अग्रवाल महासभा की सत्ता पर सस्पेंस खत्म, नितेश अग्रवाल की समिति बरकरार
आगरा में अग्रवाल महासभा की प्रबंध समिति को लेकर चल रहे विवाद में अध्यक्ष नितेश अग्रवाल के नेतृत्व वाली वर्तमान समिति को राहत मिली है। वर्ष 2026-2028 के निर्वाचन को रद्द करने और समिति को कालातीत घोषित करने के लिए 43 लोगों ने शिकायत की थी। शिकायतकर्ताओं ने वैध सदस्यता सूची के आधार पर चुनाव नहीं कराने का आरोप लगाया था। रजिस्ट्रार सोसायटी ने समानांतर दावा पत्रावली उपलब्ध नहीं होने के आधार पर उनकी मांग स्वीकार नहीं की और वर्तमान प्रबंध समिति को कार्यभार संभालने का आदेश दिया। नितेश अग्रवाल ने संस्था के संविधान में संशोधन, पुराने सदस्यों की बहाली और सदस्यता अभियान चलाकर संगठन को मजबूत बनाने की बात कही है।
रजिस्ट्रार सोसायटी ने समानांतर दावा पत्रावली उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर शिकायतकर्ताओं की मांग ठुकराई, वर्तमान समिति ही संभालेगी कार्यभार, संविधान में संशोधन और सदस्यता विस्तार की तैयारी
आगरा। अग्रवाल महासभा की प्रबंध समिति को लेकर चल रहे विवाद में वर्तमान अध्यक्ष नितेश अग्रवाल के नेतृत्व वाली समिति को राहत मिली है। फर्म, सोसायटी एवं चिट्स के रजिस्ट्रार ने वर्ष 2026-2028 के निर्वाचन को रद्द करने और वर्तमान प्रबंध समिति को कालातीत घोषित करने की मांग स्वीकार नहीं की है। विभागीय जांच के बाद समानांतर दावा पत्रावली उपलब्ध नहीं होने के आधार पर शिकायतकर्ताओं की मांग खारिज करते हुए संस्था का नवीनीकरण स्वीकार किया गया और वर्तमान प्रबंध समिति को ही कार्यभार संभालने का आदेश दिया गया है।
अग्रवाल महासभा के अध्यक्ष नितेश अग्रवाल ने यह जानकारी देते हुए कहा कि वर्तमान प्रबंध समिति संस्था के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने और संगठन को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि संस्था में किसी भी तरह के विवाद से बचने, निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और सदस्यों के बीच आपसी समन्वय बढ़ाने के लिए संविधान में संशोधन की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
43 लोगों ने निर्वाचन प्रक्रिया पर उठाए थे सवाल
वर्ष 2026-2028 के लिए संपन्न हुए अग्रवाल महासभा के चुनाव को लेकर 43 लोगों के संयुक्त हस्ताक्षर से शिकायत की गई थी। शिकायत में निर्वाचन प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा गया था कि चुनाव वैध सदस्यता सूची के आधार पर नहीं कराया गया। शिकायतकर्ताओं ने निर्वाचन को निरस्त करने, वर्तमान कार्यकारिणी को शून्य घोषित करने और नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की थी। शिकायत करने वालों में विवेक गर्ग, आशीष गर्ग, अजय कुमार गर्ग, जगदीश प्रसाद गोयल और कुलवंत सिंह सहित अन्य लोग शामिल थे। शिकायत में आशीष गर्ग को कार्यकारिणी सदस्य का प्रत्याशी, अजय कुमार गर्ग को संगठन मंत्री का प्रत्याशी और जगदीश प्रसाद गोयल को मंत्री पद का प्रत्याशी बताया गया था। शिकायतकर्ताओं ने निर्वाचन की वैधता पर सवाल उठाते हुए संबंधित विभाग से मामले की जांच कराने और संस्था की प्रबंध समिति के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की थी।
साक्ष्य मांगे, लेकिन मांग स्वीकार नहीं हुई
मामले में 30 जून 2026 को सोसायटी की ओर से शिकायतकर्ताओं से कथित अनियमितताओं के साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा गया था। इसके लिए 17 जुलाई 2026 तक का समय निर्धारित किया गया था। विभागीय स्तर पर मामले की जांच के बाद शिकायतकर्ताओं की ओर से की गई मांग स्वीकार नहीं की गई। रजिस्ट्रार सोसायटी ने समानांतर दावा पत्रावली उपलब्ध नहीं होने का आधार बताते हुए वर्तमान प्रबंध समिति को कालातीत घोषित करने से इन्कार कर दिया। साथ ही, संस्था का नवीनीकरण स्वीकार करते हुए वर्तमान समिति को कार्यभार संभालने का आदेश दिया गया। इस निर्णय के बाद नितेश अग्रवाल के नेतृत्व वाली वर्तमान प्रबंध समिति के कामकाज जारी रखने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, निर्वाचन संबंधी विवाद में विभागीय आदेश का दायरा उपलब्ध तथ्यों और उसमें दर्ज आधारों तक ही सीमित है।
