सरसों उत्पादन 40 लाख मीट्रिक टन करने का लक्ष्य, किसानों को मिलेगा मुफ्त बीज
आगरा में आयोजित राज्य स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने उत्तर प्रदेश में सरसों उत्पादन 40 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचाने और तीन वर्षों में फसल सघनता 220 प्रतिशत करने का लक्ष्य बताया। उन्होंने दलहन-तिलहन की खेती, गुणवत्तापूर्ण बीज, संतुलित उर्वरक उपयोग, पशुपालन और वैज्ञानिक कृषि अनुसंधान को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
आगरा में रबी उत्पादकता गोष्ठी में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने दलहन-तिलहन की खेती बढ़ाने और फसल विविधीकरण पर दिया जोर, अगले तीन वर्षों में फसल सघनता 220% करने का लक्ष्य
आगरा। उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रदेश में सरसों का उत्पादन बढ़ाकर 40 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचाने का लक्ष्य घोषित किया। उन्होंने किसानों से दलहन और तिलहन की खेती बढ़ाने, फसल विविधीकरण अपनाने तथा संतुलित उर्वरक उपयोग करने की अपील की। बुधवार को मंडलायुक्त सभागार में आगरा, अलीगढ़ और बरेली मंडल की राज्य स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी-2026 आयोजित की गई।
कृषि मंत्री ने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है। किसानों को उत्पादन बढ़ाने के साथ खेती की लागत कम करने और बाजार की मांग के अनुसार फसलों का चयन करने पर ध्यान देना चाहिए। प्रदेश सरकार किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक, सिंचाई सुविधाएं और कृषि योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है।
दलहन-तिलहन की खेती पर जोर
शाही ने कहा कि खाद्य तेलों और दलहन की मांग पूरी करने के लिए देश को आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी और दलहनी फसलों का उत्पादन बढ़ाकर इस निर्भरता को कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सरसों का उत्पादन करीब 10 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 35 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा है। अब इसे 40 लाख मीट्रिक टन करने का लक्ष्य है। इसके लिए किसानों को निःशुल्क बीज सहित प्रोत्साहन देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने आलू की खेती करने वाले किसानों से भी बाजार की मांग और कीमतों में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक फसलों पर विचार करने को कहा। साथ ही गेहूं, जौ, चना और मसूर के न्यूनतम समर्थन मूल्य तथा सरकारी खरीद की जानकारी किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
तीन साल में फसल सघनता 220 प्रतिशत करने का लक्ष्य
कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश में इस वर्ष करीब 12 लाख क्विंटल बीज वितरण की योजना है। किसानों को बीज उत्पादक बनाने के लिए लखनऊ में चौधरी चरण सिंह के नाम पर सीड पार्क विकसित किया जा रहा है। अगले तीन वर्षों में फसल सघनता 220 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि कृषि भूमि का अधिक प्रभावी उपयोग हो सके।
उन्होंने किसानों से मिट्टी की जरूरत के अनुसार डीएपी, एनपीके और यूरिया का इस्तेमाल करने तथा जैविक खाद और कंपोस्ट को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और वैज्ञानिक खेती अपनाकर उत्पादन लागत घटाई जा सकती है।
पशुपालन और कृषि अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा
शाही ने खेती के साथ पशुपालन, डेयरी और दुग्ध प्रसंस्करण को किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि कृषि आधारित उद्यम ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। उन्होंने वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय परिसर और आगरा में अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के दक्षिण एशियाई परिसर का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि अनुसंधान को किसानों तक पहुंचाना जरूरी है। इससे नई किस्मों, बेहतर उत्पादन और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा मिलेगा।
गोष्ठी से पहले कृषि मंत्री ने प्रमुख सचिव कृषि एमके शन्मुगा सुन्दरम के साथ कृषि मेले की स्टालों का निरीक्षण किया। कार्यक्रम में किसानों को कृषि यंत्रों की चाबियां और प्रशस्ति पत्र भी वितरित किए गए। इस दौरान प्रमुख सचिव कृषि एमके शन्मुगा सुन्दरम, कृषि निदेशक त्र्यंबक मणि त्रिपाठी, मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप, जिलाधिकारी मनीष बंसल सहित तीनों मंडलों के कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारी और किसान मौजूद रहे।