कृष्णभक्ति और ब्रज साहित्य की परंपरा के संवाहक हैं अष्टछाप कवि कृष्णदास, व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा, साहित्यकारों ने किया काव्य पाठ

गोवर्धन (मथुरा)। अष्टछाप कवि कृष्णदास महाराज का भक्ति साहित्य ब्रज की सांस्कृतिक विरासत और कृष्णभक्ति परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनकी जयंती के उपलक्ष्य में पारासोली स्थित सूरदास ब्रज भाषा अकादमी में विचार एवं काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें ब्रज भाषा के विद्वानों और साहित्यकारों ने कृष्णदास जी के व्यक्तित्व, कृतित्व और भक्ति साहित्य में उनके योगदान पर विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि अष्टछाप कवियों की रचनाएं आज भी कृष्णभक्ति की धारा को प्रवाहित करने के साथ ब्रज की भाषा और सांस्कृतिक परंपरा को समृद्ध कर रही हैं।

Oct 13, 2026 - 22:17
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कृष्णभक्ति और ब्रज साहित्य की परंपरा के संवाहक हैं अष्टछाप कवि कृष्णदास, व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा, साहित्यकारों ने किया काव्य पाठ
अष्टछाप कवि कृष्णदास जी की जयंती पर पारासोली स्थित सूरदास ब्रज भाषा अकादमी में आयोजित विचार एवं काव्य गोष्ठी में उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और कृष्णभक्ति साहित्य में योगदान पर चर्चा करते साहित्यकार।

कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी राजीव पांडेय और ब्रज भाषा के प्रमुख रचनाकार राधा गोविन्द पाठक ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर और माल्यार्पण करके किया। अकादमी के निदेशक डॉ. केशव देव शर्मा ने अतिथियों को उत्तरीय पहनाकर स्वागत किया।

शताब्दियों बाद भी प्रेरणा दे रहा कृष्णदास का साहित्य

डॉ. केशव देव शर्मा ने कहा कि कृष्णदास जी जैसे कृष्णभक्त कवियों का जीवन और साहित्य शताब्दियों बाद भी ब्रजवासियों के साथ-साथ समूचे विश्व के लिए प्रेरणास्रोत है। उनकी कविताओं में सहज ज्ञान और भक्ति की धारा निरंतर प्रवाहित होती है। ऐसे कवियों के साहित्य और विचारों को जन-जन तक पहुंचाना ब्रज भाषा की परंपरा को जीवंत बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

वक्ताओं ने कहा कि अष्टछाप के कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से कृष्णभक्ति को समृद्ध किया और ब्रज भाषा को विशिष्ट साहित्यिक पहचान दिलाई। उनकी रचनाएं आज भी श्रद्धालुओं, साहित्यकारों और ब्रज संस्कृति से जुड़े लोगों को आकर्षित करती हैं।

सरस्वती वंदना के साथ काव्य पाठ

कार्यक्रम में गोपाल उपाध्याय ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मंच संचालन ब्रज भाषा के मनीषी हरिबाबू ओम ने किया। विचार गोष्ठी के दौरान साहित्यकारों ने कृष्णदास जी के साहित्यिक अवदान पर चर्चा की और अपनी काव्य रचनाएं प्रस्तुत कीं।

इस अवसर पर पूर्ण प्रकाश कौशिक, देवी प्रसाद गौड़, केसी गौर, रेनू उपाध्याय, मोहन माही, महेश चन्द्र शर्मा, हरे कृष्ण शर्मा, डॉ. नन्द किशोर शास्त्री, अमर सिंह द्वितीय, श्याम बाबू कौशिक, मोहित मनोहर, सतीश एकांत, शिल्पी केशोरैया और कीर्ति शर्मा सहित अन्य साहित्यकारों ने विचार व्यक्त किए तथा काव्य पाठ किया।

समापन पर अकादमी के निदेशक डॉ. केशव देव शर्मा ने कार्यक्रम की सफलता के लिए अतिथियों, साहित्यकारों और सभी सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

SP_Singh AURGURU Editor