियो में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। साथ ही, पुलिस विभाग के सामने यह चुनौती भी है कि भ्रष्टाचार के आरोपों में कार्रवाई झेल चुके पुलिसकर्मियों की तैनाती को लेकर घोषित नीति का वास्तव में कितना पालन किया जा रहा है।