आज धनतेरस के साथ दीपोत्सव का शंखनाद, छह दिनों तक रोशनी और खुशियों से जगमगाएगा आगरा
आगरा में शुक्रवार छह नवंबर को धनतेरस के साथ छह दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत हो रही है। इस बार तिथियों के विशेष संयोग के कारण दीपावली का उत्सव 11 नवंबर तक चलेगा। सात नवंबर को छोटी दीपावली, आठ नवंबर को मुख्य दीपावली और लक्ष्मी पूजन, नौ नवंबर को सोमवती अमावस्या, 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट तथा 11 नवंबर को भाई दूज मनाई जाएगी। धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा के साथ सोना-चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी होगी।
आज से शुरू हुआ दीपावली का महापर्व, 8 नवंबर को दीपावली, 10 को गोवर्धन पूजा और 11 नवंबर को भाई दूज के साथ होगा समापन
आगरा। दीपों की जगमगाहट, रंग-बिरंगी रोशनी से सजे बाजार, घरों में पूजा की तैयारियां और खुशियों से दमकते चेहरे... आखिरकार दीपावली के महापर्व का इंतजार खत्म हो गया है। शुक्रवार, छह नवंबर को धनतेरस के साथ छह दिवसीय दीपोत्सव का शंखनाद हो रहा है। सुबह से ही बाजारों में खरीदारी की रौनक दिखाई देने लगी है। सर्राफा बाजार से लेकर बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सजावटी सामान और पूजन सामग्री की दुकानों तक ग्राहकों की चहल-पहल बढ़ गई है। घरों में साफ-सफाई और सजावट के साथ दीपावली के स्वागत की तैयारियां अंतिम दौर में हैं।
इस बार पंचांग की तिथियों के विशेष संयोग के चलते पारंपरिक पांच दिवसीय दीपोत्सव का उत्सव छह दिनों तक मनाया जाएगा। धनतेरस से शुरू होने वाला यह पर्व 11 नवंबर को भाई दूज के साथ संपन्न होगा। इस दौरान धन, आरोग्य, सुख-समृद्धि, पारिवारिक प्रेम और आध्यात्मिक चेतना से जुड़े अलग-अलग पर्व मनाए जाएंगे। त्योहारों के क्रम में सात नवंबर को छोटी दीपावली और नरक चतुर्दशी, आठ नवंबर को मुख्य दीपावली और मां लक्ष्मी का पूजन, नौ नवंबर को सोमवती अमावस्या का विशेष संयोग, 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट तथा 11 नवंबर को भाई दूज मनाई जाएगी।
धनतेरस से होगी शुभता और समृद्धि की शुरुआत
कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाने वाला धनतेरस दीपोत्सव का पहला और महत्वपूर्ण पर्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। इसलिए धनतेरस केवल धन-संपत्ति की प्राप्ति का पर्व नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य, निरोगी जीवन और दीर्घायु की कामना का भी विशेष अवसर है। इस दिन धन के देवता कुबेर, सुख-समृद्धि की अधिष्ठात्री मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
सोना-चांदी, बर्तन और झाड़ू खरीदने की परंपरा
धनतेरस पर खरीदारी को विशेष शुभ माना जाता है। इस दिन सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के, पीतल, तांबे और चांदी के बर्तन खरीदने की परंपरा है। इसके अलावा साबुत धनिया, झाड़ू, मिट्टी के दीपक और पूजन सामग्री की खरीदारी भी की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में झाड़ू को मां लक्ष्मी के आगमन और घर की स्वच्छता से जोड़कर देखा जाता है। यही कारण है कि धनतेरस पर लोग नई झाड़ू खरीदना भी शुभ मानते हैं। हालांकि, परंपरागत मान्यताओं के अनुसार इस दिन कांच, प्लास्टिक, लोहे की धारदार वस्तुओं और काले रंग की वस्तुओं की खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है। धनतेरस का वास्तविक संदेश केवल खरीदारी करना नहीं, बल्कि जीवन में स्वच्छता, स्वास्थ्य, संतुलन और सकारात्मकता को अपनाना भी है।
शाम को करें भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर का पूजन
धनतेरस की शाम घर के स्वच्छ स्थान पर भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर जी की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित कर पूजा की जाती है। धूप, दीप, पुष्प, अक्षत और नैवेद्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है। पूजन के दौरान घर में दीपक जलाए जाते हैं और मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए मुख्य द्वार को सजाया जाता है। कई घरों में रंगोली बनाकर दीपों से आंगन और प्रवेश द्वार को रोशन किया जाता है।