‘निजी मतभेदों के कारण संस्था का नुकसान नहीं होना चाहिए’
अग्रवाल महासभा के अध्यक्ष नितेश अग्रवाल ने कहा कि संस्था को सुचारू रूप से चलाना और समाज को एकजुट रखना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी संस्था को कालातीत घोषित किया गया था। उनके अनुसार, कुछ लोग निजी स्वार्थों और आपसी मतभेदों के चलते निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं, जिससे संस्था के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। नितेश अग्रवाल ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने 9 अक्टूबर 2026 को थाना हरीपर्वत में प्रार्थना पत्र देकर 11 अक्टूबर को आयोजित अग्रसेन जयंती कार्यक्रम को रुकवाने का प्रयास किया था। उन्होंने इसे समाज और संगठन के हितों के विपरीत बताया। उन्होंने कहा कि संस्था के कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों को विवादों से दूर रखते हुए समाजहित में काम करने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि आपसी मतभेदों का समाधान संवाद और निर्धारित प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए, ताकि संस्था की गतिविधियां प्रभावित न हों।
संविधान में संशोधन कर निर्वाचन प्रक्रिया को मजबूत करने की तैयारी
वर्तमान प्रबंध समिति को कार्यभार संभालने का आदेश मिलने के बाद नितेश अग्रवाल ने संस्था के संविधान में संशोधन करने की बात कही। उन्होंने कहा कि संविधान को अधिक स्पष्ट और मजबूत बनाया जाएगा, जिससे निर्वाचन प्रक्रिया, सदस्यता और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर भविष्य में विवाद की गुंजाइश कम हो। उन्होंने कहा कि संस्था के नियम इस प्रकार व्यवस्थित किए जाने चाहिए कि किसी भी सदस्य को आपत्ति होने पर उसके समाधान के लिए स्पष्ट प्रक्रिया उपलब्ध हो। इससे व्यक्तिगत मतभेदों के कारण संस्था के कामकाज में बाधा उत्पन्न होने की आशंका कम की जा सकेगी। नितेश अग्रवाल के मुताबिक, संगठन को मजबूत बनाने के लिए पुराने सदस्यों को बहाल करने के भी हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। इसके साथ ही सदस्यता अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों को संस्था से जोड़ने की योजना है। उन्होंने कहा कि मजबूत संगठन और स्पष्ट नियमों के माध्यम से अग्रवाल महासभा की गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
समिति के समर्थन में वरिष्ठ सदस्यों ने दी शुभकामनाएं
वर्तमान प्रबंध समिति को कार्यभार संभालने का आदेश मिलने के बाद संस्था से जुड़े कई वरिष्ठ लोगों ने नितेश अग्रवाल और उनकी टीम को शुभकामनाएं दीं। इनमें पूर्व विधायक महेश गोयल, फूलचंद्र बंसल, एडवोकेट महेंद्र बंसल, जीवनराम मित्तल, अशोक अग्रवाल (अंबाह वाले), पूर्व अध्यक्ष कामता प्रसाद, रामरतन मित्तल, भगवान दास बंसल, मुरारीलाल अग्रवाल और सीताराम अग्रवाल सहित अन्य लोग शामिल हैं। नितेश अग्रवाल ने कहा कि वरिष्ठजनों के सहयोग और मार्गदर्शन से संस्था को संगठित करने तथा समाजहित के कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि वर्तमान प्रबंध समिति सभी सदस्यों को साथ लेकर संस्था की गतिविधियों को आगे बढ़ाएगी।
अब संगठन को मजबूत बनाने पर रहेगा जोर
रजिस्ट्रार सोसायटी के निर्णय के बाद अग्रवाल महासभा की वर्तमान प्रबंध समिति ने संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने की तैयारी शुरू करने की बात कही है। समिति की प्राथमिकताओं में संविधान में संशोधन, पुराने सदस्यों की बहाली के प्रयास, सदस्यता विस्तार और संस्था के कामकाज में बेहतर समन्वय स्थापित करना शामिल है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित संवैधानिक बदलावों और सदस्यता अभियान के माध्यम से संस्था में आपसी मतभेदों को कम करने तथा निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में कितनी सफलता मिलती है। फिलहाल, विभागीय आदेश के अनुसार नितेश अग्रवाल के नेतृत्व वाली वर्तमान प्रबंध समिति ही अग्रवाल महासभा का कार्यभार संभालेगी।