डीईआई में कारीगरों को उद्यमी बनाने की पहल, पांच उत्पादक कंपनियों के 20 शिल्पकारों को मिलेगा कारोबार और बाजार का प्रशिक्षण
आगरा। पारंपरिक हस्तशिल्प को आधुनिक बाजार और उद्यमिता से जोड़कर कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में दयालबाग शिक्षण संस्थान ने पहल की है। संस्थान के हस्तशिल्प तकनीकी प्रशिक्षण एवं कौशल केंद्र में छह दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम (ईडीपी) शुरू हुआ। वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में पांच उत्पादक कंपनियों के 20 कारीगरों को व्यवसाय संचालन, डिजाइन, विपणन और वित्तीय प्रबंधन की विशेषज्ञ जानकारी दी जाएगी।
कार्यक्रम का उद्घाटन सामाजिक विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता एवं अधिष्ठाता प्रशासन प्रो. संगीता कुमार ने किया। इसमें कांच शिल्प, धातु शिल्प, लकड़ी शिल्प, जरी-जरदोजी और बाँस शिल्प से जुड़े पांच उत्पादक कंपनियों के 20 कारीगर प्रतिभाग कर रहे हैं।
कार्यक्रम की प्रमुख पहल पारंपरिक शिल्पकारों के व्यावहारिक अनुभव और उनके पारंपरिक ज्ञान को शैक्षणिक विशेषज्ञता से जोड़ना है। इसके माध्यम से कारीगरों को केवल शिल्प उत्पादन तक सीमित न रहकर अपने कौशल को उद्यम में बदलने, व्यवसाय स्थापित करने और उसका प्रभावी संचालन करने के लिए तैयार किया जाएगा। साथ ही उन्हें बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद विकसित करने की समझ भी दी जाएगी।
उद्घाटन अवसर पर वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय के हस्तशिल्प सेवा केंद्र, आगरा से हस्तशिल्प संवर्धन अधिकारी रामजी त्रिपाठी, कालीन प्रशिक्षण अधिकारी अमित कुमार मिश्रा और अवर श्रेणी लिपिक दिनेश सिंह मौजूद रहे। डीईआई के वाणिज्य संकाय की प्रो. शालिनी दुबे, हस्तशिल्प तकनीकी प्रशिक्षण एवं कौशल केंद्र की प्रमुख डॉ. पारुल भटनागर तथा वस्त्र मंत्रालय की पैनलबद्ध डिजाइनर सुश्री शिखा चोपड़ा भी उपस्थित रहीं।
दो नवंबर से सात नवंबर तक चलने वाले इस छह दिवसीय कार्यक्रम में उद्यमिता विकास, डिजाइन, विपणन, वित्तीय प्रबंधन और डिजिटल माध्यमों से व्यवसाय के अवसरों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन दिया जाएगा। इसका उद्देश्य कारीगरों को बदलते व्यावसायिक परिवेश के अनुरूप तैयार करना और उनके उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने की क्षमता विकसित करना है।
डीईआई के निदेशक प्रो. सी. पटवर्धन ने कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं।