डोभाल-वांग की बातचीत से भारत-चीन के रिश्तों में नई गर्माहट, सितंबर में शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना बढ़ी
नई दिल्ली/बीजिंग। भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा तनाव के बाद संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों के बीच मंगलवार को बीजिंग में उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क हुआ। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने चीन के विदेश मंत्री एवं भारत-चीन सीमा वार्ता के विशेष प्रतिनिधि वांग यी के साथ 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता में हिस्सा लिया। इसी बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने की संभावना ने दोनों देशों के रिश्तों में संभावित नई राजनीतिक गर्माहट के संकेत दिए हैं।
डोभाल दो दिवसीय चीन यात्रा पर हैं। वह सोमवार को बीजिंग पहुंचे थे और उनकी यह यात्रा चीनी विदेश मंत्री वांग यी के निमंत्रण पर हो रही है। विशेष प्रतिनिधि वार्ता में भारत-चीन सीमा विवाद, वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति एवं स्थिरता तथा सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों पर चर्चा हो रही है। दोनों देशों के बीच सीमा प्रश्न के समाधान और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत एक महत्वपूर्ण तंत्र रही है।
हान झेंग से भी डोभाल की मुलाकात
विशेष प्रतिनिधि वार्ता से पहले डोभाल ने मंगलवार को चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की। दोनों के बीच सीमा पर शांति एवं स्थिरता बनाए रखने तथा द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई। बातचीत में दोनों देशों के राजनीतिक, आर्थिक और बहुपक्षीय संबंधों को मजबूत करने से जुड़े मुद्दे भी शामिल रहे।
गलवान के बाद रिश्तों में आया था तनाव
भारत और चीन के संबंधों में जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद गंभीर तनाव पैदा हो गया था। इसके बाद सीमा पर सैन्य तैनाती बढ़ी और दोनों देशों के बीच कई दौर की सैन्य एवं कूटनीतिक वार्ताएं हुईं। वर्ष 2024 में सीमा के कुछ क्षेत्रों में सैनिकों की वापसी और गश्त व्यवस्था को लेकर बनी सहमति के बाद दोनों देशों ने संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ाए।
भारत का लगातार यह रुख रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता के बिना द्विपक्षीय संबंधों में पूर्ण सामान्य स्थिति संभव नहीं है। ऐसे में डोभाल और वांग यी के बीच मौजूदा वार्ता को सीमा विवाद के साथ-साथ व्यापक भारत-चीन संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीमा पर स्थिरता बनने की स्थिति में व्यापार, आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं।
सितंबर में शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना
इसी बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सितंबर में भारत आने की संभावना की खबर ने कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। रॉयटर्स ने भारतीय सूत्रों के हवाले से बताया है कि शी जिनपिंग नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ सकते हैं। यदि यह यात्रा होती है तो करीब सात साल बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा।
भारत इस वर्ष ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित है। शी की संभावित यात्रा ऐसे समय सामने आई है, जब 2020 के बाद तनावपूर्ण रहे भारत-चीन संबंधों में हाल के समय में उच्चस्तरीय संवाद फिर बढ़ा है।
400 अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल की भी चर्चा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, शी जिनपिंग के भारत आने की स्थिति में उनके साथ करीब 400 अधिकारियों का बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी आ सकता है। हालांकि, यह जानकारी सूत्रों के हवाले से है और चीन की ओर से शी की भारत यात्रा अथवा प्रतिनिधिमंडल को लेकर अभी कोई आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है।
डोभाल की वार्ता और शी की संभावित यात्रा के मायने
एक ओर बीजिंग में डोभाल और वांग यी सीमा विवाद के समाधान तथा एलएसी पर शांति बनाए रखने के मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक संपर्क बढ़ने की संभावना को रेखांकित करती है। यदि शी की यात्रा होती है तो यह भारत-चीन संबंधों में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत हो सकता है और दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए शीर्ष स्तर पर बातचीत का अवसर भी उपलब्ध करा सकती है।
हालांकि, शी जिनपिंग की भारत यात्रा अभी आधिकारिक रूप से निश्चित नहीं है। फिलहाल इसे संभावित यात्रा के रूप में ही देखा जा रहा है। अंतिम स्थिति चीन की आधिकारिक घोषणा के बाद स्पष्ट होगी। ऐसे में डोभाल-वांग वार्ता और शी की संभावित यात्रा को भारत-चीन संबंधों में जारी कूटनीतिक सक्रियता के दो महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा सकता है।