यम दीपदान से होती है अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना
धनतेरस की शाम यमराज के निमित्त दीपदान करने की भी विशेष परंपरा है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मिट्टी का दीपक जलाया जाता है। इसमें सरसों का तेल डालकर दीप प्रज्ज्वलित किया जाता है। परिवार के सदस्यों की लंबी आयु, सुख-शांति और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
धनतेरस 2026: पूजा और खरीदारी के शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पंडित ब्रज मोहन दीक्षित दैवज्ञ के अनुसार, छह नवंबर को त्रयोदशी तिथि सुबह 10:30 बजे आरंभ होगी। धनतेरस पर पूजा और खरीदारी के लिए अलग-अलग शुभ मुहूर्त निर्धारित हैं।
धनतेरस पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त: शाम 6:01 बजे से रात 7:58 बजे तक।
प्रदोष काल: शाम 5:31 बजे से रात 8:08 बजे तक।
यम दीपदान का समय: शाम 5:31 बजे से 6:49 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:41 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक।
लाभ एवं अमृत चौघड़िया: दोपहर 1:30 बजे से शाम 4:20 बजे तक।
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, श्रद्धालु अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा-अर्चना और खरीदारी कर सकते हैं।
छह दिनों तक अलग-अलग रंग में सजेगा दीपोत्सव
इस बार दीपावली का उत्सव छह दिनों तक धार्मिक आस्था और उल्लास के अलग-अलग रंग बिखेरेगा।
6 नवंबर, शुक्रवार – धनतेरस: भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा के साथ खरीदारी और यम दीपदान होगा।
7 नवंबर, शनिवार – छोटी दीपावली और नरक चतुर्दशी: इस दिन नरकासुर पर भगवान श्रीकृष्ण की विजय की स्मृति में पर्व मनाया जाएगा। घरों में दीपक जलाकर अंधकार पर प्रकाश की जीत का संदेश दिया जाएगा।
8 नवंबर, रविवार – दीपावली और महालक्ष्मी पूजन: यह दीपोत्सव का सबसे प्रमुख दिन होगा। घरों, प्रतिष्ठानों और बाजारों में दीपों की रोशनी के बीच मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाएगी। सुख-समृद्धि और व्यापार में उन्नति की कामना होगी।
9 नवंबर, सोमवार – सोमवती अमावस्या: इस दिन अमावस्या का विशेष संयोग रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धालु स्नान, दान और पूजा-पाठ करेंगे।
10 नवंबर, मंगलवार – गोवर्धन पूजा और अन्नकूट: भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करने की स्मृति में गोवर्धन पूजा होगी। मंदिरों और घरों में अन्नकूट का भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया जाएगा।
11 नवंबर, बुधवार – भाई दूज: भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक भाई दूज के साथ छह दिवसीय दीपोत्सव का समापन होगा। बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।
बाजारों से घरों तक छाएगा दीपावली का उल्लास
धनतेरस के साथ ही आगरा में दीपावली की रौनक अपने चरम पर पहुंचने लगी है। बाजारों में सजावटी झालरों, रंग-बिरंगी लाइटों, मिट्टी के दीपकों, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों और पूजन सामग्री की दुकानें सज गई हैं। सर्राफा बाजार और बर्तन बाजार में भी ग्राहकों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है। छह दिनों तक चलने वाला यह उत्सव केवल रोशनी और खरीदारी का पर्व नहीं, बल्कि परिवारों को एक साथ जोड़ने, रिश्तों में मिठास घोलने और जीवन में सकारात्मकता का संचार करने का अवसर भी है। दीपों की यह श्रृंखला एक बार फिर अंधकार पर प्रकाश, निराशा पर आशा और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश लेकर आई है। आज धनतेरस के साथ आगरा में इसी उल्लासपूर्ण दीपोत्सव की शुरुआत हो रही है।