पीयूष गोयल का राहुल गांधी पर करारा पलटवार, पूछा- पिछला रिकार्ड याद है, किसी चुनाव आयुक्त को मंत्री बनाया, किसी को राज्यपाल
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक ओर जहां कांग्रेस हमलावर है तो वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस सीईसी की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है पर अपने पिछले रिकॉर्ड को पूरी तरीके से नजरअंदाज करती है। बीजेपी नेता ने पूर्व के कुछ चुनाव आयुक्तों का जिक्र कर कांग्रेस पर निशाना साधा।
नई दिल्ली। चुनाव में धांधली के आरोपों और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एलआईआर) विवाद को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच, मंगलवार को बीजेपी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने उन चुनाव आयुक्तों को इनाम दिया, जिन्होंने पूर्व में पार्टी का पक्ष लिया था। मीडिया को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता के ऊपर सवाल उठाती है पर खुद के काम और पिछले रिकॉर्ड को पूरी तरीके से नजरअंदाज करती है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने चुनाव आयोग को स्वावलंबी तरीके से देशहित और जनहित में काम करने के लिए पूरी छूट दी है। कोई भी चुनाव आयुक्त जो नियुक्त हुआ हो उसको कोई राजनीतिक लाभ देने का प्रयास नहीं किया है। उनको ईमानदारी से काम करने दिया लेकिन राहुल गांधी का अगर ट्रैक रिकॉर्ड देखें जिसको वह बड़ा नजरअंदाज कर देते हैं तो उन्होंने एक चुनाव आयुक्त को टिकट दिया। एक को केंद्रीय मंत्री बना लिया। दो सीईसी को राज्यपाल बनाया।
बीजेपी नेता ने कहा कि कांग्रेस ने टी एन शेषन को गुजरात की गांधीनगर से लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा। उन्होंने एमएस गिल को पद्म विभूषण दिया। उन्होंने उन सभी चुनाव आयुक्तों को पुरस्कृत किया जिन्होंने उनका पक्ष लिया था। बीजेपी ने पूर्व सीईसी नवीन चावला का पक्ष लेने के लिए कांग्रेस की आलोचना की। 1986 में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त आरके त्रिवेदी को गुजरात का राज्यपाल बनाए जाने का जिक्र करते हुए पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारें दूसरे संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा किए बिना ही नियुक्तियां करती थीं।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आगे कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार ही 2023 में एक नया कानून लेकर आई थी, जिसके तहत विपक्ष के नेता को सिलेक्शन कमिटी का सदस्य बनाया गया और अब विपक्ष के नेता प्रधानमंत्री के साथ बैठकर सिलेक्शन करते हैं। नवीन चावला को सीईसी इसलिए बनाया गया था क्योंकि चुनाव आयुक्त रहते हुए उन्होंने कांग्रेस का पक्ष लिया था।