ओवरथिंकिंग, ब्रेकअप और करियर का तनाव घेर रहा युवाओं को, आगरा कॉलेज में विशेषज्ञों ने बताए बचाव के तरीके

आगरा। ओवरथिंकिंग, प्रेम संबंधों में तनाव, ब्रेकअप, प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं और करियर की चिंता युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। आगरा कॉलेज में आयोजित मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों के दौरान विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों के सामने अपनी व्यक्तिगत और शैक्षणिक समस्याएं खुलकर रखीं। विशेषज्ञों ने तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच, आत्मसम्मान और भावनात्मक संतुलन के व्यावहारिक उपाय बताते हुए विद्यार्थियों को परिस्थितियों का सामना आत्मविश्वास के साथ करने के लिए प्रेरित किया।

Oct 15, 2026 - 20:55
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ओवरथिंकिंग, ब्रेकअप और करियर का तनाव घेर रहा युवाओं को, आगरा कॉलेज में विशेषज्ञों ने बताए बचाव के तरीके
आगरा कॉलेज में आयोजित मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम की एक झलक। 

आगरा कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग, स्टूडेंट काउंसलिंग सपोर्ट सेंटर तथा सुसाइड प्रीवेंशन सेल के संयुक्त तत्वावधान में चल रही सात दिवसीय मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत 14 और 15 अक्टूबर को व्याख्यान एवं कार्यशाला आयोजित की गई। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना, उनकी समस्याओं को समझना और उन्हें तनाव से निपटने के प्रभावी तरीके बताना था।

स्वीकार्यता और सकारात्मक सोच से मजबूत होगा मानसिक स्वास्थ्य

14 अक्टूबर को प्रोफेसर पूनम चांद के संयोजन में आयोजित व्याख्यान में मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। प्रोफेसर पूनम चांद ने कहा कि जीवन में उपलब्ध संसाधनों और वर्तमान परिस्थितियों को स्वीकार करना मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है। वास्तविक परिस्थितियों को सहजता से स्वीकार करने की क्षमता व्यक्ति को चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना करने में मदद करती है।

प्रोफेसर दीपाली सिंह ने प्रेरणा के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए सोशल मीडिया के कारण उत्पन्न होने वाले तनाव के प्रति विद्यार्थियों को सचेत किया। उन्होंने संतुलित और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। डॉ. रवि शंकर सिंह ने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध को स्पष्ट करते हुए दोनों के प्रति समान रूप से सजग रहने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अरविंद गुप्ता ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रवि शंकर सिंह ने प्रस्तुत किया।

करियर से लेकर पारिवारिक रिश्तों तक की समस्याएं आईं सामने

15 अक्टूबर को डॉ. अरविंद गुप्ता के संयोजन में आयोजित कार्यशाला में विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं खुलकर साझा करने का अवसर दिया गया। स्टूडेंट काउंसलिंग सपोर्ट सेंटर और सुसाइड प्रीवेंशन सेल के सदस्यों के साथ संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने करियर संबंधी चिंताओं, ओवरथिंकिंग, प्रेम संबंधों में तनाव, प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी और माता-पिता तथा भाई-बहनों के साथ संबंधों में आने वाली कठिनाइयों पर सवाल पूछे।

विद्यार्थियों के संवाद में माता-पिता के साथ वैचारिक मतभेद का मुद्दा विशेष रूप से उभरकर सामने आया। विशेषज्ञों ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और व्यावहारिक सुझाव दिए। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐसा सहयोगपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना था, जिसमें वे बिना झिझक अपनी भावनाओं और परेशानियों को व्यक्त कर सकें।

ओवरथिंकिंग से बचने के लिए बदलें प्रतिक्रिया का तरीका

प्रोफेसर पूनम चांद ने ओवरथिंकिंग की समस्या पर चर्चा करते हुए कहा कि अनावश्यक विचारों को जबरदस्ती रोकने के बजाय उनके प्रति अपने दृष्टिकोण और प्रतिक्रिया में बदलाव करना अधिक प्रभावी हो सकता है। उन्होंने श्वास संबंधी तकनीकों, ध्यान और वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करने के तरीकों की जानकारी दी। इन प्रक्रियाओं के नियमित अभ्यास से मानसिक शांति और आत्मनियंत्रण विकसित करने में मदद मिल सकती है।

प्रोफेसर अंशु चौहान ने विद्यार्थियों को सोशल मीडिया की आभासी दुनिया के बजाय वास्तविक जीवन के संबंधों, मित्रों और पारिवारिक संवाद को अधिक महत्व देने की सलाह दी। उन्होंने सकारात्मक प्रेरणा को लक्ष्य प्राप्त करने और कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

दूसरों की राय के बजाय अपनी क्षमताओं पर दें ध्यान

प्रोफेसर दीपाली सिंह ने दूसरों की राय को लेकर उत्पन्न होने वाली चिंता पर चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को अपने प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि दूसरे लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं, इस चिंता में अनावश्यक तनाव लेने के बजाय विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं, कार्यों और व्यक्तिगत विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

उन्होंने आत्मविश्वास और आत्मसम्मान को मानसिक मजबूती के महत्वपूर्ण आधार बताते हुए विद्यार्थियों को अपनी पहचान और क्षमताओं को समझने की सलाह दी।

ब्रेकअप को असफलता नहीं, खुद को समझने का अवसर मानें

डॉ. अरविंद गुप्ता ने प्रेम संबंधों में तनाव और ब्रेकअप से जुड़े सवालों पर विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और व्यक्तिगत पहचान के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिन संबंधों में व्यक्ति की भावनाओं और इच्छाओं का सम्मान नहीं होता, उनसे उचित भावनात्मक दूरी बनाना जरूरी है।

डॉ. गुप्ता ने विद्यार्थियों को समझाया कि किसी संबंध का समाप्त होना जीवन की असफलता नहीं है। इसे स्वयं को समझने, अपनी क्षमताओं को विकसित करने और स्वतंत्र पहचान स्थापित करने के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। उन्होंने प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं और करियर संबंधी चिंताओं पर भी विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर दिए। साथ ही परिस्थितियों के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित करने, अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखने और निरंतर प्रयास करते रहने के लिए प्रेरित किया।

मानसिक परेशानी में मदद लेने से न हिचकें विद्यार्थी

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुनते हुए तनाव के कारणों की पहचान करने और उनसे निपटने के सकारात्मक तरीकों पर चर्चा की। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। अपनी भावनाओं को व्यक्त करना, जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से सहायता लेना, सकारात्मक सामाजिक संबंध बनाए रखना और परिस्थितियों को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी है।

आगरा कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग, स्टूडेंट काउंसलिंग सपोर्ट सेंटर और सुसाइड प्रीवेंशन सेल की ओर से आयोजित यह पहल विद्यार्थियों की मानसिक समस्याओं को समझने, उन्हें सहयोगपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास रही।

SP_Singh AURGURU Editor